चन्द्रबली सिंह की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

         असलियत सभी की सामने अवश्य आतीं है। किसी की देर से आतीं है किसी की जल्दी सामने आ जाती है। बल्कि व्यवहार सब कुछ स्पष्ट कर देता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
   हमारी वास्तविकता या असलियत हमारे व्यवहार की कसौटी होती है क्योंकि किसी भी व्यक्ति के बात करने का तरीका भाव भंगिमाओं के द्वारा दूसरे लोगों के बारे में उनकी सहायता करने के अन्दाज या फिर अंदर से कुछ और ऊपर से कुछ ,असामान्य व्यवहार के आधार पर ही समाज में सोसाइटी में उसके चारित्रिक गुण में विश्वसनीयता या कटुता  की असली पहचान होती है । कभी-कभी कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपने आप में जोखिम उठाकर भी सामाजिक रूप से सहायक परोपकारी होते हैं  वह वांछित चीज की प्राप्ति करके ही रहते हैं और अप्रिय प्रतिकूल स्थितियों से बचकर व्यवहार करते हैं ।यह व्यवहार करने का ऐसा तरीका है जिसमें उनके कार्य, बात करने का ढंग, शारीरिक हाव-भाव से सब पता चल जाता है कि यह सकारात्मक व्यक्ति समाज उपयोगी है। ऐसे व्यक्ति समाज में अपनी पहचान बना लेते हैं। मदर टेरेसा ,दीनबंधु एंडरूज ,फ्लोरेंस नाइटिंगेल यह पुराने लोगों का व्यवहार ही इनकी पहचान बना। बहुत नाम हैं ऐसे। अतः हमें नकारात्मकता से बचकर अपने व्यक्तित्व की असलियत को सब के समक्ष व्यवहार के रूप में पेश करना चाहिए जो की एक पहचान होती है कि अमुक व्यक्ति कैसा है।अतः यह बात जान लेनी चाहिए  कि अच्छा व्यवहार करोड़ो लोगो के दिल में जगह बना लेता है क्योंकि  "नेकी नौ कोस, बदी सौ कोस  फैलती है" ।

-  डॉ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

     देखा जाए व्यक्ति का व्यवहार ही उसका असली परिचय बताता है लेकिन  किसी का व्यवहार जिन सिद्धांतों से बनता है वही  हमारी वास्तविक शिक्षा मानी जाती है कहने का भाव हमारा चरित्र निर्माण हमेशा जानने, समझने के स्रोतों से बनता है इसलिए व्यवहार वह दर्पण है जिससे हर कोई अपनी सच्ची छवि दिखाता है, तो आईये आज की चर्चा को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि आपकी असलियत में वास्तविकता क्या है, आपका व्यवहार इस बात की कसौटी है, मेरे ख्याल में व्यवहार ही इंसान की असली पहचान  का दर्पण है क्योंकि आप की  पहचान आपका व्यवहार आपके शब्द तथा आपके संस्कार दिखा देते हैं  यह सभी मिलकर हमारे व्यवहार को चुनौती देते हैं तभी जाकर हमारा व्यवहार हमारी असलियत दिखाने लगता है कि आखिरकार हम चाहते क्या हैं क्योंकि  इंसान की असली पहचान उसके व्यक्तित्व, व्यवहार और मूल्यों से होती है न कि उसके धन से, सम्मान अक्सर ईमानदारी, विनम्रता और दुसरों के प्रति व्यवहार से मिलता है, असल में  मनुष्य वोही है जो करूणा, दया, क्षमा,  तप, तेज,  ज्ञान आदि गुणों से भरपूर है क्योंकि यह सारे गुण मिलकर हमारा व्यवहार तय करते हैं जिस से पता चलता है कि  सामने वाले की असलियत क्या कह रही है,  देखा जाए शब्द तो बहुत कुछ कह देते हैं लेकिन व्यक्ति का असली इरादा और चाहत उसके रोज के व्यवहार से ही झलकती है,  अन्त मे यही कहुँगा कि इंसान की पहचान उसके व्यवहार से होती है, हैसियत से नहीं क्योंकि व्यवहार वो आईना है जिससे हमारी असली सोच दिख जाती है, बाकी सब मखौटा है,  यही नहीं आप दिल से क्या चाहते हैं  यह शब्द नहीं बताते जब कोई न देख रहा हो आप कैसे पेश आते हैं यह आपकी नीयत दिखाती है, घर परिवार और जिंदगी से जो सिखा  है, वोही जुवान के बाहर आने लगता है जिसे संस्कार की कसौटी भी कह सकते हैं, वास्तव में  छोटी छोटी  बातोंं को ध्यान से सुनना, वादा निभाना, गलती मान लेना तथा दुसरों का मोल समझना ही मानवता है जिसे ईमानदारी की कसौटी भी कह सकते हैं ऐसे व्यक्ति हमेशा अच्छे स्वभाव वाले और अच्छे व्यवहार वाले होते हैं तथा सभी का आदर मान करते हैं तथा परोपकारी कहलाते हैं इसलिए  व्यक्ति अपने व्यवहार, वाणी व चालचलन को बेहतर से बेहतर  रख कर बात करनी चाहिए ताकि कोई अबला, दुबला, गरीब व असहाय असानी से अपनी बात कह सके जिससे उसके हृदय में शान्ति , सुख व आनंद महसूस हो और उसे लगे कि इंसानियत जिंदा है यही इंसानियत का परम  धर्म व कर्म है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

      आपकी असलीयत में वास्तविकता क्या है, आपका व्यवहार इस बात की कसौटी है.... इसमें दो राय नहीं है कि हमारा व्यवहार ही हमारे व्यक्तित्व को उजागर करता है कि हम क्या चीज़ हैं, असलियत में हमारी वास्तविकता क्या है। मनुष्य को अपनी ओर खींचने वाला कोई चुंबक है तो वह उसका व्यवहार ही है।  किसी व्यक्ति के व्यवहार में प्रेम, विवेक, विश्वास सोहार्दता, इमानदारी एवं नि:स्वार्थ भावना ,और दूसरों को अथवा सामने वाले को समझने की शक्ति है तो हम उसे उसके इन सभी गुणों का आंकलन कर उसे व्यवहारिक है कहते हैं और यही सब गुण उसकी असलियत एवं वास्तविकता को दर्शाता है। कहते हैं ना 'व्यक्ति का व्यक्तित्व ही उसका आचरण को दर्शाता है'... और यही व्यवहार जिंदगी में व्यक्ति के व्यक्तित्व का आइना होता है।व्यक्ति का व्यवहार ही वह कसौटी है जो उसे निखारता है अर्थात उसके उपरोक्त गुण व्यक्ति की वास्तविक असलियत की पहचान है।

  - चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

       हमारी पहचान वाणी से होती है। हमारे बोलने की शब्द और शैली से सामने वाला अनुमान लगा लेता है कि हम कैसे स्वभाव और संस्कार वाले हैं। इसके बाद दूसरी पहचान हमारे व्यवहार से अनुमानित हो जाती है। यानी जो अनुमान बोली से लगाया गया, उसकी पुष्टि व्यवहार से हो जाती है। यह पुष्टि ही मुख्य आधार या यूँ माना जावे कि असल में कसौटी होती है और परिणाम देने वाली होती है। सामान्यत: इसी वाणी और व्यवहार में के सामंजस्य में अंतर होता है। कोई जो कहता है, वैसा करता भी है। कोई कहता कुछ है, करता कुछ है। कोई ऐसे भी होते हैं जो कहते नहीं, परंतु करके दिखाते हैं। कुछ लोग स्पष्टभाषी होते हैं, कुछ संकोची। कोई तेजतर्रार होते हैं,कोई मृदुल। कोई बातूनी होते हैं तो कोई मित भाषी। किसी की बातों में अहंकार नजर आता है तो किसी में विनम्रता। ऐसी अनेक विभिन्नताएं होती हैं। परंतु व्यवहार कैसा है? वही पहचान बनाता है, वही सम्मान दिलाता है। अत: स्पष्टभाषी, मृदुल और मित भाषी बोली के समानांतर व्यवहार भी वैसा हो तो सामाजिक प्रतिष्ठा अपने-आप  प्राप्त होगी और स्थायित्व भी होगा।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       मनुष्य की वास्तविकता शब्दों से नहीं, उसके व्यवहार से प्रकट होती है। हम अक्सर अपने बारे में ऊँचे विचार प्रस्तुत करते हैं, आदर्शों की बातें करते हैं, परन्तु जब व्यवहार की बारी आती है, तब हमारी असलियत उजागर होती है। यही कारण है कि कहा जाता है—“आपकी असलियत की वास्तविकता, आपके व्यवहार की कसौटी पर ही परखी जाती है।”व्यवहार वह दर्पण है जिसमें व्यक्ति का चरित्र साफ दिखाई देता है। किसी के प्रति हमारा व्यवहार कैसा है—सम्मानपूर्ण या उपेक्षापूर्ण, सहानुभूतिपूर्ण या कठोर—यही हमारे भीतर के संस्कारों और सोच को दर्शाता है। अच्छे शब्द बोलना सरल है, लेकिन उन शब्दों के अनुरूप आचरण करना ही सच्ची परीक्षा है।कई बार व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार अपना रूप बदल लेता है, परंतु सच्चा चरित्र वही होता है जो हर परिस्थिति में समान बना रहे। कठिन समय में धैर्य, सफलता में विनम्रता और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता—ये गुण ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनाते हैं।यदि हमें अपनी असलियत को समझना है, तो हमें अपने व्यवहार पर ध्यान देना होगा। क्योंकि अंततः वही व्यवहार है, जो हमें समाज में सम्मान दिलाता है और हमारे व्यक्तित्व की सच्ची पहचान बनाता है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

     यह बात तो एकदम सत्य है की व्यवहार ही हमारे वास्तविक रूप को दिखाता है। आमतौर पर हर व्यक्ति बाहर की दुनिया में कई मुखौटे लगाये हुए रहता है या यूँ कहें की कई किरदारों का अभिनय करता रहता है।सोच-समझ कर, नापतोल कर, सभ्य भाषा में बात करते हुए दिखाई देता है। हमें लगता है इनसे सभ्य और अच्छा व्यक्ति कोई दूसरा नहीं हो सकता। पर जब उसके वास्तविक व्यवहार और बातचीत को देखते-सुनते हैं तब पता चलता है जो हम देख रहे थे वह अभिनय के अतिरिक्त कुछ नहीं था।

निदा फाज़ली की प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं- 

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी 

जिस को भी देखना हो कई बार देखना 

       ये पंक्तियाँ भी इसी ओर इंगित करती हैं कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविकता को जानना-समझना हो तो उसके व्यवहार और बातचीत.. इन दोनों कसौटियों पर परख कर ही पता चलती है। जिस प्रकार कौवा और कोयल एक साथ बैठे हों, जब वे बोलते हैं तो अलग-अलग पहचाने जाते हैं। ठीक इसी प्रकार किसी भी व्यक्ति की वास्तविकता को भी उसके व्यवहार और वार्तालाप से ही भलीभाँति समझा जा सकता है। पूर्व में बनाई गयी धारणाएँ गलत और मिथ्या भी सिद्ध हो सकती हैं।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून -  उत्तराखंड

      चन्द्रबली सिंह की स्मृति में सर्वप्रथम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हमें अत्यंत गौरव का अनुभव हो रहा है। इसके लिए हम जैमिनी अकादमी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें उनकी सत्यता की कसौटी पर अपनी राय प्रस्तुत करने योग्य समझा। इस अवसर पर हम भी मानो एक अग्नि परीक्षा से गुजरते हुए अपनी केवल सकारात्मक ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट राय प्रस्तुत करना चाहते हैं। यह निर्विवाद सत्य है कि चन्द्रबली सिंह जैसे जनपक्षधर साहित्यकार ने अपने लेखन और चिंतन के माध्यम से बार-बार यह स्थापित किया कि मनुष्य की सच्ची पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती है।व्यक्ति चाहे कितनी भी बड़ी विचारधारा का दावा करे, यदि उसका आचरण न्याय, समानता और मानवीय संवेदनाओं से रिक्त है, तो उसकी वास्तविकता स्वतः उजागर हो जाती है। आज के समय में यह कसौटी और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। समाज में आदर्शों की चर्चा तो बहुत होती है, किन्तु आचरण में उनका अभाव स्पष्ट दिखाई देता है।ऐसी स्थिति में यह विचार हमें आत्ममंथन के लिए बाध्य करता है—क्या हमारा व्यवहार हमारे विचारों के अनुरूप है? क्या हम वास्तव में वही हैं, जो हम स्वयं को प्रस्तुत करते हैं? उल्लेखनीय है कि चन्द्रबली सिंह की स्मृति हमें यह प्रेरणा देती है कि हम केवल सिद्धांतों के प्रचारक न बनें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार में उतारें। सत्य, न्याय और जनहित जैसे मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात कर हम न केवल स्वयं को, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दे सकते हैं।अंततः यही कहा जा सकता है कि व्यक्ति का वास्तविक चरित्र किसी मंच या भाषण में नहीं, बल्कि उसके दैनिक व्यवहार में प्रकट होता है। यदि हमारा आचरण ही हमारी पहचान बन जाए, तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      मनुष्य की असलियत उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में झलकती है। हम जैसा कहते हैं, वैसा होना आवश्यक नहीं; पर हम जैसा करते हैं, वही हमारी सच्ची पहचान बन जाता है। व्यवहार ही वह कसौटी है, जिस पर हमारी वास्तविकता परखी जाती है। प्रसन्नचित्त और मधुर व्यवहार जीवन को सहज बना देता है। एक मुस्कान, विनम्रता और सहृदयता न केवल दूसरों के मन को स्पर्श करती है, बल्कि हमारे व्यक्तित्व को भी उज्ज्वल बनाती है। विपरीत परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति शांत और सकारात्मक रहता है, वही अपनी असलियत की सच्ची चमक दिखाता है।अतः आवश्यक है कि हम अपने व्यवहार को सरल, सच्चा और प्रसन्नचित्त बनाएं, क्योंकि अंततः वही हमारी वास्तविक पहचान बनकर सामने आता है।

- अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

     बात बिल्कुल सत्य है कि व्यक्ति की असलियत , पहचान , उसके व्यवहार से होती है !! अमीरी , गरीबी , शिक्षा , अनपढ़ता , अर्श , फर्श , उच्च , निम्न  की कसौटी पर व्यक्ति की पहचान नहीं होती अपितु व्यक्ति की असलियत परखी जाती है उसके मृदु या कटु व्यवहार से !! किसी व्यक्ति के मन मैं चाहे कुछ भी हो , जब व्यवहार अच्छा हो , तो उसकी बात सुनने को , मानने को मन करता है !! व्यक्ति के व्यवहार मैं उसके मन की भावनाएं परिलक्षित होती हैं , व व्यवहार ही सामने से व्यक्ति की पहचान बन जाता है !! जिसका मन साफ न हो , उसका व्यवहार कभी प्रिय व मधुर नहीं हो सकता !! अतः व्यवहार हो व्यक्ति की वास्तविकता का दर्पण होता है !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

      जी ! बिल्कुल सही लिखा है कि आपकी असलियत आपकी वास्तविकता क्या है, यह आपके सहज व्यवहार से जाना जा सकता है। आपका व्यवहार ही आपके व्यक्तित्व एवं चरित्र का आईना है।आपका चलना, बोलना, हँसना-मुस्कुराना,उठना-बैठना,प्रतिक्रिया देना, सब आपकी तत्कालीन मनःस्थिति के द्योतक हैं। आपके प्रतिभाव आपके वास्तविक स्वरूप को दर्शाते हैं।आप बनावटी मुस्कुराहट चेहरे पर ला सकते हैं किन्तु कब तक ? यह अधिक समय तक नहीं टिकती।आपकी असलियत तो सामने आ ही जाती है। कुछ भी छुपा नहीं रहता।सब सामने आ ही जाता है।इसीलिये कहा जाता है कि सोच समझ कर प्रतिक्रिया देना चाहिए। ऐसा व्यक्ति ही व्यवहार कुशल कहलाता है। व्यवहार कुशल व्यक्ति ही अनचाही परिस्थिति को भी अनुकूल बना लेने की सामर्थ्य रखता है। वही सफल भी होता है।सफल व्यक्ति आनंदित रहता है। सामान्य और ख़ुश रहता है। 

- डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘ उदार’

            अमेरिका

      इंसान के व्यवहार से उसके गुणों एवं कार्य विधि का पता चलता है। प्रत्येक इंसान अपने समय, सुविधा एवं आवश्यकता के अनुसार कार्य करता है। किसी के पास समय बहुत रहता है।किसी के पास समय की कमी रहती है। कोई स्वास्थ्य से परेशान रहता है तो कोई अन्य किसी कारण विशेष से।हर एक की अपनी समस्याएं होती हैं। जिसे दूसरा व्यक्ति तब तक नहीं समझ सकता जब तक उसकी स्थिति भी उसी प्रकार हो। इसलिए हम किसी को नहीं कह सकते कि आपकी असलियत में वास्तविकता क्या है। गुणवान व्यक्ति तो एक नजर में समझ में आ जाता है। चावल की हांड़ी में पकाव की स्थिति देखने के लिए केवल एक चावल देखा जाता है न कि पूरे।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

      यह कथन हमें मनुष्य के वास्तविक स्वरूप की ओर संकेत करता है। अक्सर व्यक्ति अपने शब्दों, दिखावे या सामाजिक छवि के माध्यम से स्वयं को प्रस्तुत करता है, परंतु उसकी सच्ची पहचान उसके व्यवहार में ही झलकती है। व्यवहार वह दर्पण है जिसमें व्यक्ति के संस्कार, सोच और चरित्र स्पष्ट दिखाई देते हैं।किसी भी व्यक्ति की असलियत को समझने के लिए उसके कथनों से अधिक उसके कर्मों को देखना आवश्यक है। मीठे शब्द बोलना आसान है, लेकिन उन शब्दों के अनुरूप आचरण करना ही वास्तविक परीक्षा है। जब परिस्थितियाँ अनुकूल न हों, तब भी जो व्यक्ति संयम, सहनशीलता और संवेदनशीलता बनाए रखता है, वही अपने सच्चे स्वरूप को प्रकट करता है।हमारे समाज में कई बार लोग बाहरी आडंबर और बनावटीपन के सहारे अपनी छवि गढ़ते हैं, पर समय के साथ उनका व्यवहार ही उनकी असलियत उजागर कर देता है। इसीलिए कहा गया है कि “वाणी से नहीं, कर्म से पहचान बनती है।”यह परिचर्चा हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है— क्या हमारा व्यवहार हमारे मूल्यों के अनुरूप है?‌क्या हम परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं या अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं?अंततः, यह सत्य स्पष्ट होता है कि व्यक्ति की वास्तविकता उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में बसती है। इसलिए हमें अपने आचरण को ऐसा बनाना चाहिए कि वह हमारे श्रेष्ठ संस्कारों और सच्चे व्यक्तित्व को दर्शाए।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

      उपरोक्त पंक्तियां 100% वास्तविकता के एकदम करीब है। लाख परदों में छिपा लें  - - इंसान का व्यवहार, चलना-फिरना हँसना-बोलना सब कुछ एक मिनट मे उसकी असलियत सामने ला देता है।"

"लाख छिपाओ छुप ना सकेगा राज हो कितना गहरा। 

दिल की बात बता देता है असली-निकली चेहरा।।

कितनासच है यह गीत--सच्चाई के एकदम निकट। कहते हैं ना बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी - - बिलकुल उसी तरह आपका व्यवहार आपके व्यक्तित्व का आईना होता है। आपके मुँह से निकला हुआ एक शब्द भी आपका आईना होता है। आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि  - - आपका पद आपकी गरिमा सबकुछ आपके व्यवहार से एक क्षण में समझ आ जाती है। यहाँ तक कि आपका बात करने का तरीका, आपके हावभाव आपकी हँसी सब कुछ आपके जीवन की कहानी बुनते हैं। जरूरत होती है बस एक कुशल मन के चितेरे कि जो एक क्षण में आपकी जिंदगी में से मिट्टी और मोती की पहचान कर लेता है। आपका व्यवहार आपकी असली पहचान बन जाता है जब आप चार लोगों के बीच बैठकर अपने आप को परखने की कोशिश करें। सबसे बड़ी सच्चाई है कि इंसान का अपना व्यवहार उसका दोस्त या दुश्मन होता है। चाहे तो महफिल की जान बना दे या "बडे बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले" ऐसी स्थिति में फहुंचा दे। दोस्ती दुश्मनी दुनियादारी की बाते हैं और "आपका व्यव्हार आपकी असलियत का आईना" 

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

" मेरी दृष्टि में " असलियत छुपने से कभी कोई लाभ नहीं हो सकता है। परन्तु नुकसान अवश्य हो जाता है। इसलिए हर स्थिति में कुछ भी नहीं छुपना चाहिए। असलियत से बचकर नहीं रहना चाहिए।‌ व्यवहार सब कुछ स्पष्ट कर देता है। 

     - बीजेन्द्र जैमिनी 

    (संचालन व संपादन)


Comments

  1. आदमी की असलियत में वास्तविकता क्या है उसका व्यवहार ही बतलाता है. व्यवहार ही इस बात की कसौटी है कि आदमी असल में क्या है. क्योंकि उसके अंदर क्या है उसका व्यक्तित्व कैसा है वह अच्छा है या बुरा है उसके व्यवहार से स्पष्ट रूप से पता चल जाता है. व्यवहार की कसौटी पर जो खरा उतरता है वही सच्चा इंसान है और वही उसकी वास्तविकता है.
    - दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
    कलकत्ता
    ( WhatsApp से साभार)

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  2. जीवन की कसौटी में असलियत और व्यवहार की अहम भूमिका रहती है, तभी हमारी पहचान सुखद भविष्य में मान्य रखती है। आप की असलियत में वास्तविकता क्या है, आप का व्यवहार इस बात की कसौटी है। हकीकत में व्याख्यान उचित प्रतीत होता है। कभी-कभी हम अपने वास्तविकता से भटक जाते है और हमारा व्यवहार आम जनों के बीच पहचान बन कर रसास्वादन करवाने में अहम भूमिका रखता है.....।
    -आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
    बालाघाट - मध्यप्रदेश
    ( WhatsApp से साभार)

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  3. असलियत ईमानदारी और समाज सेवा करना वास्तविकता है।मनुष्य मेहनती हो और ईमानदार हो तो भविष्य उज्ज्वल होगा ।
    आपका व्यवहार अपने आप पता चल जाएगा ।सामने वाले को पूछना नहीं पड़ता है ।आपका व्यवहार आपकी भावनाओं को
    प्रभावित करता है ।
    - सुधा पांडेय
    लदन
    ( WhatsApp से साभार)

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