डॉ. नीना छिब्बर की लघुकथाएं


               परिचय 

पिता : ओमप्रकाश वैद

जन्मतिथि : 07 अगस्त 1955

जन्मस्थान : दिल्ली

शिक्षा : एम.ए..हिंदी , अग्रेंजी , बी.एड. , पी एच डी हिंदी

सम्प्रति: स्वतंत्र लेखन


पुस्तकें : -


1. आंकाक्षा की ओर   काव्य संग्रह

2.मनोवैज्ञानिक उपन्यासों मे असामान्य पात्र।  शोध प्रबंध

3. टचस्क्रीन ओर अन्य लघुकथाएं  संग्रह( एकल )

4. नदी खिलखिलायी.. हाइकु संग्रह ..एकल 


साझा संग्रह : -


1. खिडकियों में टंगे हुऐ लोग । लघुकथा संग्रंह सांझा ।

2 किस को पुकारू। कन्या भ्रूण हत्या पर लघुकथा संग्रह

3 एक सौ इककीस लघुकथाए सह लेखन

4 शब्दों की अदालत  अंतरराष्ट्रीय काव्य संग्रह

5. परदे के पीछे की बे खौफ आवाजे अंतराष्ट्रीय काव्य संग्रंह

6 अविरल धाराकाव्य संग्रंह

7.सहोदरी सोपान काव्य एवं लघुकथा संग्रंह

8.दीप देहरी पर।  लघुकथा संग्रह।

9. वर्जिन साहित्य लघुकथा मंजुषा ,2

10. अविराम कविता खंड  1 कविताऐ

11.  समकालीन हिंदी कविता खंड 2 कविताऐ

12. प्रतिमान मे नवयुग कथा पंजाबी मे अनुदित

13. काव्य रत्नावली संकलन

14.  समकालीन प्रेम विषयक लघुकथाए.

15.दास्तानें किन्नर.... लघुकथा संग्रह

16. सहोदरी कहानी संग्रह 2

17. संरचना में लघुकथा।

18. समय की दस्तक लघुकथा संकलन

19. मशाल काव्य संग्रह. परिवर्तन साहित्यिक मंच ।

20. सपनों से हकीकत तक काव्य संकलन    पटियाला

21. अग्नि शिखा काव्य धारा संकलन  2019

22.. चमकते कलमकार भाग दो. साझा संग्रह कविता में सहभागिता ।

23  . दलित विमर्श की लघुकथाएं ..


सम्मान : -


कथादेश 2017 अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता मे पाँचवा स्थान।

 विश्व हिंदी संस्थान कनाडा की ओर से , कविता आमंत्रण  मे कविता  बेटियाँ को प्रशस्ति पत्र।

उदीप्त प्रकाशन द्वारा  लघुकथा श्री एवं  काव्य भूषण सम्मान।

हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव 2017 हिंदी साहित्य सेवा सम्मान

काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान 2017

भाषा सहोदरी   2016/2017  लघुकथा एवं कविता के लिए प्रशस्ति पत्र।

कलम की आवाज ऐरावत  आन लाईन विराट कवि सम्मेलन मे  सम्मान पत्र।

काव्य रंगोली मातृत्व ममता सम्मान 2018

साहित्य सरोज लघुकथा प्रतियोगिता2018 लघुकथा चक्की को तृतीय स्थान।

इंदौर की शुभसंकल्प संस्था की ओर से कहानी प्रतियोगिता में तृतीय स्थान।

जैमिनी अकादमी द्वारा अखिल भारतीय हिंदी लघुकथा- 24 में प्रतियोगिता  प्रथम पुरस्कार।

अमृत धारा साहित्य महोत्सव 2018

अमृतादित्य साहित्य गौरव।

शब्द शक्ति साहित्यिक संस्था गुरूग्राम(  पिता) विषय पर श्रेष्ठ कविता  सम्मान पत्र। 2019

इंड़िया बेस्टीज अवार्ड 2019  जयपुर (,शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में)

 नारी अभिव्यक्ति मंच पहचान  हिंदी लघुकथा प्रतियोगिता 2019 माँ शकुंतला कपूर स्मृति सम्मान  श्रेष्ठ लघुकथा पुरस्कार।

अग्नि शिखा साहित्य ग़रव सम्मान2019

साहित्योदय ,साहित्य कला,संगम द्वारा ...साहित्योदय शक्ति सम्मान 2020.

  समर्पण फाउड़ेशन जोधपुर महिला दिवस 2020 आलेख प्रतियोगिता विषय (सशक्त नारी सशक्त समाज) द्वितीय पुरस्कार।।

मगसम संस्था द्वारा रचना धर्मिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन

गणतंत्र  साहित्य गौरव सम्मान.।।

 प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 रत्नावली सम्मान।

 मीरा भाषा सम्मान ..लघुकथा विधा...  2020

रक्त फाउड़ेशन कोष आलेख ..प्रथम स्थान 2020


पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशन : -


 नवल पत्रिका. कथा बिंब, कथादेश, मधुमती, साहित्य समीर दस्तक, सृजन कुंज, दृष्टि, प्रतिमान. आधुनिक साहित्यिक ,सुसंभाव्य पत्रिका ,सृजन महोत्सव  मगसम मे लघुकथाए एवं कविताएँ

ई पत्रिकाएं : -हस्ताक्षर वेब, साहित्य सुधा ,परिवर्तन ई पत्रिका ,शब्दार्थ पत्रिका, नारी अस्मिता पत्रिका मे लघुकथाए एवं कविताएं।


पता : - 

17/653 , चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड

जोधपुर 342008 राजस्था

‌               डॉ. नीना छिब्बर की लघुकथाएं :-

           1.पद चिन्ह

   

  ..प्रसिद्ध ,धनाढ्य ,समाज सेवी,मिस्टर सहगल के हाथों मे फोन का रिसीवर था और चेहरे पर मुर्दनी थी।अपने कानो पर विश्वास नही हो रहा था। पुलिस अधिकारी की बातें पिघले सीसे की तरह कानो मे बह रही थी।" मान्यवर, अपने पुत्र सौम्य को थाने से आकर ले जाइये।मात्र आपकी प्रतिष्ठा मे दाग न लगे  इसीलिए आपके पुत्र को अन्य लडको से अलग रखा है। सौम्य ग्यारह बारह साल का ,सातवी कक्षा का छात्र था।जिसे कभी अभावों की आँच भी पिता ने आने नही दी थी।आज विधालय समय मे उच्च कक्षा के छात्रों के साथ बगीचे मे बियर पार्टी

मनाते हुए पकड़ा गया। बाल अपराध कानून के तहत उसे दंडित ना करके ,मुक्त किया गया क्योंकि वह धनाढय सहगल का पुत्र था।

          चमचमाती कार मे बैठते ही मासूम निसंकोच बोला, पापा पुलिस अंकल गंदे हैं।मै तो आप के पदचिन्हों पर चलने की कोशिश कर रहा था। आप ही परसों शाम शर्मा अंकल के साथ घर मे 

पार्टी कर रहे थे,हाथ मे गिलास था,जब मै पास से निकला तो आप ने अंकल से कहा शर्मा देखना मेरा बेटा मुझ से दो कदम आगे जाएगा। तभी मुझे गर्व होगा.।यह करेगा मेरा नाम रोशन।

मैने तो बारहवी मे पहला घूंट लिया था।पर  आज के बच्चे आगे जाएंगे, बहुत आगे, हर क्षेत्र मे।

                मैंने सोचा पढाई मे तो मै अव्वल हूँ ही आपके चेहरे पर एकस्ट्रा मुस्कान लाने के लिए यह सब किया।आप ही तो मेरे आदर्श हैं।आप को  प्राउडफील  करवाने के लिए ही पार्टी दी।

           माफ करना, पापा, मैं तो बच्चा हूँ ना! नादान हूँ ना!पता नही था की पार्टी  घर मे देनी चाहिए बगीचे मे नही। घर पर तो पुलिस अंकल  भी आते हैं। आगे से ध्यान रखूंगा। सहगल साहब, निरूत्तर हो कर अपने ही भीतर झाकनें से डरने लगे।क्या कहे उसे और कैसे । ****

        

         2.वाईब्रेशन मोड

    

   अपर्णा ने बडे प्यार से रोमेश को पूछा कि पिछले कई महीनों से आपके व्यवहार मे अनोखा परिवर्तन देख रही हूँ जब नयी नौकरी  लगी थी तब तो आप खूब खुश थे ,फिर अब अजीब सा व्यवहार  क्यों कर रहे हो।कल मैंने आप की पसंद का खाना बनाया, साडी आप के पसंद की,यूँ कहें कि घर की सजावट से लेकर खुशबू तक आपके मनरूप, पर आप प्रतिक्रिया हीन थे।

   अपर्णा ने प्रेमल शब्दों मे रोमेश से उसकी दुविधा जाननी चाही।दोनों युवा थे स्वप्निल समय था पर माहौल भावशून्य।रोमेश ने कुछ पल नजरे यहाँ वहाँ दौडाई। अपर्णा को गुस्सा आ गया उसनें जोर से झकझोर दिया।सुनते हो। वह ऐसे हिल्ला जैसे वाईब्रेशन मोड पर रखा मोबाईल कंपन करता है।

       रोमेश झटके से उठा और बोला सब ठीक है, सब ठीक है जान। पर लगता है जीवन भी वाईब्रेशन मोड पर चला गया है जहाँ आवाजें नहीं सिर्फ झटके, ही एहसास जगाते है ।****

    

            3.भूल सुधार

     

   शर्मा जी अपने एरिया के प्रमुख थे,उन्हें प्रतिदिन इस बात का लेखा जोखा रखना पडता था कि किस एरिया मे कितने आक्सीजन सिलेंडरो का वितरण कब,कहाँ,कैसे करना है।आज भी रोज की तरह  एक हाथ मे चाय का कप,दूसरे मे कलम लेकर काम कर रहे थे।अचानक दरवाजे पर धडाधड की ध्वनि हुई।शर्मा जी बौखलाए कौन मूर्ख है जिसे घंटी नही दिख रही। अ़दर से चिल्लाए    ,   भ ई दरवाजा खुला है आ जाओ पर कोई उत्तर नही,आवाजें और तेज। गुस्से से बाहर आए तो दृश्य देखकर पैरों तले की जमीन खिसक गई।

            सामने एक पीपल का पेड़ खडा था।हाथ जोड कर बोला कृपया मुझे प्रतिदिन दो आक्सीजन सिलेंडर दे सकते हैं क्या?शर्मा जी ने अपने आप को चूयँटी काटी ,जो वृक्ष स्वयं चौबीसों घंटे सब जीवों को आक्सीजन देता है वह माँग रहा है। पेड ने कहा मैं आक्सीजन देता हूँ ,नहीं पहले देता था क्योंकि लोगों ने मुझे इस काबिल भी नही छोडा। मैं अपने साथ सबूत लाया हूँ।

          पीपल के  शाखा रूपी हाथों पर सूखे फूलों की मालाऐ, अगरबत्ती की डंडिया, अधजली रूई की बतियाँ, टूटे दीपक, फटे कैलेंडर, पुरानी ईश्वर की मूर्तियां, बचा खुचा प्रसाद था।सबसे अजीब सी गंध आ रही थी।शर्मा जी की नजरे झुक गई। पीपल बोला ,दिवाली से पहले तो मैं कचरा पात्र से बदतर बन जाता हूँ।

मेरे चबूतरे पर इतना प्लास्टिक का सामान है कि साँस लेना दूभर हो गया है।

          आज दाता याचक बन दरवाजे पर खडा है।शर्मा जी ने क्षमा माँगी और वचन दिया कि हम सब  इस भूल को सुधारेंगे। प्रकृति केअकूत  आक्सीजन भंडार को एवं देवतुल्य पीपल को स्वच्छ रखेंगे। संपूर्ण मानवजाति की ओर से पुनः क्षमा याचना की।****


             4.मजबूत

   

शामजी अपनी पत्नी माला के साथ ठेकेदार के बताए पते पर पहुँच गया। ठेकेदार ने उन्हें हमेशा की तरह पत्थर तोड़ना, रेत छानना और रात को सामान की जिम्मेदारी का काम सौंपा। यह काम कम से कम छः महिने चलने वाला था।सबसे पहले दोनों ने अन्य मजदूरों से परिचय किया। फिर  ठेकेदार से  टिन की चादरें लेकर ,प्लास्टिक की शीट और बाँस खपच्चियों से घर तैयार किया। शामजी ने पत्थरों का चूल्हा बनाया और माला ने चाय  बनाई । दोनों दसियों जगह ऐसा ही अस्थाई घर बना कर लोगों के स्थाई घर बनाते थे ।

             जहाँ शेष मजदूर  गरीबी, बदकिस्मती, परेशानियों की बातें कर के खुद भी दुखी होते और ओरों को भी करते थे वहीं दोनों पत्थर तोड़ते हुए कभी- कभी आपस में आँख मटका भी कर लेते तब पसीने से तरबतर चेहरे पर अलग ही नूर आ जाता। शामजी तो सूरज से  बातें करता "चल तेरी मेरी पकड़म पकड़ाई। काम खत्म होते ही औरतें गप्पे मारती हुँई खाना पकाती। अधिक तर  मर्द  देसी दारु पी कर हंगामा करते, वहीं शामजी और माला आज के अभाव और कल की आवशकताओं की लिस्ट बनाते- बिगाड़ते। 

     हाँ अपने घर की आस तो थी पर हाथों पर विश्वास भी था। 

रात को छोटे घर में दरी बिछा कर लेटते हुए कई बार पहले जो मकान बनाए और उनमें रहने का अनुभव याद कर के खुश होते।

दोनों मजाक करते कि शहर के कई कोनों में हमारा घर है।उन दोनों की खुशी इसी बात में थी कि मकानमालिक के पहले तो मजदूर ही रहते हैं।शाम जी जानते थे कि मंहगाई के इस दौर में जीना सब के लिए कठिन है वह उन मित्रों को  भी समझाता जो नशे पते में पैसे खराब करते थे कि मेहनत को गटर में क्यों बहाते हो।

       ठेकेदार भी उसे मजदूर शामजी नहीं मजबूत शामजी  कहता था।****

    

        5.परिंदों का घर

   

    मालती ने जी कडा कर के अपने बेटे सक्षम को प्रतियोगी परीक्षा पूर्व तैयारी के लिए कोटा भेज ही दिया, पर नौकरी की व्यस्तता के कारण पहली बार उसके साथ ना जा सकी.।आज एक साथ तीन छुट्टियाँ पडने पर  ,अकेले ही अचानक पहुँच कर सक्ष्म को आंनद एवं स्वयं को विश्वास दिलाना चाह रही थी कि सब ठीक है।दिल और दिमाग मे सदा कशमकश चलती थी कि अकेले ,घर से दूर ,अनजान लोगो के बीच कैसे रहता होगा।अनेक अच्छी बुरी घटनाएं कभी कभी मन को हताश करती पर विश्वास की डोर उम्मीद  को जिंदा रखती।

            दोपहर के तीन बजे थे, छात्रों का आराम करने का समय।मालती ने धडकते दिल से मेन गेट खोला, नीचे के हिस्से मे मकान मालिक एवं ऊपर दो कमरो मे छात्र। सीढियां चढते एक तस्वीर आँखों के सामने   थी,बिखरा कमरा,उल्टे सीधे पडे कपडे, जूते,, पलंग पर पानी की खाली बोतलें, कुछ नमकीन के खाली रैपर व सब के बीच बच्चे बतियाते या मोबाईल के साथ। जैसे ही दरवाजे पर थपकी देने लगी, दरवाजे पर लिखे शब्दों ने मंत्रमुग्ध कर दिया। परिंदों का घर।

              धीरे से धक्का देते ही दरवाजा खुला, चारों ओर शांति, पलंगों पर करीने से बिछी चादरें, अलमारी बंद,  हाँ मेज पर कुछ किताबें खुली पडी थीं जो दर्शा रही थीं कि कार्य प्रगति पर है।एक छात्र चाय बना रहा था,शेष तीन फर्श पर अधलेटे किसी सवाल का हल निकाल रहे थे। सक्षम मुडा,माँ को देख कर चीखा और गले लग गया। शेष तीनों ने सामान संभाला, पानी पिलाया व चाय भी ले आए। मालती हतप्रभ, समझ गई ,सुरक्षा चक्र से निकल, परिस्थितियों , काल व आवश्यकता ने परिंदों को बहुत कुछ सीखा दिया। मालती ने सब को प्यार किया। सब ने एक साथ कहा, सब ठीक है ना, पर आप लोगों के लिए अविश्सनीय

। ****

      ==================================


        जीवन के मूल्यों 

डॉ. नीना छिब्बर की प्रस्तुत लघुकथाएँ—“पद चिन्ह”, “वाइब्रेशन मोड”, “भूल सुधार”, “मजबूत”, “परिंदों का घर” और “चिड़िया उड़”—समकालीन जीवन की गहरी संवेदनाओं, सामाजिक विडंबनाओं और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उजागर करती हैं।इन सभी कथाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से बड़े सामाजिक प्रश्नों को उठाती हैं। लेखक ने व्यंग्य, यथार्थ और भावनात्मकता का सुंदर समन्वय किया है, जिससे हर कथा पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ती है। “पद चिन्ह” में परिवार और संस्कारों की विडंबना को अत्यंत तीखे व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जहाँ एक बच्चा अपने ही पिता के आचरण को दर्पण की तरह सामने रख देता है। यह कथा आधुनिक अभिभावक-शिक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाती है। “वाइब्रेशन मोड” में रिश्तों के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी और संवादहीनता को प्रतीकात्मक रूप से मोबाइल के वाइब्रेशन मोड से जोड़ा गया है, जो अत्यंत सटीक और आधुनिक बिंब है। “भूल सुधार” पर्यावरण चेतना पर आधारित एक सशक्त रचना है, जहाँ प्रकृति स्वयं मनुष्य से संवाद करती है। पीपल वृक्ष का याचक बनना मानव की लापरवाही और पर्यावरणीय संकट का गहरा संकेत है। “मजबूत” लघुकथा श्रमजीवी जीवन की गरिमा और आत्मसम्मान को उजागर करती है। अभावों के बीच भी जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण इसे अत्यंत प्रेरक बनाता है। “परिंदों का घर” मातृ-हृदय की चिंता और युवा पीढ़ी की स्वावलंबन क्षमता के बीच संतुलन स्थापित करती है। यह कथा विश्वास और जिम्मेदारी की सुंदर मिसाल है। “चिड़िया उड़” एक खेल के माध्यम से जीवन-दर्शन प्रस्तुत करती है। यह कथा सरलता में गहराई लिए हुए है, जहाँ जीवन की उड़ान को स्वीकार करने का संदेश अत्यंत प्रभावी ढंग से सामने आता है। समग्र रूप से इन लघुकथाओं की भाषा सहज, प्रवाहमयी और संवाद शैली में है। व्यंग्य और संवेदना का संतुलन इन रचनाओं को विशेष बनाता है। लेखक ने आधुनिक जीवन की जटिलताओं को सरल प्रतीकों के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। निष्कर्षतः, ये लघुकथाएँ न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि पाठक को सोचने, आत्ममंथन करने और जीवन के मूल्यों को समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं।

- डाॅ.छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान


विविध आयामों पर गंभीर चिंतन

भारतीय लघुकथा विकास मंच, जैमिनी अकादमी हरियाणा द्वारा पाठकों के मध्य डॉ. नीना छिब्बर की लघुकथाओं पर अपने विचार व्यक्त करना न केवल साहित्यिक आनंद का विषय है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और जीवन-दर्शन से साक्षात्कार कराने वाला अनुभव भी है। उनकी प्रत्येक लघुकथा अपने भीतर एक गहन संदेश, तीक्ष्ण व्यंग्य और संवेदनशील अंतर्दृष्टि समेटे हुए है।

'पद चिन्ह' आधुनिक अभिभावकों के लिए एक सशक्त दर्पण है। यह कथा स्पष्ट करती है कि बच्चे उपदेशों से कम और आचरण से अधिक सीखते हैं। माता-पिता के कर्म ही उनके बच्चों के वास्तविक आदर्श बनते हैं। डॉ. नीना छिब्बर ने अत्यंत सहजता से यह स्थापित किया है कि यदि हम स्वयं अपने पदचिन्हों को स्वच्छ नहीं रखेंगे, तो अगली पीढ़ी से सही दिशा की अपेक्षा करना व्यर्थ होगा।

'वाईब्रेशन मोड' आज के व्यस्त, यांत्रिक और भावशून्य होते दांपत्य जीवन का सजीव चित्रण है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में संवाद की मधुर ध्वनियाँ कहीं खो गई हैं, और केवल औपचारिक झटके ही संबंधों को जीवित होने का आभास देते हैं। यह लघुकथा आत्ममंथन के लिए विवश करती है।

'भूल सुधार' पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली रचना है। पीपल के वृक्ष को मानवीय स्वर देकर लेखिका ने मनुष्य की पर्यावरण-विरोधी प्रवृत्तियों पर करारा प्रहार किया है। यह कथा हमें स्मरण कराती है कि प्रकृति हमारी उपेक्षा नहीं, संरक्षण की अधिकारी है।

'मजबूत' श्रम, स्वाभिमान और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का प्रेरक आख्यान है। अभावों के बीच भी जो व्यक्ति अपने श्रम और आशा पर विश्वास रखता है, वही वास्तव में मजबूत होता है। शामजी और माला का चरित्र श्रमिक वर्ग की अदम्य जीवटता का प्रतिनिधित्व करता है।

'परिंदों का घर' मातृत्व, विश्वास और आत्मनिर्भरता की भावनाओं से ओतप्रोत है। घर से दूर रहने वाले विद्यार्थियों के संघर्ष, अनुशासन और आत्मविकास का यह अत्यंत मार्मिक चित्रण है। यह कथा हर उस माता-पिता को आश्वस्त करती है जो अपने बच्चों को सपनों की उड़ान के लिए घर से दूर भेजते हैं।

और अंततः, 'चिड़िया उड़' जीवन के प्रति आशा, जिजीविषा और संघर्षशीलता का अनुपम संदेश देती है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, जीवन को उड़ान भरनी ही चाहिए। यही मनुष्य की सबसे बड़ी विजय है।

डॉ. नीना छिब्बर की ये लघुकथाएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि जीवन के विविध आयामों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी लेखनी सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और नैतिक चेतना की सशक्त वाहक है। ऐसी रचनाएँ साहित्य को केवल समृद्ध ही नहीं करतीं, बल्कि समाज को भी दिशा प्रदान करती हैं। अन्ततः डॉ. नीना छिब्बर की लेखनी को मेरा सादर नमन।

 - डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर 

 बदलते समय की परिपक्वता 


डॉ. नीना छिब्बर की इन लघुकथाओं की समीक्षा क्रमशः इस प्रकार है—

1. पद चिन्ह

यह लघुकथा अभिभावक और संतान के संबंधों के उस यथार्थ को उजागर करती है जहाँ बच्चे उपदेश नहीं, बल्कि व्यवहार से सीखते हैं। सहगल जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति का आचरण ही उसके पुत्र के लिए आदर्श बन जाता है और वही अनुकरण उसे गलत दिशा में ले जाता है। कथा का सबसे प्रभावशाली पक्ष बच्चे की मासूम तर्कशक्ति है, जो व्यंग्य के माध्यम से पिता को आत्ममंथन के लिए विवश कर देती है। अंत अत्यंत मार्मिक और चुभता हुआ है।

2. वाइब्रेशन मोड

यह लघुकथा आधुनिक दांपत्य जीवन में बढ़ती भावनात्मक दूरी और संवादहीनता का सूक्ष्म चित्रण करती है। “वाइब्रेशन मोड” का रूपक अत्यंत सटीक है, जहाँ जीवन में संवेदनाएँ मौन हो जाती हैं और केवल झटकों से ही अस्तित्व का आभास होता है। कथा का वातावरण शांत लेकिन भीतर से रिक्तता से भरा हुआ है, जो पाठक को गहरे स्तर पर सोचने के लिए प्रेरित करता है।

3. भूल सुधार

यह कथा पर्यावरण और प्रकृति के प्रति मनुष्य की उपेक्षा पर तीखा प्रहार करती है। पीपल वृक्ष का मानवीकरण करके उसकी पीड़ा को जिस तरह सामने लाया गया है, वह अत्यंत प्रभावी है। धार्मिक आस्था के नाम पर फैलाए जा रहे प्रदूषण की ओर संकेत करते हुए कथा आत्मग्लानि और सुधार की भावना जगाती है। अंत में क्षमा और संकल्प का भाव इसे सार्थक बनाता है।

4. मजबूत

यह लघुकथा श्रमिक जीवन के संघर्षों के बीच सकारात्मक सोच और आत्मसम्मान की ताकत को दर्शाती है। शामजी और माला का चरित्र अभावों के बावजूद संतोष और श्रम की गरिमा का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उनकी जीवन दृष्टि उन्हें अन्य मजदूरों से अलग और वास्तव में “मजबूत” बनाती है। कथा में सादगी के साथ प्रेरणा का भाव गहराई से उभरता है।

5. परिंदों का घर

यह लघुकथा माता की चिंता और बच्चों की आत्मनिर्भरता के बीच के अंतर को सहज रूप में प्रस्तुत करती है। मालती की आशंकाएँ जब वास्तविकता से टकराती हैं, तो एक सकारात्मक और संतोषजनक चित्र सामने आता है। “परिंदों का घर” शीर्षक स्वतंत्रता, अनुशासन और सामूहिक जीवन के सुंदर संतुलन का प्रतीक बनकर उभरता है। कथा विश्वास और बदलते समय की परिपक्वता को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है।

- अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 


लेखनीय के माध्यम से नये-नये शब्दांश

     लेखक की विचारधारात्मक होती है, उसके मन मस्तिष्क में क्या-क्या चल रहा है, उसे गद्य और पद्य के माध्यम से लिखता जाता है। वृहद लेखक में शब्दों को नहीं देखा जाता है, अंत के ऊपर निर्भर करता है, किस रुप में अंतिम शब्द आये। आजकल मात्रात्मक को भूलते जा रहे है। शब्द कहीं मात्रात्मक कहीं भी विराम? परन्तु लघु कथा में सम्पूर्ण शब्दांश को पिरोया जाता है, जहाँ शुरुआत से अंतिम तक भावनात्मक कम शब्दों में अध्ययन रहता है। इसी आधारात्मक रुप से सारी बातों को डॉ.नीना छिब्बर ने 1- पद चिन्ह, 2- वाइब्रेशन मोड, 3- भूल सुधार, 4- मजबूत, 5- परिंदों का घर, 6- चिड़िया उड़। में लेखनीय के माध्यम से दर्शाया है,उन्होंने समस्त भावनाओं केंद्रित किया है, उनकी विचारधाराओं का सादर नमन हैं। उन्हें शुभ कामना है। इसी तरह से अपनी लेखनीय के माध्यम से नये-नये शब्दांश को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करें।

-आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

      बालाघाट - मध्यप्रदेश

Comments


  1. लेखक की विचारधारात्मक होती है, उसके मन मस्तिष्क में क्या-क्या चल रहा है, उसे गद्य और पद्य के माध्यम से लिखता जाता है। वृहद लेखक में शब्दों को नहीं देखा जाता है, अंत के ऊपर निर्भर करता है, किस रुप में अंतिम शब्द आये। आजकल मात्रात्मक को भूलते जा रहे है। शब्द कहीं मात्रात्मक कहीं भी विराम? परन्तु लघु कथा में सम्पूर्ण शब्दांश को पिरोया जाता है, जहाँ शुरुआत से अंतिम तक भावनात्मक कम शब्दों में अध्ययन रहता है। इसी आधारात्मक रुप से सारी बातों को डॉ.नीना छिब्बर ने 1- पद चिन्ह, 2- वाइब्रेशन मोड, 3- भूल सुधार, 4- मजबूत, 5- परिंदों का घर, 6- चिड़िया उड़। में लेखनीय के माध्यम से दर्शाया है,उन्होंने समस्त भावनाओं केंद्रित किया है, उनकी विचारधाराओं का सादर नमन हैं।
    उन्हें शुभ कामना है। इसी तरह से अपनी लेखनीय के माध्यम से नये-नये शब्दांश को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करें।
    -आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
    बालाघाट-मध्यप्रदेश
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  2. आदरणीया डा.नीना छिब्बर जी की लघुकथाएं बहुत ही बढ़िया हैं।आप का दिल से आभार।आप ने इतनी अच्छी लघुकथाएं मुझे पढ़ने के लिए उपलब्ध कराई।आप ऐसे ही मुझे लघुकथाएं भेजते रहना आप को दिल से आभार 🙏🙏🙏
    - कैलाश ठाकुर
    - नंगल टाउनशिप - पंजाब
    (WhatsApp से साभार)

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  3. धन्यवाद सर 🙏नीना जी की लघुकथाएं पढ़कर बहुत अच्छा लगा और उसकी समीक्षा से भी बहुत कुछ सिखने का मौका मिला !
    - सीमा रानी
    ‌‌पटना - बिहार
    (WhatsApp से साभार)

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  4. निस्संदेह नीना जी की लघु कथाएं बहुत ही बढ़िया है विशेष कर पद चिन्ह परिंदों का घर अच्छी लगी धन्यवाद gemini जी लघु कथाएं भेजने का । पढ़ कर बहुत कुछ सीखने को मिला और समीक्षा पढ़कर भी आनंद आया

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