डॉ. नीना छिब्बर की लघुकथाएं
परिचय
पिता : ओमप्रकाश वैद
जन्मतिथि : 07 अगस्त 1955
जन्मस्थान : दिल्ली
शिक्षा : एम.ए..हिंदी , अग्रेंजी , बी.एड. , पी एच डी हिंदी
सम्प्रति: स्वतंत्र लेखन
पुस्तकें : -
1. आंकाक्षा की ओर काव्य संग्रह
2.मनोवैज्ञानिक उपन्यासों मे असामान्य पात्र। शोध प्रबंध
3. टचस्क्रीन ओर अन्य लघुकथाएं संग्रह( एकल )
4. नदी खिलखिलायी.. हाइकु संग्रह ..एकल
साझा संग्रह : -
1. खिडकियों में टंगे हुऐ लोग । लघुकथा संग्रंह सांझा ।
2 किस को पुकारू। कन्या भ्रूण हत्या पर लघुकथा संग्रह
3 एक सौ इककीस लघुकथाए सह लेखन
4 शब्दों की अदालत अंतरराष्ट्रीय काव्य संग्रह
5. परदे के पीछे की बे खौफ आवाजे अंतराष्ट्रीय काव्य संग्रंह
6 अविरल धाराकाव्य संग्रंह
7.सहोदरी सोपान काव्य एवं लघुकथा संग्रंह
8.दीप देहरी पर। लघुकथा संग्रह।
9. वर्जिन साहित्य लघुकथा मंजुषा ,2
10. अविराम कविता खंड 1 कविताऐ
11. समकालीन हिंदी कविता खंड 2 कविताऐ
12. प्रतिमान मे नवयुग कथा पंजाबी मे अनुदित
13. काव्य रत्नावली संकलन
14. समकालीन प्रेम विषयक लघुकथाए.
15.दास्तानें किन्नर.... लघुकथा संग्रह
16. सहोदरी कहानी संग्रह 2
17. संरचना में लघुकथा।
18. समय की दस्तक लघुकथा संकलन
19. मशाल काव्य संग्रह. परिवर्तन साहित्यिक मंच ।
20. सपनों से हकीकत तक काव्य संकलन पटियाला
21. अग्नि शिखा काव्य धारा संकलन 2019
22.. चमकते कलमकार भाग दो. साझा संग्रह कविता में सहभागिता ।
23 . दलित विमर्श की लघुकथाएं ..
सम्मान : -
कथादेश 2017 अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता मे पाँचवा स्थान।
विश्व हिंदी संस्थान कनाडा की ओर से , कविता आमंत्रण मे कविता बेटियाँ को प्रशस्ति पत्र।
उदीप्त प्रकाशन द्वारा लघुकथा श्री एवं काव्य भूषण सम्मान।
हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव 2017 हिंदी साहित्य सेवा सम्मान
काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान 2017
भाषा सहोदरी 2016/2017 लघुकथा एवं कविता के लिए प्रशस्ति पत्र।
कलम की आवाज ऐरावत आन लाईन विराट कवि सम्मेलन मे सम्मान पत्र।
काव्य रंगोली मातृत्व ममता सम्मान 2018
साहित्य सरोज लघुकथा प्रतियोगिता2018 लघुकथा चक्की को तृतीय स्थान।
इंदौर की शुभसंकल्प संस्था की ओर से कहानी प्रतियोगिता में तृतीय स्थान।
जैमिनी अकादमी द्वारा अखिल भारतीय हिंदी लघुकथा- 24 में प्रतियोगिता प्रथम पुरस्कार।
अमृत धारा साहित्य महोत्सव 2018
अमृतादित्य साहित्य गौरव।
शब्द शक्ति साहित्यिक संस्था गुरूग्राम( पिता) विषय पर श्रेष्ठ कविता सम्मान पत्र। 2019
इंड़िया बेस्टीज अवार्ड 2019 जयपुर (,शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में)
नारी अभिव्यक्ति मंच पहचान हिंदी लघुकथा प्रतियोगिता 2019 माँ शकुंतला कपूर स्मृति सम्मान श्रेष्ठ लघुकथा पुरस्कार।
अग्नि शिखा साहित्य ग़रव सम्मान2019
साहित्योदय ,साहित्य कला,संगम द्वारा ...साहित्योदय शक्ति सम्मान 2020.
समर्पण फाउड़ेशन जोधपुर महिला दिवस 2020 आलेख प्रतियोगिता विषय (सशक्त नारी सशक्त समाज) द्वितीय पुरस्कार।।
मगसम संस्था द्वारा रचना धर्मिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन
गणतंत्र साहित्य गौरव सम्मान.।।
प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 रत्नावली सम्मान।
मीरा भाषा सम्मान ..लघुकथा विधा... 2020
रक्त फाउड़ेशन कोष आलेख ..प्रथम स्थान 2020
पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशन : -
नवल पत्रिका. कथा बिंब, कथादेश, मधुमती, साहित्य समीर दस्तक, सृजन कुंज, दृष्टि, प्रतिमान. आधुनिक साहित्यिक ,सुसंभाव्य पत्रिका ,सृजन महोत्सव मगसम मे लघुकथाए एवं कविताएँ
ई पत्रिकाएं : -हस्ताक्षर वेब, साहित्य सुधा ,परिवर्तन ई पत्रिका ,शब्दार्थ पत्रिका, नारी अस्मिता पत्रिका मे लघुकथाए एवं कविताएं।
पता : -
17/653 , चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड
जोधपुर 342008 राजस्थान
डॉ. नीना छिब्बर की लघुकथाएं :-
1.पद चिन्ह
..प्रसिद्ध ,धनाढ्य ,समाज सेवी,मिस्टर सहगल के हाथों मे फोन का रिसीवर था और चेहरे पर मुर्दनी थी।अपने कानो पर विश्वास नही हो रहा था। पुलिस अधिकारी की बातें पिघले सीसे की तरह कानो मे बह रही थी।" मान्यवर, अपने पुत्र सौम्य को थाने से आकर ले जाइये।मात्र आपकी प्रतिष्ठा मे दाग न लगे इसीलिए आपके पुत्र को अन्य लडको से अलग रखा है। सौम्य ग्यारह बारह साल का ,सातवी कक्षा का छात्र था।जिसे कभी अभावों की आँच भी पिता ने आने नही दी थी।आज विधालय समय मे उच्च कक्षा के छात्रों के साथ बगीचे मे बियर पार्टी
मनाते हुए पकड़ा गया। बाल अपराध कानून के तहत उसे दंडित ना करके ,मुक्त किया गया क्योंकि वह धनाढय सहगल का पुत्र था।
चमचमाती कार मे बैठते ही मासूम निसंकोच बोला, पापा पुलिस अंकल गंदे हैं।मै तो आप के पदचिन्हों पर चलने की कोशिश कर रहा था। आप ही परसों शाम शर्मा अंकल के साथ घर मे
पार्टी कर रहे थे,हाथ मे गिलास था,जब मै पास से निकला तो आप ने अंकल से कहा शर्मा देखना मेरा बेटा मुझ से दो कदम आगे जाएगा। तभी मुझे गर्व होगा.।यह करेगा मेरा नाम रोशन।
मैने तो बारहवी मे पहला घूंट लिया था।पर आज के बच्चे आगे जाएंगे, बहुत आगे, हर क्षेत्र मे।
मैंने सोचा पढाई मे तो मै अव्वल हूँ ही आपके चेहरे पर एकस्ट्रा मुस्कान लाने के लिए यह सब किया।आप ही तो मेरे आदर्श हैं।आप को प्राउडफील करवाने के लिए ही पार्टी दी।
माफ करना, पापा, मैं तो बच्चा हूँ ना! नादान हूँ ना!पता नही था की पार्टी घर मे देनी चाहिए बगीचे मे नही। घर पर तो पुलिस अंकल भी आते हैं। आगे से ध्यान रखूंगा। सहगल साहब, निरूत्तर हो कर अपने ही भीतर झाकनें से डरने लगे।क्या कहे उसे और कैसे । ****
2.वाईब्रेशन मोड
अपर्णा ने बडे प्यार से रोमेश को पूछा कि पिछले कई महीनों से आपके व्यवहार मे अनोखा परिवर्तन देख रही हूँ जब नयी नौकरी लगी थी तब तो आप खूब खुश थे ,फिर अब अजीब सा व्यवहार क्यों कर रहे हो।कल मैंने आप की पसंद का खाना बनाया, साडी आप के पसंद की,यूँ कहें कि घर की सजावट से लेकर खुशबू तक आपके मनरूप, पर आप प्रतिक्रिया हीन थे।
अपर्णा ने प्रेमल शब्दों मे रोमेश से उसकी दुविधा जाननी चाही।दोनों युवा थे स्वप्निल समय था पर माहौल भावशून्य।रोमेश ने कुछ पल नजरे यहाँ वहाँ दौडाई। अपर्णा को गुस्सा आ गया उसनें जोर से झकझोर दिया।सुनते हो। वह ऐसे हिल्ला जैसे वाईब्रेशन मोड पर रखा मोबाईल कंपन करता है।
रोमेश झटके से उठा और बोला सब ठीक है, सब ठीक है जान। पर लगता है जीवन भी वाईब्रेशन मोड पर चला गया है जहाँ आवाजें नहीं सिर्फ झटके, ही एहसास जगाते है ।****
3.भूल सुधार
शर्मा जी अपने एरिया के प्रमुख थे,उन्हें प्रतिदिन इस बात का लेखा जोखा रखना पडता था कि किस एरिया मे कितने आक्सीजन सिलेंडरो का वितरण कब,कहाँ,कैसे करना है।आज भी रोज की तरह एक हाथ मे चाय का कप,दूसरे मे कलम लेकर काम कर रहे थे।अचानक दरवाजे पर धडाधड की ध्वनि हुई।शर्मा जी बौखलाए कौन मूर्ख है जिसे घंटी नही दिख रही। अ़दर से चिल्लाए , भ ई दरवाजा खुला है आ जाओ पर कोई उत्तर नही,आवाजें और तेज। गुस्से से बाहर आए तो दृश्य देखकर पैरों तले की जमीन खिसक गई।
सामने एक पीपल का पेड़ खडा था।हाथ जोड कर बोला कृपया मुझे प्रतिदिन दो आक्सीजन सिलेंडर दे सकते हैं क्या?शर्मा जी ने अपने आप को चूयँटी काटी ,जो वृक्ष स्वयं चौबीसों घंटे सब जीवों को आक्सीजन देता है वह माँग रहा है। पेड ने कहा मैं आक्सीजन देता हूँ ,नहीं पहले देता था क्योंकि लोगों ने मुझे इस काबिल भी नही छोडा। मैं अपने साथ सबूत लाया हूँ।
पीपल के शाखा रूपी हाथों पर सूखे फूलों की मालाऐ, अगरबत्ती की डंडिया, अधजली रूई की बतियाँ, टूटे दीपक, फटे कैलेंडर, पुरानी ईश्वर की मूर्तियां, बचा खुचा प्रसाद था।सबसे अजीब सी गंध आ रही थी।शर्मा जी की नजरे झुक गई। पीपल बोला ,दिवाली से पहले तो मैं कचरा पात्र से बदतर बन जाता हूँ।
मेरे चबूतरे पर इतना प्लास्टिक का सामान है कि साँस लेना दूभर हो गया है।
आज दाता याचक बन दरवाजे पर खडा है।शर्मा जी ने क्षमा माँगी और वचन दिया कि हम सब इस भूल को सुधारेंगे। प्रकृति केअकूत आक्सीजन भंडार को एवं देवतुल्य पीपल को स्वच्छ रखेंगे। संपूर्ण मानवजाति की ओर से पुनः क्षमा याचना की।****
4.मजबूत
शामजी अपनी पत्नी माला के साथ ठेकेदार के बताए पते पर पहुँच गया। ठेकेदार ने उन्हें हमेशा की तरह पत्थर तोड़ना, रेत छानना और रात को सामान की जिम्मेदारी का काम सौंपा। यह काम कम से कम छः महिने चलने वाला था।सबसे पहले दोनों ने अन्य मजदूरों से परिचय किया। फिर ठेकेदार से टिन की चादरें लेकर ,प्लास्टिक की शीट और बाँस खपच्चियों से घर तैयार किया। शामजी ने पत्थरों का चूल्हा बनाया और माला ने चाय बनाई । दोनों दसियों जगह ऐसा ही अस्थाई घर बना कर लोगों के स्थाई घर बनाते थे ।
जहाँ शेष मजदूर गरीबी, बदकिस्मती, परेशानियों की बातें कर के खुद भी दुखी होते और ओरों को भी करते थे वहीं दोनों पत्थर तोड़ते हुए कभी- कभी आपस में आँख मटका भी कर लेते तब पसीने से तरबतर चेहरे पर अलग ही नूर आ जाता। शामजी तो सूरज से बातें करता "चल तेरी मेरी पकड़म पकड़ाई। काम खत्म होते ही औरतें गप्पे मारती हुँई खाना पकाती। अधिक तर मर्द देसी दारु पी कर हंगामा करते, वहीं शामजी और माला आज के अभाव और कल की आवशकताओं की लिस्ट बनाते- बिगाड़ते।
हाँ अपने घर की आस तो थी पर हाथों पर विश्वास भी था।
रात को छोटे घर में दरी बिछा कर लेटते हुए कई बार पहले जो मकान बनाए और उनमें रहने का अनुभव याद कर के खुश होते।
दोनों मजाक करते कि शहर के कई कोनों में हमारा घर है।उन दोनों की खुशी इसी बात में थी कि मकानमालिक के पहले तो मजदूर ही रहते हैं।शाम जी जानते थे कि मंहगाई के इस दौर में जीना सब के लिए कठिन है वह उन मित्रों को भी समझाता जो नशे पते में पैसे खराब करते थे कि मेहनत को गटर में क्यों बहाते हो।
ठेकेदार भी उसे मजदूर शामजी नहीं मजबूत शामजी कहता था।****
5.परिंदों का घर
मालती ने जी कडा कर के अपने बेटे सक्षम को प्रतियोगी परीक्षा पूर्व तैयारी के लिए कोटा भेज ही दिया, पर नौकरी की व्यस्तता के कारण पहली बार उसके साथ ना जा सकी.।आज एक साथ तीन छुट्टियाँ पडने पर ,अकेले ही अचानक पहुँच कर सक्ष्म को आंनद एवं स्वयं को विश्वास दिलाना चाह रही थी कि सब ठीक है।दिल और दिमाग मे सदा कशमकश चलती थी कि अकेले ,घर से दूर ,अनजान लोगो के बीच कैसे रहता होगा।अनेक अच्छी बुरी घटनाएं कभी कभी मन को हताश करती पर विश्वास की डोर उम्मीद को जिंदा रखती।
दोपहर के तीन बजे थे, छात्रों का आराम करने का समय।मालती ने धडकते दिल से मेन गेट खोला, नीचे के हिस्से मे मकान मालिक एवं ऊपर दो कमरो मे छात्र। सीढियां चढते एक तस्वीर आँखों के सामने थी,बिखरा कमरा,उल्टे सीधे पडे कपडे, जूते,, पलंग पर पानी की खाली बोतलें, कुछ नमकीन के खाली रैपर व सब के बीच बच्चे बतियाते या मोबाईल के साथ। जैसे ही दरवाजे पर थपकी देने लगी, दरवाजे पर लिखे शब्दों ने मंत्रमुग्ध कर दिया। परिंदों का घर।
धीरे से धक्का देते ही दरवाजा खुला, चारों ओर शांति, पलंगों पर करीने से बिछी चादरें, अलमारी बंद, हाँ मेज पर कुछ किताबें खुली पडी थीं जो दर्शा रही थीं कि कार्य प्रगति पर है।एक छात्र चाय बना रहा था,शेष तीन फर्श पर अधलेटे किसी सवाल का हल निकाल रहे थे। सक्षम मुडा,माँ को देख कर चीखा और गले लग गया। शेष तीनों ने सामान संभाला, पानी पिलाया व चाय भी ले आए। मालती हतप्रभ, समझ गई ,सुरक्षा चक्र से निकल, परिस्थितियों , काल व आवश्यकता ने परिंदों को बहुत कुछ सीखा दिया। मालती ने सब को प्यार किया। सब ने एक साथ कहा, सब ठीक है ना, पर आप लोगों के लिए अविश्सनीय
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