भारतीदासन की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

        शिक्षा जीवन का मूल आधार है। शिक्षा बिना संसार एक जंगल की तरह लगता है। और नारी के लिए शिक्षा तो परिवार के उत्थान की तरह होता है। शिक्षा जीवन का अनिवार्य अंग की तरह है। जो समाज में क्रांति लाने में सक्षम होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
         नारी परिवार की धुरी होती है। उसका कौशल्य उसकी कार्य कुशलता उसकी कार्यशाली  - - किसी भी परिवार की सच्ची संपदा होती है। सुना होगा "एक नारी सब पर भारी" - - मखौल नहीं है इतना सटीक वाक्य। वेद-पुराणों कवियों संतों मनीषियों ने नारी के विषय में इतना लिखा  - - उद्घृत किया - - कहा है कि शायद संपूर्ण ब्रम्हांड में नारी से बढ़कर कोई शै नहीं है। नारी प्रकृति है  - - देवी है, मात्र भोग्या नहीं संहारिणी है - - अतः आज के कलयुग बनाम कलियुग में नारी-नारायणी की महत्ता अनमोल है। सच है कि परिवार की समृद्धि नारी से है। नारी चाहे अनपढ़ हो या विदुषी हर रूप में परिवार के लिए अनिवार्य होती है। यत्र-तत्र-सर्वत्र नारी की महिमा गान कहते-सुनते हम बडे़ होते हैं और माँ बहन बेटी सहधर्मिणी के रूप में नारी को परखते हैं। सचमुच हम पाते हैं कि दुनिया की सारी सच्चाई एक तरफ और नारी-नारायणी का परिवार समाज विश्व को प्रदाय एकतरफ है जिसकी बराबरी नहीं कर सकता कोई। नारी शिक्षित हो तो सोने पे सुहागा और यदि स्कूली शिक्षा न पाई हो तो भी भीड़ में अपनी अलग पहचान रखती है। नारी होना ही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है। खैर यह सारी प्यारी किताबी बातें आज के दौर में हमें झुठला रहीं हैं - - झुका रहीं हैं क्योंकि आज नारी वह नहीं है जो कुछ दशक पहले तक थी  - - आज सचमुच सिद्ध हो रहा है कि एक नारी पूरे परिवार पर भारी है। मजाल है जो नारी की मर्जी के बगैर पत्ता भी हिल जाये - - ये गाथा तो हम सुनते चले आ रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि स्थिति बदले कैसे। नारी को अपना नारायणी स्वरूप याद आये कैसे। रथ का चक्का जमीन से निकालते समय कर्ण अपनी सारी विद्या भूल गया था उसी तरह जीवन रथ के पहियों के साथ नारी भी अपने नारी-नारायणी दैवीय स्वरूप को भूल चुकी है जरूरत है कि उसे उसकी भूमिका याद दिलाई जाये - -नारी-नारायणी वाला रूप याद करवाया जाये - - निःसंदेह नारी जागेगी और पुनः समाज को दिशा दिखायेगी। 

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर -  महाराष्ट्र

       यह बिल्कुल सत्य है कि नारी जितनी शिक्षित होगी उतना ही समृद्ध परिवार होगा  क्योंकि एक शिक्षित महिला न केवल अपना  जीवन संवारती है बल्कि वह पूरे  परिवार की आर्थिक, समाजिक और शैक्षिक स्थिति को ऊँचा उठाती है यही आज की चर्चा का विषय है कि नारी जितनी शिक्षित होगी परिवार उतना ही समृद्ध होगा,  मेरा मानना है कि महिला शिक्षा और परिवार की समृद्धि के बीच सीधा संबंध है क्योंकि जब एक नारी शिक्षित होती है तो वह न केवल अपने परिवार को बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ी को भी शिक्षित करती है यही नहीं शिक्षा से ही महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं जिससे परिवार की आय में भी वृद्धि होती है और जीवनस्तर बेहतर होने से परिवार भी बेहतर बनने लगता है इसके साथ शिक्षित माँ अपने बच्चों के पालन पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक ध्यान देती है जिससे आने वाली पीढ़ी अधिक  शिक्षित और जागरूक बनती है, यही नहीं शिक्षित नारी का परिवार प्रगति, खुशहाली और सदृढ़ संस्कारों का प्रतीक होता है, स्वामी विवेकानंद के अनुसार जिस देश की नारी का सम्मान नही होता वह देश तरक्की नहीं कर सकता जबकि नारी के सम्मान के लिए उसे शिक्षित करना भी बहुत जरूरी है ताकि वो आर्थिक मजबूती, बच्चों को संस्कार सशक्त और निर्णय लेने के योग्य बना सके, गाँधी जी ने कहा था यदि आप एक पुरूष को शिक्षित करते हैं तो आप केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करते हैं लेकिन यदि आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं इसलिए नारी शिक्षा परिवार और राष्ट्र की समृद्धि की नींव है,  अन्त में यही कहुँगा  कि शिक्षित नारी का परिवा केवल साक्षर ही नहीं होता अपितु आर्थिक रूप से स्वतंत्र और प्रगतिशील भी होता है वह न केवल दो परिवारों का मार्गदर्शन करती है बल्कि अपनी शिक्षा व समझदारी से बच्चों को बेहतर संस्कार, बेहतर स्वास्थ्य और सुनहरे भविष्य की नींव भी रखती है जिससे राष्ट्र की प्रगति भी सुनिश्चित होती है इसलिए जब तक नारी शिक्षित नहीं होगी तब तक परिवार गाँव शहर व देश तरक्की नहीं कर सकता, कहने का भाव शिक्षित नारी  परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास की अधारशिला है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

       नारी शिक्षा: समृद्ध परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला समाज की उन्नति और परिवार की समृद्धि में नारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह सत्य है कि “नारी जितनी शिक्षित होगी, परिवार उतना ही समृद्ध होगा।” नारी केवल परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि वह परिवार की प्रथम गुरु, संस्कारों की वाहक और भविष्य की निर्माता होती है। उसकी शिक्षा का प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। सबसे पहले, एक शिक्षित नारी अपने बच्चों को बेहतर संस्कार और शिक्षा प्रदान करती है। वह उन्हें सही और गलत का भेद सिखाती है, नैतिक मूल्यों का विकास करती है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यही बच्चे आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज का विकास होता है। दूसरा, शिक्षित नारी आर्थिक रूप से भी परिवार को सशक्त बना सकती है। वह नौकरी या व्यवसाय के माध्यम से परिवार की आय बढ़ा सकती है, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है। इसके साथ ही, वह घर के आर्थिक प्रबंधन को भी समझदारी से संभालती है, जिससे अनावश्यक खर्चों में कमी आती है और बचत बढ़ती है। इसके अलावा, एक शिक्षित महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के प्रति जागरूक होती है। वह परिवार के सदस्यों की देखभाल बेहतर तरीके से करती है, जिससे बीमारियों की संभावना कम होती है और परिवार स्वस्थ रहता है। नारी शिक्षा सामाजिक कुरीतियों को भी समाप्त करने में सहायक होती है। शिक्षित महिलाएं बाल विवाह, दहेज प्रथा और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाती हैं और समाज में जागरूकता फैलाती हैं।अंततः, यह कहना उचित होगा कि नारी शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की समृद्धि की कुंजी है। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर लड़की को शिक्षा का अधिकार मिले और वह अपने सपनों को साकार कर सके।

- अलका पाण्डेय 

मुम्बई - महाराष्ट्र 

      जीवन में शिक्षा का बहुत महत्व है। शिक्षित होने से ज्ञान तो बढ़ता ही है, बुद्धि और विवेक में भी समृद्धि होती है। रोजगार के विकल्प बढ़ जाते हैं। तर्क-वितर्क, अच्छा-बुरा, उचित-अनुचित आदि के पहचान करने की समझ आ जाती है। अधिकार और कर्तव्य के संबंध में जागरूकता आ जाती है। जिससे अन्याय और शोषण के विरुद्ध चेतना और हिम्मत बढ़ जाती है। इसीलिए शिक्षित होना केवल पुरुष के लिए ही नहीं नारी के लिए भी आवश्यक है। समाज में अक्सर नारी का शोषण ही होता आया है। लेकिन अब जब नारी भी शिक्षित होने लगी हैं और हर क्षेत्र में उसे रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं तब से समाज में नारी के हौसले भी बढ़े हैं और शोषण  भी  कम हुआ है। इससे परिवार को समृद्ध होने में आशातीत सहयोग मिला है। परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं। सार यही कि नारी के शिक्षित होने से परिवार, समाज और राष्ट्र के उन्नयन में आशातीत गति मिली है, समृद्धि हुई है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

         यह कथन केवल एक विचार नहीं, बल्कि सामाजिक विकास का सशक्त सत्य है। शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को दिशा देती है, परंतु जब नारी शिक्षित होती है, तो उसका प्रभाव केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहता—वह पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है। शिक्षित नारी अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर समझती है। वह अपने परिवार में निर्णय लेने की क्षमता रखती है और सही-गलत में अंतर कर सकती है। एक शिक्षित माँ अपने बच्चों की प्रथम गुरु होती है। वह उन्हें अच्छे संस्कार, अनुशासन और ज्ञान प्रदान करती है। इसी कारण कहा जाता है कि बच्चे का भविष्य माँ की गोद में ही आकार लेता है।परिवार की आर्थिक, सामाजिक और मानसिक स्थिति भी शिक्षित नारी के कारण सुदृढ़ होती है। वह घर के साथ-साथ बाहर भी योगदान देकर परिवार की आय बढ़ा सकती है। साथ ही वह स्वास्थ्य, स्वच्छता और संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूक रहती है, जिससे पूरा परिवार स्वस्थ और खुशहाल रहता है।शिक्षा नारी को आत्मनिर्भर बनाती है। आत्मनिर्भर नारी किसी पर बोझ नहीं होती, बल्कि सहयोगी बनकर परिवार को मजबूत करती है। वह विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और समझदारी से कार्य करती है, जिससे परिवार में स्थिरता बनी रहती है।इसके विपरीत, अशिक्षा नारी की क्षमता को सीमित कर देती है और परिवार कई प्रकार की समस्याओं का सामना कर सकता है। इसलिए नारी शिक्षा केवल व्यक्तिगत आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति की नींव है।निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि यदि नारी शिक्षित होगी तो परिवार सशक्त होगा, और सशक्त परिवार ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बनता है।“शिक्षित नारी घर का दीपक है, जो पूरे परिवार को प्रकाशमान कर देती है।”

- डाॅ.छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

        लड़की पढ़ी लिखी हो तो वह दो परिवार को शिक्षित करती है। सच में अगर मां  पढ़ी लिखी है तो बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर कम हो जाती है वो होमवर्क में भी मदद करती है स्कूल से आने के बाद सवाल पूछता है, क्या कर रहे हो? क्या कोर्स की किताब पढ़ रहे हो? ध्यान रखती है , परिवार के सभी सदस्यों  के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखती है। बजट के अनुसार खर्च करती है सामाजिक बुराइयों की अच्छी- बुरी बातों को  ध्यान रखती है संक्षेप में कहना चाहूंगी कि जहां माँ पढ़ी लिखी होगी उस घर में गरीबी ,बीमारी, और  अंधविश्वास नहीं होगा । जहां महिला साक्षरता का प्रतिशत अधिक होगा वहां अपराध कम होगा।  दर असल बेटी की शिक्षा के लिए क्या गया खर्च दहेज जोड़ने से कई लाख गुना अच्छा है। कहावत भी है

बच्चों को कार न दो 

बल्कि शिक्षा और  संस्कार दो

समृद्धि सिर्फ पैसा ही नहीं होती परिवार की अच्छी मानसिक सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी समृद्धि का पैमाना होती है।

- रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

      नारी जितनी शिक्षित होगी परिवार उतना ही समृद्ध होगा. पहली बात जिस घर में नारी शिक्षित होगी उस घर में सभ्यता और संस्कृति बनी रहेगी. बच्चे सभी शिक्षित होगें. और जहां पर शिक्षित लोगों का वास होगा वहाँ पर कलहपूर्ण वातावरण नहीं होगा. किसी भी समस्या का समाधान आपसी सूझबूझ से करने में आसानी होती है. जिस परिवार में नारी शिक्षित होती हैं उस परिवार की समाज में बहुत इज़्ज़त होती है. लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं. जिस परिवार में शिक्षित नारी होती है वहां रोजगार की समस्या बहुत कम होती है वहां पढ़े लिखे और नौकरी शुदा लोग रहते हैं जिससे परिवार को आमदनी अधिक होती हैं  और परिवर समृद्ध होता है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद,"दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

      नारी जितनी शिक्षित होगी , उतने ही शिक्षित संस्कार परिवार में प्रवेश करेंगे , व परिवार समृद्ध व संस्कारी बनेगा !! एक एक परिवार से जुड़कर , समृद्ध समाज बनेगा , समृद्ध राज्य बनेगा , समृद्ध देश बनेगा , व समृद्ध विश्व बनेगा !! नारी ही बनाती है घर परिवार , नारी ही संभालती है घर परिवार , संचालित करती है समस्त कार्य !! जहां नारी अपने घर परिवार को नहीं संभालती , व ये जिम्मेदारी आर्थिक संपन्नता के कारण , अन्य को सौंप देती है , वहां समृद्धि , संस्कार के अलावा , सबकुछ होता है , जो नकारात्मक होता है !! 

एक नारी जब पढ़ेगी, 

एक परिवार पढ़ेगा , 

पढ़ाई के कारण ही , 

देश समृद्ध होगा !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

        नारी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आधारशिला होती है। जब नारी शिक्षित होती है, तो उसका प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को दिशा देता है। शिक्षा नारी को आत्मनिर्भर बनाती है, उसे सही-गलत का ज्ञान देती है और जीवन के हर क्षेत्र में सशक्त बनाती है। एक शिक्षित नारी अपने बच्चों का बेहतर पालन-पोषण कर सकती है। वह उन्हें संस्कार, अनुशासन और शिक्षा का महत्व समझाती है। यही बच्चे आगे चलकर समाज के जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। इस प्रकार, एक नारी की शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करती है। इसके अलावा, शिक्षित नारी आर्थिक रूप से भी परिवार की सहायता कर सकती है। वह घर के निर्णयों में भागीदारी निभाती है, जिससे परिवार का संतुलित और सुविचारित विकास होता है। वह स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के प्रति भी जागरूक रहती है, जिससे परिवार स्वस्थ और खुशहाल रहता है। नारी शिक्षा से समाज में समानता और जागरूकता बढ़ती है। जब महिलाएं शिक्षित होंगी, तो वे अपने अधिकारों को समझेंगी और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान देंगी। नारी की शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की समृद्धि की कुंजी है। इसलिए हमें नारी शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण हो सके।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

      भारतीदासन जी की स्मृति में यह कथन कि "नारी जितनी शिक्षित होगी, परिवार उतना समृद्ध होगा"—निस्संदेह एक प्रगतिशील और प्रेरणादायक विचार है। उन्होंने नारी को केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की सबसे सशक्त शक्ति माना था। शिक्षित नारी अपने ज्ञान, विवेक और संवेदनशीलता से परिवार को संस्कारित, सुदृढ़ और समृद्ध बनाती है। नारी को इसी लिए मातृशक्ति कहा गया है। ममता की देवी कहा गया है और यह भी सत्य की मां की गोद में स्वर्ग का सुख है। किन्तु वर्तमान समय का यथार्थ हमें आत्ममंथन के लिए भी बाध्य करता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि नैतिकता, सहनशीलता, परस्पर सम्मान और पारिवारिक उत्तरदायित्व का विकास भी होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, आधुनिक जीवन की तीव्र गति, बढ़ती स्वार्थपरता, संवादहीनता तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच असंतुलन ने वैवाहिक जीवन को अनेक चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। आज वैवाहिक विवादों, भरण-पोषण के अभियोगों (मुकदमों), विवाह विच्छेदों (तलाक) की बढ़ती घटनाओं और कभी-कभी अत्यंत दुखद आपराधिक घटनाओं ने समाज को चिंतित किया है। यह कहना उचित नहीं होगा कि समस्या केवल किसी एक पक्ष में है। न तो समस्त पुरुष दोषी हैं और न ही समस्त महिलाएँ। वास्तविक संकट पारिवारिक मूल्यों के क्षरण, सहनशीलता की कमी, अहंकार की वृद्धि और रिश्तों के व्यावसायीकरण का है। विवाह, जो भारतीय संस्कृति में दो आत्माओं, दो परिवारों और दो जीवन-दर्शनों का पवित्र मिलन माना गया है, उसे केवल कानूनी अनुबंध या आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं किया जा सकता। भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आजीवन विश्वास, त्याग, समर्पण और पारस्परिक सम्मान का पावन बंधन है। विवाह विच्छेद हमारी परंपरा का आदर्श कभी नहीं रहा; यह केवल असाधारण परिस्थितियों में अंतिम विकल्प के रूप में स्वीकार किया गया। आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा के साथ संस्कार, अधिकारों के साथ कर्तव्य, और स्वतंत्रता के साथ उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया जाए। यदि नारी और पुरुष दोनों ही शिक्षा, संवेदनशीलता, धैर्य और परस्पर सम्मान को अपने जीवन का आधार बनाएँ, तो विवाह संस्था पुनः अपने गौरव को प्राप्त कर सकती है। युवा पीढ़ी के मन से विवाह के प्रति उत्पन्न भय तभी दूर होगा जब समाज, परिवार और न्याय व्यवस्था मिलकर इस पवित्र संबंध की गरिमा को पुनर्स्थापित करेंगे। अतः मेरा स्पष्ट मत है कि नारी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परिवार को समृद्ध बनाना नहीं, बल्कि समाज को संतुलित, संस्कारित और मानवीय बनाना भी है। जब शिक्षा में नैतिकता और संवेदना का समावेश होगा, तभी विवाह, परिवार और समाज तीनों सुरक्षित, सुदृढ़ और समृद्ध होंगे। क्योंकि वर्तमान में विवाह विवाद, भरण पोषण और विवाह विच्छेद शिक्षित युवाओं के ही प्रकाश में आ रहे हैं जो वर्तमान समय की सबसे जटिल समस्या ही नहीं बल्कि विकट चुनौती है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      बेशक नारी जितना शिक्षित होगी  परिवार उतना समृद्ध होगा। नारी परिवार की धूरी है। धूरी सही तो परिवार भी सही रहेगा।शिक्षित नारी शिक्षा का, पोषण का, समय व आर्थिक  प्रबंधन को बेहतर समझ सकती है व बेहतर ध्यान दे सकती है। उसी प्रकार के बेहतर जीवन मूल्यों को परिवार में दे सकती है। सच कहा गया है; एक पुरुष को शिक्षित करना अर्थात एक व्यक्ति को शिक्षित करना है परंतु एक नारी को शिक्षित करना अर्थात पूरे परिवार को शिक्षित करता है। शिक्षित नारी काम-काजी हो कर आर्थिक रूप से भी परिवार को समृद्ध बना सकती है।आत्म-निर्भर हो कर तथा उचित निर्णय ले कर भी परिवार को समृद्धि की ओर ले जा सकती है। यदि वह घर के बाहर निकल कर काम-काज नहीं भी करना चाहे तो भी शिक्षा, हुनर कभी व्यर्थ नहीं जाता। घर-गृहस्थी को संभालने,  बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, लालन-पालन में सुघड़ता उजागर हो ही जाती है। अतः एक खुशहाल, समृद्ध परिवार के लिए नारी का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।

- रेनू चौहान 

नई दिल्ली

     शिक्षा का अधिकार सभी वर्गों को दिया गया है। नारी जितनी शिक्षित होगी, परिवार उतना समृद्ध होगा। पूर्व काल में नारियों को स्कूल, घर से निकलने नहीं दिया जाता था। जैसे-जैसे विकास होता गया, वैसे नारियों को शिक्षा दिया जाने लगा। जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। आज नारी पूर्णत: शिक्षित है, उसका घर संसार  में भी प्रभाव बढ़ता गया। बच्चों समयानुसार घर पर भी अल्पकालिक शिक्षित किया जा भी जा रहा है......।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

  बालाघाट - मध्यप्रदेश

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रियाः॥”

अर्थात -जहाँ नारी का सम्मान और पूजन होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं; और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं। “नारी जितनी शिक्षित होगी, परिवार उतना ही सक्षम होगा” समाज की नींव परिवार है, और परिवार की धुरी नारी। जब नारी शिक्षित होती है, तो उसका प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर सकारात्मक असर डालता है। एक शिक्षित महिला अपने बच्चों को बेहतर संस्कार, शिक्षा और मार्गदर्शन देती है। वह स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के प्रति सजग रहती है, जिससे परिवार का जीवन स्तर ऊँचा उठता है। शिक्षित नारी आर्थिक रूप से भी सक्षम बन सकती है, जिससे परिवार की आय बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों में सहारा मिलता है। वह सही निर्णय लेने में सक्षम होती है और परिवार को प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाती है। इसके साथ ही, वह सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक होकर उनका विरोध भी कर सकती है।इस प्रकार, नारी शिक्षा केवल एक व्यक्ति का विकास नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की उन्नति का आधार है। इसलिए, नारी को शिक्षित करना वास्तव में एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की नींव रखना है।

 -  सीमा रानी       

  पटना - बिहार 

" मेरी दृष्टि में " शिक्षा ही मानव जाति के लिए अभिन्न अंग है। जो समाज और देश प्रगति की ओर ले जाता है। जो जीवन का आधार तक बदल देता है। शिक्षित नारी तो परिवार की दिशा के साथ - साथ प्रगति की ओर ले जातीं हैं। नारी की शिक्षा के बगैर परिवार आगे नहीं बढ़ पाता है। संसार में शिक्षा से उन्नति सम्भव हुईं है।

           - बीजेन्द्र जैमिनी 

       ( संचालन व संपादन)


Comments

  1. देश की समृद्धि के लिए शिक्षा आवश्यक है उसी क्रम में हम कह सकते हैं की पुरुष के साथ नारी की शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।शिक्षा जीवन की धुरी है, जीवन में पढ़ना बहुत जरूरी है।
    जितना पढ़ लिख जाओगे, परिवार का सदा नाम बढ़ाओगे।।
    उपरोक्त पंक्तियों मैं कहां गया है की नारी जितनी शिक्षित होगी परिवार उतना समृद्ध होता चला जाएगा, इसलिए शिक्षा का अपना विशिष्ट महत्व है।
    -‌रविंद्र जैन रूपम
    (WhatsApp से साभार)

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  2. नारी आदरणीया होती है।यह शिक्षित होकर समाज का कल्याण करती है और समृद्ध बनाती है।जहां नारी की इज़्ज़त होती है,वह विकास करता है।हमें नारी का सम्मान करना चाहिए।जिससे देश का कल्याण होता है,देश महान बनता है। हमें नारी को पूजना चाहिए। इसलिए संस्कृत में कहा गया है ,जिसका अर्थ होता है।जहां नारी को पूजा जाता है,वहां भगवान वास करते हैं।
    - दुर्गेश मोहन
    बिहटा, पटना (बिहार)
    (WhatsApp से साभार)

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