पंडित लेखराम आर्य स्मृति में चर्चा परिचर्चा
इस धरती पर प्रकाश समस्त (जीवों) जीवन का आधार है भौतिक रूप में जैसे सूरज की उर्जा प्रकाश संश्लेषण द्वारा जीव-जगत, वनस्पति, पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं, में जीवन प्रदान करता है,आध्यात्मिक रूप से प्रकाश ज्ञान, दिव्य उर्जा ,अज्ञान से मुक्ति का प्रतीक है। यही ज्ञान का प्रकाश जीवन को सही राह दिखाता है, यह नवल सकारात्मकता का प्रतीक है जो जीवन में प्रगति के लिए आवश्यक है। जीवन में संसार है अर्थात जीवन की सार्थकता इस संसार में रह कर, जीवन यापन कर, नियमों, अच्छे कर्मों की पालना करके भौतिक सुख -भोग के साथ- साथ सेवा, त्याग और आत्मज्ञान के द्वारा इस जन्म मरण के चक्कर से मुक्त होना है। इस संसार में कुछ भी स्थाई नही है। जन्म से मृत्यु तक का एक अस्थाई पड़ाव है जिसे गहराई से समझने की आवश्यकता है।
- शीला सिंह
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
अगर हम सूर्य की ऊर्जा की बात करें तो साफ जाहिर होता है कि प्रकाश ही पृथ्वी पर जीवन का आधार है क्योंकि सूर्य की ऊर्जा ही पौधों के भोजन का कारण बनती है जिससे संसार चलता है कहने का मतलब बिना प्रकाश के जीवन का अस्तित्व नहीं रह सकता तो आज की चर्चा का यही विषय है कि प्रकाश है तो जीवन है, जीवन से तो संसार है, मेरा मानना है कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर सभी सजीवों के लिए अनिवार्य है, देखा जाए प्रकाश के द्वारा ही पौधे भोजन बनाते हैं और आक्सीजन छोड़कर हवा को शुद्ध करते हैं इसके साथ साग प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जो हमारे आसपास की दूनिया को जीवन के लिए रोशन करता है, जिसका मतलब है प्रकाश है तो जीवन है और जीवन से ही संसार है, जीवन से संसार का अर्थ है कि संसार जीव, जगत और चेतना से निर्मित एक गतिशील प्रक्रिया है न कि केवल भौतिक स्थान, यह जीवन के अर्थ को समझने, अनुभवों भावनाओं और मानवीय कर्मों का एक समग्र रूप है।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
यह वाक्य केवल भौतिक प्रकाश की बात नहीं करता, अपितु जीवन के व्यापक और गहरे सत्य को व्यक्त करता है। प्रकाश का अर्थ यहाँ केवल सूर्य की किरणें नहीं, ज्ञान, चेतना, आशा और सकारात्मकता से भी है।प्रकृति के स्तर पर देखें तो सूर्य का प्रकाश ही पृथ्वी पर जीवन का आधार है। प्रकाश के बिना न वनस्पतियाँ पनप सकती हैं, न जलचक्र चल सकता है और न ही जीव-जंतु जीवित रह सकते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जहाँ प्रकाश है, वहीं जीवन का संचार है। दूसरे अर्थ में प्रकाश ज्ञान और जागरूकता का प्रतीक भी है। जब मनुष्य के भीतर ज्ञान का प्रकाश होता है, तब उसका जीवन सार्थक बनता है। अज्ञान का अंधकार व्यक्ति को भ्रम, भय और अहंकार में बाँध देता है, जबकि ज्ञान का प्रकाश उसे सही मार्ग दिखाता है। इसी प्रकार जीवन से ही संसार का अस्तित्व है। यदि जीव-जगत न हो तो यह धरती, पर्वत, नदियाँ और आकाश केवल जड़ तत्व बनकर रह जाएँगे। मनुष्य, पशु-पक्षी, वृक्ष और प्रकृति की विविधता ही संसार को जीवंत और अर्थपूर्ण बनाती है। अतः यह कहा जा सकता है कि प्रकाश जीवन को दिशा देता है और जीवन संसार को अर्थ देता है। जब मनुष्य अपने भीतर ज्ञान, प्रेम और करुणा का प्रकाश जगाता है, तभी उसका जीवन भी सार्थक बनता है और संसार भी अधिक सुंदर।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
प्रकाश यानी वह माध्यम जिससे हमें दिखाई दे। अंधकार इसके विपरीत की दशा है। प्रकाश का महत्त्व हमें तब समझ में आता है, जब हम अँधेरे में होते हैं। तब हमें कुछ दिखाई नहीं देता। स्पर्श से भले ही हम आवासीय परिकल्पना कर लें लेकिन वास्तविकता तो प्रकाश से ही समझ में आती है। कई बार ऐसा भी होता है कि हम अँधेरे में आवासीय परिकल्पना से जो समझ लेते हैं, प्रकाश होने पर हमें पता लगता है कि हम कितने गलत थे। अत: प्रकाश का महत्व विशेष है और इस आधार पर यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रकाश है तो जीवन है और जीवन है तो संसार है। दुनिया की खूबसूरती, दुनिया में उपलब्ध विविधताएं और विचित्रताएं, उनका स्वरूप उनके क्रियाकलाप सब कुछ देखने के लिए प्रकाश बहुत आवश्यक है। प्रकाश ,ज्ञान का प्रतीक भी है, जब जीवन दर्शन की बात होगी तब प्रकाश को ज्ञान से मानकर जीवन का आध्यात्म समझना होगा। तब बिना ज्ञान के जीवन मूल्य, जीवन-सार , जीवन का उद्देश्य आदि को समझना कठिन है। कुलमिलाकर प्रकाश है तो जीवन है। जीवन है तो संसार है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
प्रकाश है तो जीवन है, जीवन से तो संसार है... प्रकाश ही जीवन का मुख्य आधार है... ब्रम्हांड में प्रत्येक जीवधारियों के जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक ऊर्जा है। पौधे इसी उर्जा के आधार से अपना भोजन बना अपने जीवन चक्र को जीवंत रखते हैं। संसार में आकर मनुष्य भी इसकी उर्जा का ऋणी और आभारी होता है। मानव जीवन में प्रकाश चेतना और समझ को दर्शाता है। जीवन से अंधकार को हटाता है, ठीक उसी तरह जैसे ज्ञान अज्ञानता को हटाता है। जीवन कर्म ,अनुभव एवं आत्म-विश्वास की यात्रा है, जहां हम निःस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई करके अपना जीवन सार्थक करते हैं। वहीं संसार परिवर्तनशील है जो हमारे सकारात्मक कर्मों से ही सुंदर बनता है। संसार में हमारा अस्तित्व ही मायने रखता है, इसलिए जीवन को सार्थक कर्मों से जीवंत बनना ही सही उद्देश्य है। मनुष्य के लिए उसका जीवन ही वह सीढ़ी है जो सुख दुख का अनुभव करती हुई खूबसूरत दुनिया को देखती है। मानव जीवन ही वह समय है जब हम अपने कर्मों द्वारा अपने बुरे और अच्छे फल का निर्माण कर सकते हैं चूंकि अंत में संसार से उसका कर्म ही उसके साथ जायेगा।
- चंद्रिका व्यास
मुंबई - महाराष्ट्र
बिना प्रकाश जीवन ही नहीं होगा।प्रकाश के मुख्य स्रोत सूर्य को इस जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च" ऋग्वेद (1.115.1) का एक प्रसिद्ध मंत्र है, जिसका अर्थ है- "सूर्य ही गतिशील (जगत) और स्थिर (तस्थुष) चराचर जगत की आत्मा है"। यह सूर्य देव को जीवन शक्ति और ब्रह्मांड का ऊर्जा स्रोत मानते हुए, उनके चेतन और अचेतन सृष्टि के पालनकर्ता रूप को प्रतिपादित करता है। इससे स्पष्ट है कि प्रकाश, सूर्य है तो जीवन है। बिना जीवन के संसार का होना न होना बराबर ही है। संसार के क्रियाकलाप जीवन से ही चलते हैं और जीवन सूर्य से चलता है। अधिक ठंड और वर्षा में जब सूर्य नहीं निकलता, सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।शायद इसीलिए हमारी संस्कृति में हमेशा प्रकाश को पूजा गया है।प्रकाश के स्रोत सूर्य, चंद्रमा और अग्नि को देवता माना गया है।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
देखा जाए तो प्रकाश जीवन के लिए अति आवश्यक है। हमारे जीवन का यही मूल आधार भी है। केवल बिजली रोशनी से प्रकाश को मुख्य प्रकाश नहीं मान सकते क्योंकि यह मानव के द्वारा किए गए आविष्कारों और विकास का परिणाम है जो विकास देता है। पर मूल रूप से सूर्य के प्रकाश से ही सभी जीव जंतुओं का जीवन और उन्हें जीने की शक्ति मिलती है ।हमारी प्रकृति पेड़ पौधे फिर उनके जीवन से हमारे लिए भोजन की व्यवस्था का अस्तित्व भी प्रकाश से ही है। अतः जगत के दैहिक, दैविक ,भौतिक समस्त कार्य प्रकाश पर निर्भर हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि प्रकाश से मानव और मानव से संसार की निर्मिती जान पड़ती है।
- डॉ. रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
प्रकाश से ही सबकुछ है.प्रकाश से ही ये सारी सृष्टि है. उसी तरह यदि जीवन में प्रकाश नहीं तो जीवन बेकार है. जीवन के अच्छे बुरे पल का मजा प्रकाश होने पर ही निर्भर करता है. अंधकार मय जीवन बेकार निरस किसी काम का नहीं रह जाता है. चाहे वह प्रकाश किसी भी तरह का हो. और जीवन से ही संसार है. जीवन नहीं रहे तो ये संसार कहा से आएगा. जीवन से ही ये संसार बनता है. यदि इस धरा पर जीव ही न हो तो ये संसार ही नहीं कहलायेगा. इसलिए प्रकाश से जीवन है और जीवन से संसार है.
- दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
अंधकार , निराशा , नाउम्मीदी तो जीवन के बिल्कुल विपरीत होते हैं अर्थात जहां ये होते हैं , वहाँ जीवन नहीं होता , जिंदगी की गाड़ी ही नहीं चलती !! दूसरी तरफ , जहां जीने की चाह होती है , उम्मीद होती है , आशा होती है , व कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है , वहीं जीवन होता है !! जीवन चलता है , या चलना पड़ता है , व जीवन की संघर्ष रूपी गाड़ी से ही संसार चलता है !! बैठे बैठे कुछ नहीं मिलता !! जिस भी दिशा मैं प्रकाश नज़र आता है , या आशा नजर आती है , मनुष्य को उस दिशा मैं सतत प्रयास करने पड़ते हैं , जिस से उसका संसार चलता है !! ठीक ही कहा गया है ....
दुनियां में अगर आये हैं ,
तो जीना ही पड़ेगा !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
प्रकाश के बिना कुछ भी संभव नहीं होता है , प्रकाश मात्र एक रोशनी का उपादान नहीं होता है , अपितु ऊर्जा का केंद्र होता है - संचार का माध्यम होता है और संपर्क का जरिया होता है । अर्थात प्रिय बीजेन्द्र जी ने जो आज एक विषय दिया है उसका बहुत ही गहरा आपेक्ष युक्त अर्थ है , प्रकाश की अनुपस्थिति में हम दृष्टि होते हुए भी दिव्यानग जन के समान रह जाते हैं , बिना प्रकाश के कोई कार्य करना दुरूह हो जाता है , यदि हम प्रकाश की किरण को एक प्रिज्म के एक भुजा से गुजारें तो हमें पता चल जाएगा की जो किरण सामान्य रूप से देखने पर हमें एक सफेद किरण ही दिखती है वस्तुतः वह विसिबल 7 रंग व नॉन विजीवल ultraviolet तथा infa red और उसके भी आगे बहुत सी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक राशमियों का सम्मिलित संयोग होती है । अर्थात प्रकाश सम्पूर्ण जीवन का सार है और जीवन से ही ये संसार है
- डॉ. अरुण कुमार शास्त्री
पलवल - हरियाणा
प्रकाश जीवन का आधार है, और जीवन संसार का मूल है। प्रकाश के बिना जीवन असंभव है, और जीवन के बिना संसार का अस्तित्व नहीं होता। यह एक गहरा और सरल सत्य है। प्रकाश हमें ऊर्जा, ज्ञान, और दिशा देता है, जो जीवन को समृद्ध बनाता है। और जीवन से ही संसार में रंग, भाव, और अर्थ आते हैं।
- सुनीता गुप्ता
कानपुर - उत्तर प्रदेश
प्रकाश जीवन का आधार है। प्रकाश के बिना न प्रकृति का संतुलन रह सकता है और न ही जीवों का अस्तित्व संभव है। सूर्य का प्रकाश हमें ऊर्जा देता है, जिससे पेड़-पौधे, मनुष्य और सभी जीव जीवित रहते हैं। जीवन होने से ही यह सुंदर संसार बना है। यदि जीवन न हो तो पृथ्वी केवल एक निर्जीव स्थान बनकर रह जाएगी। इसलिए प्रकाश से जीवन और जीवन से ही इस संसार की सुंदरता और गतिविधियाँ बनी रहती हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि प्रकाश, जीवन और संसार तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए है ।
- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'
मुंबई - महाराष्ट्र
प्रकाश है तो जीवन है, जीवन से ही यह संसार है।” प्रकाश केवल भौतिक रोशनी नहीं, बल्कि ज्ञान, सत्य, चेतना और सकारात्मक विचारों का प्रतीक है। जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर जीवन को सम्भव बनाता है, उसी प्रकार विचारों और विवेक का प्रकाश मनुष्य के जीवन को सही दिशा देता है। जब मनुष्य के भीतर जागरूकता और नैतिकता का प्रकाश होता है, तब उसका जीवन केवल व्यक्तिगत हित तक सीमित नहीं रहता बल्कि वह समाज और राष्ट्र के कल्याण का माध्यम बन जाता है। जीवन स्वयं ईश्वर का अनमोल उपहार है और इसी जीवन के कारण परिवार, समाज तथा सभ्यता का निर्माण हुआ है। इसलिए यह स्पष्ट सत्य है कि प्रकाश से जीवन और जीवन से ही संसार का अस्तित्व है, और जब समाज में ज्ञान, न्याय और सकारात्मकता का प्रकाश फैलता है तब अज्ञान, अन्याय और भ्रष्टाचार का अंधकार स्वतः समाप्त होने लगता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर
प्रकाश बिना तो जीवन संभव ही नहीं। प्रकाश ही इस सारे जग को आलोकित करता है। प्रकाश संश्लेषण के द्वारा वनस्पति अपना भोजन निर्मित करती है। हमारा जीवन ही सूर्योदय से प्रारंभ होता है। बिना प्रकाश के जीवन की कल्पना ही नहीं कर सकते। कोई कार्य अंधेरे में संभव नहीं। प्रकाश से ही सभी कार्य संपन्न होते हैं। जीवन चलता है,कार्य संपादित होते हैं।और जीवन है तो संसार है। प्रकाश के बिना कुछ भी संभव नहीं।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
- रेनू चौहान
नई दिल्ली
" मेरी दृष्टि में " प्रकाश से ही जीवन की विभिन्न क्रियाएं की पूर्ति होती है। जीवन से संसार की कल्पना होती है। प्रकाश से जीवन है जीवन से संसार चलता है। संसार से सभ्यता की सरंचना होती है। सब कुछ प्रकाश के अधीन है।
प्रकाश जीवन का आधार है, और जीवन संसार का मूल है। प्रकाश के बिना जीवन असंभव है, और जीवन के बिना संसार का अस्तित्व नहीं होता। यह एक गहरा और सरल सत्य है। प्रकाश हमें ऊर्जा, ज्ञान, और दिशा देता है, जो जीवन को समृद्ध बनाता है। और जीवन से ही संसार में रंग, भाव, और अर्थ आते हैं।
ReplyDelete- सुनीता गुप्ता कानपुर
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