पाठकों के बीच में अलका जैन आनंदी की लघुकथाएं
अलका जैन आनंदी
जन्म -24जून, दिल्ली
शिक्षा -बी काम,NTT PTT Teacher training 2 year, basic classical dance
शादी - दिल्ली के ही बैंकर राजीव जैन ट्रांसफरेबल जाब के कारण कई जगह परिवर्तन । सबसे अंतिम मुंबई। अब दिल्ली में स्थाई रूप से हूं।
साहित्यिक परिचय
प्रकाशित पुस्तकें -
छः एकल संग्रह :-
काव्य मेघ,
अद्भुत भंडार,
श्रीकांत भंडार,
संकल्प अलका,
खजाना, (अमाजान पर भी)
अलका रहस्य
50 साझा संग्रह
- पिछले दस वर्षों से नोएडा, मुंबई के समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित होती रही है।
- गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड में नाम दर्ज।
- मुंबई हिंदी अकादमी व लगभग सो के करीब आफ लाइन सम्मानों से सम्मानित।
- समीक्षा रत्न सम्मान 2026(भारतीय लघुकथा विकास मंच)एक हजार के करीब समीक्षक, संयोजक व भिन्न प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पर आन लाइन सम्मान प्राप्त।
- सामाजिक सेवा व वृक्षारोपण के लिए आनलाइन सहायता
पता :
जे - ब्लाक , 3/7 कृष्णा नगर , दिल्ली
1. दुल्हन
कितनी प्यारी सलोनी सी दुल्हन बनी बैठी चिंकी के मन में हलचल सी मची है।कैसा होगा, कैसे बोलता होगा। इसी सबको सोचते हुए प्यारी सी दुल्हन बनी बैठी है।बहुत भारी गले में हार पहना है। कहीं गला ही न लचक जाए। हाथों में कंगन व नाक में बहुत बड़ी नथनी पहनी हुई है। जैसे पचास साल पहले की अभिनेत्री पहना करती थी। और भी बहुत से गहनें पहनें हैं।अरे कानों में भारी-भारी झुमके कहीं कान ही न कट जाए।अब तक नाजुक सी कन्या कहां सूट व स्कर्ट में घूमने वाली और कहां यह साड़ी में ढकी-दबी सी नाजुक कन्या। जो घूंघट में डोली में बैठी झांक रही है ।मन में हजारों सपने और कुछ प्यार की बातें। हलचल मची है तन-मन में। सोच रहीं हैं वह ऐसे पूछेंगे तो मैं ऐसे जवाब दूंगी। ऐसे पूछेंगे तो मैं ऐसे बोलूंगी ।इसी उधेड़बुन में बैठी सोच रही है।
भाभी ने मन टटोलने के लिए छेड़छाड़ वाले लहजे में कुछ जानना चाहा तो राधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा दी।
2. फोन व मां
रीमा अपने बेटे को सुलाने की कोशिश कर रही है।उसका बेटा थोड़ा रो रहा था। उसने सोचा इसे भूख लगी है।रीमा रसोई से उसके लिए बोतल में दूध ले आती है।वह दूध की बोतल उसके मुंह से लगाने ही वाली थी कि उसे फोन में एक संदेश आता है। उस संदेशे को देखने बैठी तो एक के बाद एक रील आती चली जाती हैं।और वह उसे देखने में खो सा जाती है। इतने में बेटा उसकी गोद में भूखा ही सो जाता है।उधर से उसकी पालतू बिल्ली जो खड़ी हुई थी उसके पास आई। इधर दूध की बोतल बेटा समझ कर उसके मुंह से लगा दी। ओर बिल्ली भी बड़े मजे से दूध को पीने लग गई।जब दूध खत्म हुआ ओर बिल्ली आगे बढ़ी तभी उसका ध्यान गया। ऐसा भी क्या???
3. लगाव
रानी को छोटे बच्चों से बहुत लगाव है। एक अनाथ आश्रम में बच्चों की सेवा करने के लिए रोजाना ग्यारह से चार बजे तक जाती है ।छोटे बच्चों के साथ खेलना ,उनके खाने का ध्यान रखना उसे बहुत अच्छा लगता है।दो दिन से उसे बहुत तेज बुखार हैं ,जिसके कारण वह चिड़-चिड़ी हो रही है ।क्योंकि बच्चों के पास नहीं जा पाई। जरा सा ठीक होते ही वह सबसे पहले अनाथ आश्रम पहुंची और ऐसे रो रही थी जैसे कितने दिन की बिछडी हो।उसके लिए बच्चो से ज्यादा कुछ नहीं ।सब से कह रही हैं,तुमने ठीक से खाया।तूम्हें किसी ने परेशान तो नहीं किया। मुझे फोन कर लेते ।मैंने कितने दिन से तुम्हें देखा नहीं । फूलों को ठीक से पानी दिया।
उसके जीवन का यही उद्देश्य है। ऐसे हंसते -गाते उसका भी और बच्चों का भी समय पता ही नहीं चलता ।कब बीत गया ?इन्हीं मधुमय पलों के साथ।
4. मेहनत
श्वेता ने बीएसई गणित में एडमिशन लिया। वह रेगुलर दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉप कॉलेज में पढ रही है। तभी किसी मित्र ने एक कोर्स जिसे एक्चुअरियल साइंस बोलते हैं के बारे में बताया। उसने उसकी प्राइवेट कोचिंग लेनी शुरू कर दी ।जो भी बच्चे सुनते ,यही कहते यह तो बहुत ही कठिन कोर्स है ।तुम कॉलेज में भी कम नंबर लाओगी।
इसे क्यों कर रही हो ?
दूसरे तरफ कुछ बच्चे कहते :- तुम तो कर ही लोगी । तुम्हारे लिए क्या कठिन है ?आपस में फ्रेंड्स बात तो करते ही हैं। श्वेता को अपने ऊपर पूरा भरोसा था।उसने कहा जो होगा देखा जाएगा ।मेरे से जितनी ज्यादा से ज्यादा मेहनत होगी, मैं करूंगी ।उसने दिन- रात एक कर के बीएससी करते-करते कई पेपर पास कर लिए ।
उसके बाद उसे मुंबई की नंबर वन कंपनी से जॉब के लिए आफर आया जो कि उसने ऑनलाइन भरा था । सीडी पहले से ही ओन लाइन भेज रखी थी।ऑफर आने पर वीडियो कांफ्रेंस हुई । दो-तीन दिन बाद वीडियो कॉल पर ही इंटरव्यू हुआ, जिसमें उसे सलेक्ट कर लिया गया। इसके एक महीने बाद उसे एक साल की इंटर्नशिप के लिए बुलाया गया।जिसमें कि उसे दो महीने पहले ही परमानेंट रख लिया। उसकी मेहनत और लगन का ही नतीजा था कि उसने अपनी अंदरूनी शक्ति को पहचाना ।समय का सदुपयोग किया ।
कुछ भी नामुमकिन नहीं समय सभी के पास चौबीस घंटे होता है ।
5. आपबीती
राधा और रवि बहुत प्यार से रहते थे। आपस में बोलते बतलाते उनका जीवन चक्र बढ़ता जा रहा था। राधा हर काम में निपुण थी। और रवि पेड़ पौधों को पानी देना और पैसे कमाना अपनी जिम्मेदारी समझता था।अच्छे से सब निभा रहा था। उनके घर पर कई छोटे बड़े पौधे और एक केले का पेड़ भी था।जिसका वह जी जान से ध्यान रखता। पेड़ पर केले आ गए थे।राधा ने केले की मीठी चटनी बनाने के लिए कुछ केले तोड़े और उनकी स्वादिष्ट मिट्टी चटनी बनाई।जो दोनों को बहुत पसंद थी।उनके यहां कुछ जानकार अपने बच्चों के साथ आने वाले थे।इस तरह उनका जीवन आनंद से बीत रहा था। किसी वस्तु की कोई कमी न थी।पेड़ पौधों लगा कर आक्सीजन भी मिलती। प्रदुषण भी कुछ कम होता। ओर फूल व कुछ फल भी मिल जाते।
======≠==============================
Comments
Post a Comment