पाठकों के बीच में अलका जैन आनंदी की लघुकथाएं

      अलका जैन आनंदी 

जन्म -24जून, दिल्ली

शिक्षा -बी काम,NTT PTT Teacher training 2 year, basic classical dance

 शादी -  दिल्ली के ही बैंकर राजीव जैन ट्रांसफरेबल जाब के कारण कई जगह परिवर्तन । सबसे अंतिम मुंबई। अब दिल्ली में स्थाई रूप से हूं। 

            साहित्यिक परिचय

प्रकाशित पुस्तकें -

छः एकल संग्रह :-

  काव्य मेघ, 

अद्भुत भंडार, 

श्रीकांत भंडार, 

संकल्प अलका,

 खजाना, (अमाजान पर भी) 

अलका रहस्य

50 साझा संग्रह

- पिछले दस वर्षों से नोएडा, मुंबई के समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित होती रही है।

- गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड में नाम दर्ज।

-  मुंबई हिंदी अकादमी व लगभग सो के करीब आफ लाइन सम्मानों से सम्मानित।

-  समीक्षा रत्न सम्मान 2026(भारतीय लघुकथा विकास मंच)एक हजार के करीब समीक्षक, संयोजक व भिन्न प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पर आन लाइन सम्मान प्राप्त।

- ‌सामाजिक सेवा व वृक्षारोपण के लिए आनलाइन सहायता 

पता :

जे - ब्लाक , 3/7 कृष्णा नगर , दिल्ली

1. दुल्हन

 कितनी प्यारी सलोनी सी दुल्हन बनी बैठी चिंकी के मन में हलचल सी मची है।कैसा होगा, कैसे बोलता होगा। इसी सबको सोचते हुए प्यारी सी दुल्हन बनी  बैठी है।बहुत भारी गले में हार पहना है। कहीं गला ही न लचक जाए। हाथों में कंगन व नाक में बहुत बड़ी नथनी पहनी हुई है। जैसे   पचास साल पहले की अभिनेत्री पहना करती थी। और भी बहुत से गहनें पहनें हैं।अरे कानों में भारी-भारी झुमके कहीं कान ही न कट जाए।अब तक नाजुक सी कन्या कहां सूट व स्कर्ट में घूमने वाली  और कहां यह साड़ी में ढकी-दबी सी नाजुक कन्या। जो घूंघट में डोली में बैठी झांक रही है ।मन में हजारों सपने और कुछ प्यार की बातें। हलचल मची है तन-मन में। सोच रहीं हैं वह ऐसे पूछेंगे  तो मैं ऐसे जवाब दूंगी। ऐसे पूछेंगे तो मैं ऐसे बोलूंगी ।इसी उधेड़बुन में  बैठी  सोच रही है।

भाभी ने मन टटोलने के लिए छेड़छाड़ वाले लहजे में कुछ जानना चाहा तो राधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा दी।

2. फोन व मां

रीमा अपने बेटे को सुलाने की कोशिश कर रही है।उसका बेटा थोड़ा रो रहा था। उसने सोचा इसे भूख लगी है।रीमा रसोई से उसके लिए बोतल में दूध ले आती है।वह दूध की बोतल उसके मुंह से लगाने ही वाली थी कि उसे फोन में एक संदेश आता है। उस संदेशे को देखने बैठी तो एक के बाद एक रील  आती चली जाती हैं।और वह उसे देखने में खो सा जाती है। इतने में बेटा उसकी गोद में भूखा ही सो जाता है।उधर से उसकी पालतू बिल्ली जो खड़ी हुई थी उसके पास आई। इधर दूध की बोतल बेटा समझ कर उसके मुंह से लगा दी। ओर बिल्ली भी बड़े मजे से दूध को पीने लग गई।जब दूध खत्म हुआ ओर बिल्ली आगे बढ़ी तभी उसका ध्यान गया। ऐसा भी क्या???

3. लगाव

       रानी को छोटे बच्चों से बहुत लगाव है। एक अनाथ आश्रम में बच्चों की सेवा करने के लिए रोजाना ग्यारह से चार बजे तक जाती है ।छोटे बच्चों के साथ खेलना ,उनके खाने का ध्यान रखना उसे बहुत अच्छा लगता है।दो दिन से उसे बहुत तेज बुखार हैं ,जिसके कारण वह चिड़-चिड़ी हो रही है ।क्योंकि बच्चों के पास नहीं जा पाई। जरा सा ठीक होते ही वह सबसे पहले अनाथ आश्रम पहुंची और ऐसे रो रही थी जैसे कितने दिन की बिछडी  हो।उसके लिए बच्चो से ज्यादा कुछ नहीं ।सब से कह रही हैं,तुमने ठीक से खाया।तूम्हें किसी ने परेशान तो नहीं किया। मुझे फोन कर लेते ।मैंने कितने दिन से तुम्हें देखा नहीं । फूलों को ठीक से पानी दिया। 

   उसके जीवन का यही उद्देश्य है। ऐसे हंसते -गाते उसका भी और बच्चों का भी समय पता ही नहीं चलता ।कब बीत गया ?इन्हीं मधुमय पलों के साथ।

4. मेहनत

श्वेता ने बीएसई  गणित में एडमिशन लिया।  वह रेगुलर दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉप कॉलेज में पढ रही है। तभी किसी मित्र ने एक कोर्स जिसे एक्चुअरियल साइंस बोलते हैं के बारे में बताया। उसने उसकी प्राइवेट कोचिंग लेनी शुरू कर दी ।जो भी बच्चे सुनते ,यही कहते यह तो बहुत ही कठिन कोर्स है ।तुम कॉलेज में भी कम नंबर लाओगी।

इसे क्यों कर रही हो ?

दूसरे तरफ कुछ बच्चे कहते :- तुम तो कर ही लोगी । तुम्हारे लिए क्या कठिन है ?आपस में फ्रेंड्स बात तो करते ही हैं।  श्वेता को अपने ऊपर पूरा भरोसा था।उसने कहा जो होगा देखा जाएगा ।मेरे से जितनी ज्यादा से ज्यादा मेहनत होगी, मैं  करूंगी ।उसने दिन- रात एक कर के बीएससी करते-करते कई पेपर पास कर लिए ।

       उसके बाद उसे मुंबई की नंबर वन कंपनी से जॉब के लिए आफर आया जो कि उसने ऑनलाइन भरा था । सीडी पहले से ही ओन लाइन भेज रखी थी।ऑफर आने पर वीडियो कांफ्रेंस हुई । दो-तीन दिन बाद वीडियो कॉल पर ही इंटरव्यू हुआ, जिसमें उसे सलेक्ट कर लिया गया। इसके एक महीने बाद उसे एक साल की इंटर्नशिप के लिए बुलाया गया।जिसमें कि उसे दो महीने पहले ही परमानेंट रख लिया। उसकी मेहनत और लगन का ही नतीजा था कि उसने अपनी अंदरूनी शक्ति को पहचाना ।समय का सदुपयोग किया ।

कुछ भी नामुमकिन नहीं समय सभी के पास चौबीस घंटे होता है । 

5. आपबीती

राधा और रवि बहुत प्यार से रहते थे। आपस में बोलते बतलाते उनका जीवन चक्र बढ़ता जा रहा था। राधा हर काम में निपुण थी। और रवि पेड़ पौधों को पानी देना और पैसे कमाना अपनी जिम्मेदारी समझता था।अच्छे से सब निभा रहा था। उनके घर पर कई छोटे बड़े पौधे और एक केले का पेड़ भी था।जिसका वह जी जान से ध्यान रखता। पेड़ पर केले आ गए थे।राधा ने केले की मीठी चटनी बनाने के लिए कुछ केले तोड़े और उनकी स्वादिष्ट मिट्टी चटनी बनाई।जो दोनों को बहुत पसंद थी।उनके यहां कुछ जानकार अपने बच्चों के साथ आने वाले थे।इस तरह उनका जीवन आनंद से बीत रहा था। किसी वस्तु की कोई कमी न थी।पेड़ पौधों लगा कर आक्सीजन भी मिलती। प्रदुषण भी कुछ कम होता। ओर फूल व कुछ फल भी‌ मिल जाते।


 रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े विषय

अलका जैन आनंदी की ये पाँचों लघुकथाएँ आज की सामाजिक संवेदना, तकनीकी प्रभाव और मानवीय रिश्तों के बदलते स्वरूप को बहुत सरल लेकिन प्रभावी ढंग से सामने लाती हैं। इन कथाओं में भाषा सहज है और कथ्य सीधे पाठक के जीवन से जुड़ता है, जो लघुकथा की सबसे बड़ी विशेषता है।

1. “दुल्हन”

यह लघुकथा एक किशोरी के मनोवैज्ञानिक संसार को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है। विवाह के समय बाहरी आडंबर (भारी गहने, घूंघट, साड़ी) और भीतर के भाव (जिज्ञासा, डर, सपने, संकोच) का टकराव बहुत स्वाभाविक रूप से उभरता है।यह कथा स्त्री मन की नाजुक हलचल को पकड़ती है जहाँ शब्द कम हैं लेकिन भाव अधिक हैं। “मुस्कुराना” अंत में एक मौन अभिव्यक्ति बनकर रह जाता है जो कथा को प्रभावी बनाता है।

2. “फोन व माँ”

यह कथा आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी सच्चाई को सामने रखती है—ध्यान का विभाजन । माँ, बच्चा और मोबाइल—तीनों के बीच जो भावनात्मक दूरी बनती है वह बहुत मार्मिक है।बच्चे का भूखा सो जाना और माँ का अनजाने में बिल्ली को दूध पिला देना एक प्रतीक है कि तकनीक कैसे मानवीय संवेदना को पीछे छोड़ रही है। यह लघुकथा एक चेतावनी है लेकिन कि हम स्क्रीन में इतना न खो जाएँ कि जीवन हमारे हाथ से निकल जाए।

3. “लगाव”

यह कथा मानवीय करुणा और सेवा-भाव की उत्कृष्ट प्रस्तुति है।रानी का अनाथ बच्चों के प्रति लगाव केवल सामाजिक कार्य नहीं अपितु भावनात्मक जुड़ाव है। उसका बुखार में भी बच्चों के पास भाग जाना यह दिखाता है कि कभी-कभी संबंध खून से नहीं संवेदना से बनते हैं। यह कथा “ममता” को केंद्र में रखती है और जीवन का उद्देश्य सेवा में खोजती है।

4. “मेहनत”

यह कथा युवाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी दुनिया की सच्चाई को उजागर करती है। श्वेता का दृढ़ निश्चय, बाहरी दबावों के बावजूद आगे बढ़ना और अंततः सफलता प्राप्त करना प्रेरणादायक है।यह कथा यह संदेश देती है कि “क्षमता से अधिक महत्वपूर्ण निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास है।” हालाँकि कथा का अंत थोड़ा तथ्यात्मक हो जाता है, फिर भी इसका प्रेरक प्रभाव मजबूत है।

5. “आपबीती”

यह कथा एक सामान्य घरेलू जीवन को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करती है।पौधों, केले के पेड़ और दंपति के सहज जीवन के माध्यम से प्रकृति और जीवन की सरलता दिखाई गई है।लेकिन केले तोड़ने और “मीठी चटनी” जैसे प्रसंग में हल्की हास्यात्मक और यथार्थवादी झलक भी है। कथा यह संकेत देती है कि सुख बड़े साधनों में नहीं अपितु छोटे-छोटे सहज पलों में है।

इन पाँचों लघुकथाओं की सबसे बड़ी ताकत है—

सरल और बोलचाल की भाषा।

रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े विषय।

सामाजिक यथार्थ का चित्रण

भावनात्मक जुड़ाव।

कुल मिलाकर ये लघुकथाएँ आज के समाज का आईना हैं जहाँ प्रेम, तकनीक, सेवा, संघर्ष और सरल जीवन सब एक साथ दिखाई देते हैं।

- डाॅ.छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

     महत्वपूर्ण  तत्व  "संवाद" की कमी

 1. दुल्हन:- 

दुल्हन  चिंकी की कल्पना का चित्रण  अच्छा है। डोली का उपयोग  अच्छा किया। शुद्ध  विवरण।

2.फोन और माँ :-

 मोबाइल  उपयोग  करने वाले इसमें ग्रस्त हो गये है।माँ की लापरवाही और अवहेलना उत्तम  है। वहीं उचित शब्द की कमी।  

3.लगाव:- 

अनाथ  बच्चों से मिलने छटपटाहट।  इसे और करूणामय बनाई  जा सकती थी।  

4. मेहनत :- 

अच्छी लघुकथा। नया अंदाज संवाद स्थापित करती तो और अच्छी बनती। शीर्षक एक्चुअरियल रखना चाहिए। 

5 . आपबीती : -

आपबीती केवल  शुद्ध  विवरण  है। 

- लक्ष्मण शिवहरे

 नागपुर - महाराष्ट्र 


छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से बड़े संदेश

अलका जैन आनंदी जी की ये पाँचों लघुकथाएँ जीवन के अलग-अलग पक्षों को सरल भाषा और सहज भावों के साथ प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक कथा में संवेदनाएँ, सामाजिक संदेश और मानवीय रिश्तों की झलक दिखाई देती है। प्रस्तुत हैं अलग-अलग समीक्षाएँ —

1. दुल्हन — 

यह लघुकथा एक नववधू के मनोभावों को बहुत सहजता से व्यक्त करती है। दुल्हन के मन में उठते संकोच, उत्सुकता और भविष्य के सपनों का चित्रण सुंदर है। गहनों और वेशभूषा के माध्यम से उसकी नाजुक स्थिति को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। कथा में स्त्री मन की हलचल और विवाह के प्रति उसके कोमल भावों को सरल भाषा में उकेरा गया है।

2. फोन व मां — 

यह कथा आज की मोबाइल-आसक्ति पर तीखा लेकिन प्रभावशाली व्यंग्य करती है। एक मां का अपने बच्चे की जरूरत भूलकर फोन में खो जाना वर्तमान समाज की वास्तविकता को दर्शाता है। अंत बहुत प्रभावशाली है और पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक का अति प्रयोग रिश्तों की संवेदनाओं को कैसे कम कर रहा है।

3. लगाव — 

यह लघुकथा सेवा, ममता और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर उदाहरण है। रानी का अनाथ बच्चों के प्रति प्रेम और समर्पण बहुत प्रेरणादायक है। कथा यह संदेश देती है कि सच्चा सुख दूसरों की खुशी में छिपा होता है। भाषा भावपूर्ण है और कथा पाठक के मन को छू लेती है।

4. मेहनत — 

यह लघुकथा युवाओं को मेहनत, आत्मविश्वास और समय के सदुपयोग का संदेश देती है। श्वेता का कठिन कोर्स चुनना और लगातार परिश्रम से सफलता प्राप्त करना प्रेरणादायक है। कथा में संघर्ष और उपलब्धि का संतुलित चित्रण है। यह लघुकथा सकारात्मक सोच और लगन की शक्ति को उजागर करती है।

5. आपबीती — 

यह कथा साधारण जीवन में छिपे सुख और संतोष को दर्शाती है। राधा और रवि का प्रेम, प्रकृति से जुड़ाव और छोटे-छोटे पलों में खुशी ढूँढना कहानी की विशेषता है। पेड़-पौधों और घरेलू जीवन के माध्यम से पर्यावरण और पारिवारिक सामंजस्य का सुंदर संदेश दिया गया है। कथा सरल होते हुए भी आत्मीयता से भरपूर है।

समग्र रूप से, अलका जैन आनंदी जी की लघुकथाएँ सहज भाषा, सामाजिक सरोकार और मानवीय भावनाओं से समृद्ध हैं। इनमें जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से बड़े संदेश देने की क्षमता दिखाई देती है।

- अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 


  भावनात्मक और सामाजिक संदेश

अलका जैन आनंदी की ये पाँचों लघुकथाएँ जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, आधुनिक जीवन की विडम्बनाओं, परिश्रम, ममता और घरेलू जीवन की सहजता को प्रस्तुत करती हैं। भाषा सरल, सहज और बोलचाल के निकट है, जिससे कथाएँ पाठक से सीधा संवाद स्थापित करती हैं। प्रस्तुत है संक्षिप्त समीक्षा :-

1. दुल्हन

यह लघुकथा एक नववधू के मनोभावों और उसके अंतर्मन की हलचलों को सुंदर ढंग से चित्रित करती है। दुल्हन के वस्त्रों और गहनों का बोझ केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक संकोच और भविष्य की कल्पनाओं का भी प्रतीक बन जाता है। कहानी में स्त्री मन की उत्सुकता, लज्जा और सपनों की कोमलता दिखाई देती है। अंत में मुस्कान के माध्यम से भावों को व्यक्त करना कथा को सहजता प्रदान करता है। यदि संवाद थोड़े और सघन होते तो प्रभाव और बढ़ सकता था। 

2. फोन व मां

यह वर्तमान समय की एक तीखी सामाजिक विडम्बना को उजागर करती है। मोबाइल और रील्स की दुनिया में खोती जा रही मातृत्व संवेदना को बहुत छोटे लेकिन प्रभावी प्रसंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बच्चे के स्थान पर बिल्ली को दूध पिलाने वाला दृश्य पाठक को झकझोरता है और आधुनिक डिजिटल लत पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। “ऐसा भी क्या?” कहानी का सबसे प्रभावशाली बिंदु बन जाता है। 

3. लगाव

यह कथा मानवता, सेवा और ममत्व का सुंदर उदाहरण है। अनाथ बच्चों के प्रति रानी का समर्पण केवल दया नहीं बल्कि आत्मीय संबंध का रूप ले लेता है। बीमारी में भी बच्चों की चिंता करना उसके चरित्र की करुणा और संवेदनशीलता को उजागर करता है। कथा सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संदेश देती है। भाषा में भावुकता स्वाभाविक रूप से उभरती है। 

4. मेहनत

यह प्रेरणात्मक लघुकथा युवाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास और समय के सदुपयोग पर आधारित है। श्वेता का कठिन कोर्स चुनना और निरंतर मेहनत से सफलता प्राप्त करना यह सिद्ध करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव भी संभव बन सकता है। कथा में आधुनिक शिक्षा और करियर की प्रतिस्पर्धा का यथार्थ भी झलकता है। अंतिम संदेश प्रेरणादायक है और युवाओं को उत्साह देता है। 

5. आपबीत

यह कथा दांपत्य जीवन की सादगी, प्रेम और प्रकृति के प्रति लगाव को प्रस्तुत करती है। छोटे-छोटे घरेलू प्रसंगों के माध्यम से संतोषपूर्ण जीवन का चित्र उभरता है। पेड़-पौधों, केले के पेड़ और घर की आत्मीयता कहानी को सहज और जीवंत बनाती है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी अप्रत्यक्ष रूप से कथा में समाहित है। यह कहानी बताती है कि सुख केवल भौतिक वस्तुओं में नहीं बल्कि पारिवारिक सामंजस्य और प्रकृति से जुड़ाव में भी है।

समग्र टिप्पणी

अलका जैन आनंदी की लघुकथाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरलता और सहज भावाभिव्यक्ति है। वे जटिल प्रतीकों या भारी भाषा का सहारा नहीं लेतीं, बल्कि दैनिक जीवन की घटनाओं से ही भावनात्मक और सामाजिक संदेश प्रस्तुत करती हैं। कथाओं में नारी मन, पारिवारिक संवेदनाएँ, सामाजिक चेतना और प्रेरणात्मक दृष्टिकोण प्रमुखता से उभरकर आते हैं। कुछ स्थानों पर भाषा और शिल्प में कसाव की आवश्यकता महसूस होती है, किन्तु कथ्य की आत्मीयता पाठक को बाँधे रखती है। 

संदेश :-

 काश लेखक काल्पनिक दुनिया से निकलकर सत्य पथ पर चलें और सच्चाई से मूंह मोड़कर पतली गली से निलने के स्थान पर डटकर सामना करें? 

- डॉ इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

    सकारात्मकता से पूर्ण

१.अलका जैन जी की यह लघुकथा एक दुल्हन के मन में छिपे कई तरह के सपनें को दिखाता है ,साथ ही एक लड़की जो कभी भारी-भरकम कुछ भी साथ रखने को तैयार नहीं होती ,आज जब वह दुल्हन बनी है तो सब करने को मानसिक रूप से तैयार होने लगती है।एक दुल्हन का श्रृंगार यह बता रहा है कि वह पलकों पर कितने ही सपनें को सजा विदा हो रही है।कहीं न कहीं आज के समाज की विचारधारा को भी संकेत कर रहा है।एक लड़की का पिता अपनी हैसियत से कितना ही ज्यादा अपनी बेटी के लिए करता है,मगर भय की यात्रा भी अनवरत चलती ही रहती है।शब्दों का चयन उत्तम है,सरल भाषा-शैली विचारों को गतिमान कर रहा है।

२.अलका जैन जी की दूसरी लघुकथा 'फोन व माँ' सोशल मीडिया का पागलपन  एक गंभीर परिस्थिति की ओर इशारा कर रही है।सोशल मीडिया आज के बच्चों ,माँओ का कीमती समय नष्ट कर रहा है।आपसी प्रेम खत्म कर रही है, जिम्मेदारियों का नाश कर रही है,इसके दुष्परिणाम दिखा रही है।सरल भाषा शैली में चित्रात्मक वर्णन पाठकों को अपनी ओर खींच रहा है।

३.अलका जैन जी की तीसरी लघुकथा 'लगाव' बहुत ही बेहतरीन व शिक्षाप्रद है।रोने से भला अपने को किसी कार्य में व्यस्त रखना खुश रहने  का बेहतरीन उपाय है।घर में यदि कोई नहीं भी है तो कितने ही तरीके खुद को व्यस्त रखने के हैं। आवश्यकता है तो धैर्य रखने की,सूझ बूझ से काम लेने की।सुंदर ,संदेशात्मक, निरंतर भावों में प्रवाह। बेहतरीन लघुकथा।

४.अलका जैन जी की चौथी लघुकथा 'मेहनत'भी  सकारात्मकता की ओर संकेत कर रही है। मनुष्य को अपना आंकलन पहले नहीं करना चाहिए। आशावादी सोच की यह लघुकथा आज की युवा पीढ़ी को प्रगतिशील,प्रयासरत रहने की शिक्षा देती है।

५.अलका जैन जी की पाँचवी लघुकथा 'आपबीती' जीवन की जटिलताओं का मनुष्य पारस्परिक सामंजस्यता व सूझ बूझ के साथ हल निकाल सकता है।आशावादी, सकारात्मकता से पूर्ण यह लघुकथा विचारों को ऊर्जा देने वाली है।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

 कथाकार का प्रयास  सराहनीय

1.दुल्हन :- 

आधुनिक संस्कारों में पली युवा छात्रा को पारम्परिक दुल्हन के लिबास और गहनों से लाद दिया जाता है तब उसकी मानसिक  अंतर्द्वंद को  दर्शाने  का  प्रयास  किया  गया है l यदि इसे और विस्तार  दिया जाता  तो अधिक  प्रभावी होता । 

2. फोन व मां :-   

वर्तमान समय की त्रासदी को चित्रित करती  लघुकथा जिसमें मोबाईल के नशे में मातायें सुध-बुध खोकर अपने नन्हें बच्चों को भी भूल जाती हैं और उनकी परवरिश करने में लापरवाही भीणकरती हैं ।

3.लगाव :- 

यह लघुकथा न होकर एक घटनाक्रम सा प्रतीत  होता है l इसमें क्या  संदेश है यह स्पष्ट  नहीं  है l

4.मेहनत:-

 यहाँ घटनाक्रम  में  समयावधि का  दोष है l अलग-अलग कालखंड में  बिखराव सा अनुभव होता है ।

5. आपबीती :- 

पर्यावरण का संदेश देने के प्रयास  में विषयबस्तु में कसावट के स्थान पर बिखराव हो गया है ।

               कथाकार का प्रयास  सराहनीय है यदि एक बार उनके द्वारा  अपने स्तर से ही समीक्षा कर ली जाती तो इन सभी का प्रभाव अदभुत होता ।

  - निहाल चन्द्र शिवहरे 

     झाँसी - उत्तर प्रदेश         


         बात अच्छी है सच्ची है


अलका जैन आनंदी जी की लघुकथा पढ़ रही हूँ और विचार कर रही हूँ जितना मैं जानती हूँ लघुकथा के बारे में उस पर किस लघुकथा को पहला नं० दूँ।

पहली लघुकथा “दुल्हन “ 

लघुकथा नहीं लगी महज दुल्हन के मनोभाव किसी और के द्वारा दिए गए हैं। 

दूसरी लघुकथा “ फ़ोन व माँ “

में दम है। वर्तमान में व्यस्तता में  बेध्यान माताओं के ऐसे अनेक कारनामों में से एक यह भी ।

क्यों नहीं हो सकता। सब कुछ सम्भव है।रोचक ।

इसका शीर्षक 

“ फ़ोन व माँ “ न दे कर 

यही देना चाहिए 

“ ऐसा भी क्या “ 

पहला नं० इसे ही दे रही हूँ। 

तीसरी लघुकथा  'लगाव'

 बस अपनी बात कहती है।लघुकथा की तीव्रता व पंच जैसा कुछ नहीं है। छोटी सी बात है बस ।

चौथी  लघुकथा "मेहनत "

मेहनत से कौन सफल नहीं होता।लघुकथा में आधी-अधूरी बात नहीं पूरी बात होती है अल्प  में।

पांचवीं लघुकथा 'आपबीती'

मेरी समझ से तो लघुकथा नहीं कहलाएगी। छोटी कहानी भी नहीं। बस अपनी बात है। 

शायद 

या तो मैंने नहीं समझा लघुकथा को ठीक से या अलका जी ने।बहरहाल बात अच्छी है, सच्ची है। सरल शब्दों कही गई है। 

- डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘ उदार ‘

           अमेरिका 

        पांचों लघुकथा की समीक्षा 

१.दुल्हन

शादी से पहले उठने वाले मन के भाव, प्राचीन परिधान एवं आभूषण, स्वतंत्र जीवन से परंपरागत जीवन की ओर उन्मुख भाव व्यक्त करती लघु कथा

२. फोन व मां

   सुंदर कथ्य,फोन एवं रील के प्रति बढ़ता आकर्षण, बिल्ली का दूध पीना और बालक का भूखा सोना, मां का रील में मशगूल होना, बढ़ती वर्तमान समस्या पर सटीक व्यंग्य।

३.लगाव

सुंदर भावपूर्ण लघु कथा, अनाथ आश्रम के बच्चों से यथार्थ लगाव, बुखार की स्थिति में भी बच्चों का ध्यान रखना, उत्तम भाव संप्रेषित। 

४. मेहनत

 अपनी आत्म शक्ति को पहचान कर, लगन के साथ लक्ष्य को प्राप्त करना और दिग्भ्रमित नहीं होना,इस लघु कथा का मूल उद्देश्य जिसमें श्वेता समर्थ रही।

५. आपबीती 

पेड़ ,पौधे लगाकर उन्हीं से जीवन यापन करना और सुख से रहना, यही था रवि और उसकी पत्नी का उद्देश्य।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 



Comments

  1. अलका जैन आनंदी जी की पाँच लघुकथाएं पढ़ने का सुअवसर मिला. सभी लघुकथाएं समसामयिक विषयों पर लिखीं गई हैं. मुझे एक लघुकथा पसंद आई 2. नंबर वाली जो आजकल हर जगह ऐसी घटना पर लिखी गई है. आज कल लोग मोबाइल में इतना व्यस्त रहते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब कहां क्या करना है. मोबाईल रिश्तों को खा रहा है. हम सबकी लगभग यही अवस्था है. मोबाइल में इतने व्यस्त हो गये हैं कि खाना पीना भी भूल जाते हैं समय पर कुछ नहीं हो पाता है.

    दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
    Kalk
    ( WhatsApp से साभार )

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