पद्म भूषण रामकिंकर बैज की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

जीवन में बहुत कुछ होता है परन्तु सभी का जीवन एक सा नहीं होता है। यह सब भाग्य का कमाल होता है। भाग्य कर्म से बनता है। कर्म जीवन का आधार है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
       जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता, उद्देश्य कुछ भी हो,गलत कुछ नहीं होता.... यह उक्ति हमें संकेत और अनुभव देती है कि जीवन में जो भी कुछ गलत या सही होता है उसके पीछे कोई ना कोई कारण होता है। आज हम जिस प्रचंड गर्मी में झुलस दुखी हो रहे हैं उसका भी कारण है। हमने पेड़ों को काटकर, अधिक वाहनों का उपयोग कर वातावरण में धुआं ही धुआं भर प्रदूषित कर दिया है, जिसका परिणाम हम आज भुगत रहे हैं। पर्यावरण और प्रदूषण पर जो ध्यान ना दिया गया तो आगे और मुश्किल बढ़ सकती है। इसी तरह केवल उद्देश्य ही नहीं ,उसे पाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उद्देश्य भी समय और परिस्थिति के साथ बदलते हैं सच्ची निष्ठा से कोई राह चुनते हैं चाहे उसे गल्तियों या असफलताओं को भी यदि सीखने के रूप में लेते हैं तो वह सफलता की सीढ़ी बन जाती है। किसी गरीब की मदद करना अच्छा है किंतु चोरी करके मदद करना ठीक नहीं। सही उद्देश्य सही साधन एवं सही संवेदना यही संतुलन मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है।  व्यक्ति को अपना उद्देश्य  पवित्र और कर्म को सही दिशा देना चाहिए।

  - चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

       जीवन विविधताओं, विचित्रताओं और अनिश्चितताओं का है। कब, कहाँ, क्या, कैसे हो जाये कुछ भी कहा नहीं जा सकता। इसलिए लिये कहा भी जाता है, जो हो रहा है, होने दो। जो होना है,वह होगा ही। यानी जो भी हो रहा है वह अकारण नहीं हो रहा है। हमें तो  बस सजग और जागरूक रहना है और उद्देश्य बनाकर, उसे पूरा करने में लगे रहना है।  हमारी तरफ से कोई कमी कोई गलती न होने पाये। जितना बेहतर से बेहतर हो सके इसका ख्याल भी रखना है और करना भी है। कहा भी गया है, मन का हुआ तो ठीक। मन का न हुआ तो मानकर चलो, वह भगवान की इच्छा का और भगवान की इच्छा अकारण नहीं कोई न कोई हित होगा जिसका बाद में पता चलेगा। बस, हमें अपने-आप पर भरोसा रखना है और हिम्मत नहीं हारनी। कहा गया है, " राम भरोसे जो रहे, पर्वत पर हरियाय। " सार यही कि जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है।उद्देश्य कुछ भी  हो गलत कुछ नहीं होता है। समाधान सर्वत्र है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      जीवन में कुछ भी चाहें वह सुख देने वाले या दुख देने वाले काज हों; सबके पीछे कारण होते हैं। कुछ भी अकारण नहीं होता है। इसीलिए जब भी कोई भी कार्य हमसे गलत हो जाता है तो हमारे अनुभवों में या सीख- समझ में कमी रहती है; तब वह दुखद घटनाएं घटती हैं। जगह-जगह पर बोर्ड पर इसीलिए मानव को सचेत करने के लिए लिखा जाता है" सावधानी हटी दुर्घटना घटी"। अतः आज के दौर की गति में सहनशीलता ,धैर्य समाप्त होते जा रहे हैं। अधिक एक्सीडेंट इसका सटीक उदाहरण हैं। इसके लिए मानना होगा कि हमारी सोच जिस तरह की होगी उसका प्रभाव जीवन की कार्य प्रणाली पर अवश्य ही पड़ता है। जब कोई घटना घटित हो जाती है तो वह उस व्यक्ति के लिए भविष्य सुधारने की संकेतक होती है ।अतः निराश ना हो करके अपना कार्य करते हुए जीवन के हर क्षेत्र पढ़ाई, नौकरी, धन कमाना, राजनीति में प्रवेश या रोजमर्रा की जिंदगी के सभी कार्य जो भी जिस उद्देश्य से चलाए जा रहे होते हैं। सब में सकारात्मक बुद्धि- विवेक से कार्य करना चाहिए क्योंकि "जैसा कर्म करोगे वैसा फल देगा भगवान"। भगवान अपने ऊपर कुछ नहीं लेता बल्कि हर कारण अकारण के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं।

 - डॉ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

      जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है. गीता में भी कहा गया है कि जो होना होता है वही होता है. वही होना था. कहीं न कहीं उसका कारण निहित है. भले किसी के समझ में आए या न आए. होनी का कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य होता है.  और जो होता है वह गलत नहीं होता है. उसकी अच्छाई कहाँ पर है किसी की पता नहीं चलता. कभी-कभी चल भी जाता है. फिर भी सभी समझ नहीं पाते हैं. हो सकता है आज की कोई घटना कल के किसी अच्छे काम के लिए हो. हर काम के लिए कोई न कोई उद्देश्य है. आज की घटना को लीजिए आज कितनी गर्मी पड़ रही है. इस घटना का उद्देश्य है आप अधिक से अधिक पेड़ लगाएं. पानी बचाये. प्रकृति को बचाये नहीं तो भविष्य में इससे भी बुरे दुर्दिन आने वाले हैं. यह एक संकेत है कि हम मानव अभी भी सम्भल जाये. इसलिए ये बात पूर्णतः सत्य है कि जीवन में अकारण कुछ नहीं होता. सबका कोई न कोई उद्देश्य है. भले गलत लगे पर वो कहीं ना कहीं सही है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

       इस सम्पूर्ण सृष्टि को चलानेवाले  परमात्मा की मर्जी से ही संसार ही घटनेवाली घटना , संचालित होती है ! जब कुछ अप्रत्याशित घटता तो हम सोचते हैं कि ऐसा क्यों हुआ , पर उसमें भी आनेवाले कल का , भविष्य छुपा होता है , जो परमात्मा को तो पता होता है  पर हमें बाद मैं पता चलता है !! हर व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य व उद्देश्य प्राप्ति के प्रयास भिन्न होते है , परिस्थिति व वातावरण के अनुसार , पर गलत कुछ भी नहीं होता क्योंकि ईश्वर की लीला ऐसी होती है कि आज जो गलत लग रहा है , कल वही सही लगता है क्योंकि ईश्वर की लीला , ईश्वर ही समझ सकते हैं !! यदि हम अपने जीवन की हर घटना को भगवान की मर्जी समझें , तो जीवन सरल हो जाता है , क्योंकि यदि कष्ट आते हैं , तो सुख भी आते हैं !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

     जीवन काल में कुछ भी अपने मन से नहीं होता है। जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है, उद्देश्य कुछ भी हो गलत कुछ नहीं होता है। वास्तविक हकीकत यही है। घटनाचक्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से होता है, हम कोशिश करते रहते है, अकारण कुछ भी नहीं हो, हम अपने लक्ष्य से भटक भी जाते है, किन्तु कुछ भी गलत नहीं होता, हो सकता है, हमारे लक्ष्य से विपरीत कुछ अच्छा संकेत आने वाला हो और यहीं हमारे जीवन को अन्तिम लक्ष्य की ओर पहुंचाना चाहता हो.....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

      बालाघाट - मध्यप्रदेश

     जीवन अनुभवों की एक सतत यात्रा है। इसमें घटने वाली हर घटना छोटी हो या बड़ी, सुखद हो या दुखद अपने भीतर कोई न कोई कारण और संकेत समेटे होती है। कई बार उस समय हम उसका अर्थ नहीं समझ पाते लेकिन समय के साथ वही घटना हमें कुछ सिखा जाती है। इसलिए कहा जाता है कि जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता। कभी किसी व्यक्ति से अचानक मिलना, किसी अवसर का छूट जाना, किसी अपनों का दूर हो जाना या फिर किसी अनजान राह का खुल जाना उस समय भले संयोग लगे पर बाद में वही जीवन की दिशा बदल देते हैं। कई बार असफलता हमें उस सफलता के लिए तैयार करती है जिसके लिए हम अभी परिपक्व नहीं थे। कई बार कोई ठोकर हमारे अंतर्मन में छिपे धैर्य और आत्मबल से परिचय कराती है।  “उद्देश्य कुछ भी हो, गलत कुछ भी नहीं होता।” यह विचार थोड़ा गहराई से समझने योग्य है। सिर्फ उद्देश्य अच्छा होना पर्याप्त नहीं होता उसके लिए अपनाया गया मार्ग भी सही होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति यह सोचकर किसी का दिल दुखा दे कि “मेरा इरादा गलत नहीं था” तब भी सामने वाले को पीड़ा तो होती है। यदि कोई माता-पिता बच्चे के भविष्य के नाम पर उस पर अत्यधिक दबाव डालें तो उद्देश्य भले अच्छा हो पर तरीका उसे तोड़ सकता है। इसलिए जीवन हमें यही सिखाता है कि कारण और उद्देश्य दोनों महत्वपूर्ण हैं लेकिन उनके साथ संवेदना, विवेक और सही आचरण भी उतने ही आवश्यक हैं। हाँ, इतना अवश्य है कि हर घटना हमें कुछ देकर जाती है कभी सीख, कभी अनुभव, कभी सावधानी और कभी आगे बढ़ने की नई प्रेरणा। जीवन का हर मोड़ एक संदेश है। कई बार जो हमें गलत लगता है वही आगे चलकर सही दिशा दिखा देता है और कई बार जो सही लगता है उसका परिणाम हमें सोचने पर मजबूर कर देता है। अंततः जीवन का सार यही है, कुछ भी अकारण नहीं होता पर हर उद्देश्य सही तभी माना जाएगा जब उसमें सत्य, संवेदना और मर्यादा का साथ हो। केवल मंज़िल नहीं, वहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर -  राजस्थान

      जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है उद्देश्य कुछ भी हो ग़लत नही होता प्रकृति से जुड़े रहना,हर उतार-चढ़ाव का कोई कारण होता है ! भूख लगी तो खाना खाता प्यास लगती है तो पानी पीता है ! मनोरंजन के विभिन्न तरीकों से गुजर आनंद चाहता है चाह असीमित अनियमिता संतुष्टि के भाव से जुड़े होते है !और हर कोशिश का कोई मकसद होता है ! जिसे पूरा करने किसी भी तरह से जुटा होता है !जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है हर घटना, हर मुलाकात, हर दुख-सुख के पीछे कोई न कोई कारण छिपा होता है। कुछ समझ आ जाता है,। ये कर्मफल और कारण-कार्य सिद्धांत की बात है। जिसे पूरा करना । संभव नहीं उद्देश्य कुछ भी हो, ग़लत नहीं होता इंसान जो भी उद्देश्य लेकर चलता है, वो उसके अनुभव और समझ के हिसाब से सही होता है। गलत-सही का फैसला अक्सर परिणाम और दृष्टिकोण से होता है। जो कुछ भी होता है उसके पीछे स्वीकृति का भाव: जीवन में घटने वाली बातों को स्वीकार करने की प्रेरणा होती हैं अनुभव से बात गहराई से जुड़ती है। उद्देश्य सच्चा हो, तो ग़लत नहीं होता" नियत नेक हो, तो उद्देश्य ग़लत नहीं होता अपनी जिंदगी के अनुभव से - कि हर उतार-चढ़ाव का कोई कारण रहा, और हर कोशिश का कोई मकसद होता है 

- अनीता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

     यह बात सत्य है।हर किसी का होना न होना सब पूर्व निर्धारित होता है। बिना वजह कुछ भी नहीं है।जीव का जन्म लेना,किस योनि में जन्म बिताना है,किस कुल का हिस्सा होगा,सब कुछ निर्धारित है और यह निर्धारण उसके पिछले कर्मों के आधार पर ही होता है,अत: यह कहना कुछ भी अकारण नहीं है न्यायसंगत है। प्राणी कुछ भी उद्देश्य लेकर आगे बढ़ रहा हो, उसके दृष्टिकोण से वह सही है,यह मनुष्य का अपना दृष्टिकोण है जब जैसा होता है वैसा उद्देश्य बनाता है,तो  स्वत: ही यह सामने है परिस्थिति के अनुसार, मनुष्य का लिया हुआ उद्देश्य उसके दृष्टिकोण से कभी ग़लत नहीं होता है।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

    जीवन में कुछ भी अकारण नहीं होता है उद्देश्य कुछ भी हो  गलत कुछ नहीं होता है। सच है जीवन में कभी भी कुछ अकारण नहीं होता। हर "होने"के पीछे कुछ उद्देश्य कुछ कारण छिपे होते हैं। ये प्रारब्ध की कहानी जन्मों जन्मों की कथा और थकन अपने भीतर छिपाये होती है। इंसान गलतियों का पुतला होता है - - लेकिन जब तक उनका उद्देश्य सही है वे गलत नहीं माने जायेंगे। हम अपनों से स्नेह रखते हैं - - उनका भला चाहते हैं। उनके प्रति हमारा उद्देश्य सदैव स्वस्थ एवं अच्छा होता है हाँ ये भी सच्चाई है कि कुछ ऐसी गलतफहमियां होती हैं जो हरमुमकिन कोशिश करने के बावज़ूद भी नहीं मिटती। जीवन के सफर में कुछ भी अकारण नहीं होता है। हर घटना के पीछे प्रकृति का नियम छिपा होता है। अच्छी राहें अच्छे उद्देश्य के साथ चलती है। हम सामान्य मानव कारण - - अकारण के जाल में फंस कर एक दूजे के लिए गड्ढे खोदते हैं - - अकारण ही। तात्पर्य यही कि जीवन को सार्थक सारगर्भित और अभिनंदनीय बनाने के लिये जरूरी है कि एक दूजे को समझें। जीवन के उद्देश्य से निकटता बनायें। बचपन में शिक्षक हमें जीवन के उद्देश्य से जोडते हैं बाद में जिंदगानी हमें उनकी पूर्णता की ओर मोड़ते है  - - बस इसी तरह जीवन की डोर उठती चली जाती है।

-  हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

" मेरी दृष्टि में " उद्देश्य के बिना कर्म नहीं होता है। कर्म ही जीवन यानि भाग्य का आधार है। बाकि तो सिर्फ कर्म की परिभाषा है। जो कर्म को समझने में सहायक होता है। जीवन चलता रहता है। जीवन कभी नहीं रूकता है। अतः आखिर सांस तक जीवन चलता है।

         - बीजेन्द्र जैमिनी 

       (संचालन व संपादन)


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