
आचार्य डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहरवार ' वीर ' की तीसरी पुस्तक हास्य व्यंग काव्य संकलन " परिदृश्य " प्रकाशित हुआ है। इस से पहले भी " दृष्टि महादृष्टि " व " वीर के तीर " प्रकशित हो चुके हैं। यह कवि की सफलता है। हास्य व्यंग जैसी विधा के मालिक हैं। ये कवि सम्मेलन में नि:शुल्क भाग लेते हैं। जब कि हास्य व्यंग के कवि मोटी - मोदी रकम कवि सम्मेलन के नाम पर वसूलते हैं। ऐसे कवि की पुस्तक आना कोई छोटी बात नहीं है। परिदृश्य में बहुत कुछ दिया है। कविताओं में उपमा का प्रयोग बहुत अच्छे ढंग से किया है। भाषा बिल्कुल साधारण है। कहीं भी कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया है। फिर भी सुन्दर काव्य रचनाओं का पढ़ने का आनन्द ले सकते हैं । रावण जैसे व्यक्ति का प्रयोग किया गया है। जो साधारण जनता के प्रमुख किरदार में से एक है। पितृ जैसे शब्दों का प्रयोग भी अपने आप में बहुत कुछ बोलता है। यानि प्रतिदिन की जीवन शैली में लिखी कविताएं शामिल है।
कवि जैमिनी अकादमी से लगभग तीस साल से जुड़े हैं। समारोह में पानीपत भी आयें है। कई बार बड़े - बड़े सम्मान से सम्मानित भी किया है। अब सब कुछ जैमिनी अकादमी ने डिजिटल कर दिया है। जिससे देश विदेश से जुड़ने का मौका मिला है। आर्थिक समस्या से लगभग छूटकारा मिल गया है।सिर्फ परिश्रम की आवश्यकता रहती है। जैमिनी अकादमी इस से कभी पीछे नहीं रहीं है। यही सफलता का राज़ है।
- बीजेन्द्र जैमिनी
( पत्रकार , लेखक व संपादक)
प्रकाशक
इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान
बालाघाट - मध्यप्रदेश
संस्करण : 2026
मूल्य : 151/= रुपए
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