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सरकार की सार्थकता : गंठबंधन में या बहुमत में

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         चुनाव का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है । हर कोई सरकार के बनने का इंतज़ार कर रहा है । सरकार बहुमत होगी या गठबंधन की .... ? वोट तो जनता देती है फिर बहुमत भी जनता की देने है । वैसे भी लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सरकार की सार्थकता स्पष्ट करता है ।         देखते है जैमिनी अकादमी की परिचर्चा में कौन - कौन शामिल होते है :-                 नवी मुम्बई - महाराष्ट्र से अलका पाण्डेय लिखती है कि बहुमत वाली सरकार पर ही जनता भरोसा करती है ! गठबंधन वाली सरकार कभी भी गिराई जा सकती है !  बहुमत वाली सरकार अपने निर्णय ले सकती है आईये देखते है । बहुमत की सरकार के पास अपने प्रस्ताव पारित कराने के सबसे ज्यादा संभावनाएँ होती हैं, और इनके विधेयक कभी कभार ही सदन में हारते हैं।[1] इसकी तुलना में एक अल्पमत की सरकार को अपने विधेयक पारित कराने और अपनी बात मनवाने के लिये लगातार साथी और विरोधी दलों से मोल-भाव करते रहना पड़ता है। ऐसे में भ्रष्टाचार की संभावनाएँ बलवती हो जाती हैं।     ...

क्या भारतीय प्रधानमन्त्री का चुनाव जनता द्वारा होना चाहिए और क्यों

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           भारत में प्रधानमंत्री का चुनाव जनता द्वारा नहीं होता है बल्कि जनता द्वारा चुने सासंंद द्वारा होता है । जनता कभी भी प्रधानमंत्री को नहीं चुनती है । इसी विषय को लेकर आज " जैमिनी अकादमी " ने परिचर्चा  का आयोजन किया है । जो विचार आये है उन्हें पेश करते हैं :- जबलपुर - मध्यप्रदेश से विवेक रंजन श्रीवास्तव लिखते है कि भारतीय संविधान दुनिया के श्रेष्ठ संविधान में से एक  है क्योंकि हमने अनेक देशों की राज्य व्यवस्थाओं के अध्ययन के बाद इसे तैयार किया है । जहां अमेरिका में राष्ट्रपति में ही सारी वैधानिक ताकत सन्नहित होती है वही हमारे देश मे यह ताकत प्रधानमंत्री के पास है किंतु वह राष्ट्रपति के नाम पर कार्य करता है । वर्तमान में हमारे यहां प्रधानमंत्री सीधे नही चुना जाता , सबसे बड़े संसदीय दल का नेता जनता के अप्रत्यक्ष वोट  से  प्रधानमंत्री चुना जाता है ।अनेक बार व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षमता  उसे पद से अधिक महत्वपूर्ण बना देती है । इन्दिरा गांधी ,और नरेंद्र मोदी हमारे ऐसे ही प्रधानमंत्री हुए हैं। इन्हें उनकी पार्टियों ने चुनाव स...

लोकसभा चुनाव - 2019 से जनता की उम्मीदें

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देंश में चुनाव का वातावरण तैयार है । सभी की अपनी उम्मीदें है । उम्मीदें को ध्यान में रखा कर जैमिनी अकादमी ने इस परिचर्चा का आयोजन रखा है । बिजली , पानी , सड़कें , शिक्षा , स्वास्थ्य , युवा रोजगार आदि उम्मीदें हैंं फिर भी जनता की आवाज के आगे  कुछ भी हो सकता है । आये जनता की उम्मीदें भी देखें :-           इंदौर - मध्यप्रदेश से सतीश राठी लिखते है कि जनता जनार्दन की सेवा के लिए यदि सरकार आती है तो उसे सारे जन के लिए काम करना है, किसी जाति विशेष, किसी धर्म विशेष या किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं ।अब हम किसानों की ही बात कर ले । किसान की फसल कितनी भी अच्छी लग जाए ,रोने की उसकी आदत है और चुप कराने की सरकार की । इसमें गरीब किसान को नहीं मिलता है ,अमीर किसान ने इस तरह की व्यवस्थाएं जमा रखी हैं कि उसी का फायदा होता है। इसको एक बार पुनः देखा जाना चाहिए, और किसान के लिए अच्छी खेती के संसाधनों की व्यवस्था, उसकी फसल के लिए उचित दाम पर विक्रय के लिए व्यवस्था होना चाहिए। इसी प्रकार आरक्षण एक मुद्दा है।  अब समय आ गया है कि आर्थिक आधार पर उसे किया जाए। किसी भी...