रानी वेलु नाच्चियार स्मृति सम्मान - 2026

         जीवन में ललक से ही सफलता मिलती है। कर्म की ललक से एक से एक सफलता मिलती है। कर्म जीवन का आधार है। कर्म के बिना जीवन अधूरा है। जीवन में कर्म का संसार ही सब कुछ है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
        जिसका लक्ष्य निश्चित है और उसे प्राप्त करने के लिए अर्जुन की तरह मछली की आँख पर ही दृष्टि, समर्पण,इच्छा और लगन-ललक है और इसके साथ अपने कर्म को करने में भगीरथ श्रम है उस व्यक्ति को सफलता का वरण करके कामयाब होने से कोई शक्ति-व्यक्ति नहीं रोक सकता। ये गुण जिसमें विद्यमान हैं और कर्मसाधना की अप्रतिम योग्यता है सफलता उसका स्वयं वरण करती है और उसे सफल बनाती है अर्थात् निश्चय, लगन और कर्म का मेल ही कामयाबी की भूमिका लिखता है।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

         अगर‌ सफलता‌‌ की बात की जाए तो किसी भी‌ काम को करने की सच्ची‌  चाहत,जनून और सीखने की इच्छा व्यक्ति को सफलता की उंचाईयों तक ले जा सकती है,खासकर हम जब चुनौतियों से‌ सीखते हैं तो कभी हार नहीं सकते इसके‌ साथ साथ हमेशा कुछ  सीखने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति कभी असफल नहीं होते तो आईये आज इसी पर चर्चा करते हैं की‌ ललक है तो सफलता है,कर्म है तो कामयाबी, यह अटूट सत्य है की किसी‌ ची‌ज को पाने का जुनून और तन  मन से किया गया कर्म कभी  असफल नहीं होता बशर्ते कर्म करने की‌ सच्ची‌ चाहत, जुनून  और सीखने की ललक हो क्योंकि जब व्यक्ति ठान लेता‌ है कि कुछ करना है, तो सफलता जरूर मिलती है,इसके‌ साथ कर्म सही दिशा में हों तो हार का मतलब ही नहीं, क्योंकि मेहनत और अच्छे कर्म ही  सफलता की कुन्जी है और भाग्य कर्मों का ही परिणाम है,जब आप सही दिशा में लगातार प्रयास करते हैं तो सफलता खुद ब खुद मिलती है क्योंकि कर्म ही जीवन  का निर्माण करते हैं और आपके भविष्य को तय करते हैं  इसके साथ साथ सच्चे दिल से किया गया कर्म कभी निष्फल नहीं होता और सकारात्मक कर्म ही जीवन को बेहतर बनाते हैं, अन्त में यही कहुंगा की  कुछ करने का जुनून और सकारात्मक कर्म तथा मन  में लगन हो तो कोई भी  कार्य असंभव नहीं होता ,मनुष्य की‌ जीत अवश्य ‌होती‌ है,तभी तो कहा है मन के हारे हार है मन के जीते जीत  कहे कबीर हरि पाइये मन की ही परतीत।

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू  व कश्मीर ‌

    ललक है तो सफलता है ललक सफलता ही कामयाबी की सीढ़ी है! पर यह ललक तभी बनती है! जब इंसान अपनी नज़रो में नहीं ,लोगों की नजरों में अपना विश्वास जीत सके,ऐसी लालसा बनी रहे !यही आत्म विश्वास अलौकिक शान्ति शक्ति प्रदान करता हैं ! अपनी वाणी की मधुरता से लोगों की सुनने की ललक बनाये रखता है! जिसका  अनुसरण तीसरी पीढ़ी करती है!कर्म ही कामयाबी मानती है !खट्टे मीठे स्वाद की ललक बन । सबकी पहुँच बन ,आम जन में मशहूर हो जाते हैं! सबसे अपनी पहचान अभिवादन के साथ जयश्री राम करता है! अनजान व्यक्ति भी अपना हो जाता है , जो ललक अभिवादन के साथ जय श्री राम कहता है। जवाब में हम भी जय जय श्री राम कहे और आगे बढ़ेते हैं । यही सफलता कामयाबी कर्म को राज मानकर आगे बढ़ जाता है! सांप्रदायिकता का भाव सभी धर्म वालों के लिए समान एकता से परिपूर्ण भाव कर्म से पूरा होता है! विश्व बंधुत्वता की भावना जागृत होती हैं! तभी सफलता सुनिश्चित है!  कर्म कामयाबी का यही राज हैं ! गीता बाइबिल क़ुरान सुंदर इनकी वाणी हैं ।ये पुस्तकों में सजी हर पन्नो में ज़बानी होती हैं ।दिन हो या रात अंधेरो में टिमटिमाती रोशनी में ,अपनी कामयाबी ललक से ज्ञानदीप होती हैं ।आप दीपों भव की तरह ज्ञानवाणी किताबें हैं !

- अनिता शरद झा 

 रायपुर - छत्तीसगढ़ 

      जो कार्य मन से किया जाता है, उसमें सफलता मिलती हो। कहा भी जाता है, " असफलता  यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयास सच्चे मन से नहीं किया गया।" मन का कार्य करने में रुचि भी होती है और ललक भी। ये दोनों ही ऐसे महत्वपूर्ण कारक होते हैं जो संबंधित कार्य को पूरा होने तक मन को एकाग्र रखते हैं। वे मन को न भटकने देते हैं, न बिखरने देते और न ही टूटने देते। पूरे समय संयम,धैर्य, लगन और समर्पित भाव बनाये रखते हैं। सफलता के लिए यही महत्वपूर्ण होते हैं। ये ही प्रेरणास्रोत होते हैं।ये ही उत्साही बनाए रखते हैं। ये ही जो कार्य कराते हैं, वही विशुद्ध होता है,सार्थक होता है और अंतत: सफलता की मंजिल तक ले जाता है। सार यही कि " ललक है तो सफलता है।कर्म है तो कामयाबी है। "

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

          सच है कि हमारे भीतर सफलता की ललक होगी तो सफलता अवश्य मिलती है  - - - कर्म की लहर हमारे भीतर लहराती है तो कामयाबी अवश्य मिलती है  - - - सारी कायनात आपका साथ देती है। यह प्रतियोगिता की दुआ है जिसके भीतर जीतने का माद्दा होता है उसकी मानसिक ताकत चौगुना बढ़कर उसे जात की ओर मोड़ती है  - - - एक वरिष्ठतम कवि ने कहा है  - - 

पग पग तुम्हें मिलेगी

राहें चमक दमक की

पहचान किंतु करना है

एक सुयोग्य फलक की - -

कर्म पथ की उचित पहचान करके उन रास्तों पर कदम बढाना यह इंसान के बस में होता है। इंसान पूरी शिद्दत से पूरे मन से पूरी ललक से कर्म करे तो कायनात की हर शै उसकी सफलता की कामना करती है। ये केवल किताबी बातें नहीं हैं बल्कि एक विश्वास के साथ-साथ  संपूर्णता से महसूस की गई गवाही है अनेकों के जीवन में। जरूरत इस बात की है कि हमें अपना ध्येय और रास्तों का पता हो। अँधेरे रास्तों पर कदम बढाने से कुछ हासिल नहीं होता। उजले कर्म पथ खोजें और उन पर चलने का निरंतर प्रयास करें तो आप निःसंदेह अभेद्य राहों पर करम का साथ पायेंगे - - करम अर्थात भाग्य आपके कर्म अर्थात लक्ष्य को ढूँढ लेंगे और सफलता आपके कदम चूमेगी। कामयाबी आपको सम्मान दिलायेगी।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

यह पंक्तियाँ अत्यंत सारगर्भित और जीवन-दर्शन से जुड़ी हुई हैं। “ललक है तो सफलता है”यह पंक्ति बताती है कि सफलता का पहला बीज ललक —अर्थात् हमारे भीतर की तीव्र इच्छा, लक्ष्य के प्रति सच्ची तड़प है। बिना ललक के जीवन ठहराव में बदल जाता है। जब मन में कुछ कर गुजरने की आग होती है, तभी व्यक्ति बाधाओं से टकराने का साहस जुटा पाता है। ललक व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

“कर्म है तो कामयाबी है”

यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि केवल इच्छा पर्याप्त नहीं, उसे कर्म का आधार चाहिए। निरंतर परिश्रम, अनुशासन और ईमानदारी से किया गया कर्म ही ललक को वास्तविक रूप देता है। कर्म के बिना ललक अधूरी है, और कर्म के साथ ललक दिशा पा लेती है।

समग्र निष्कर्ष । इन दोनों पंक्तियों में जीवन की सफलता-सूत्र छिपा है—

ललक लक्ष्य तय करती है और

कर्म उसे प्राप्त करने का मार्ग बनाता है।

अतः कहा जा सकता है कि जहाँ ललक और कर्म का संगम होता है, वहीं सफलता और कामयाबी स्थायी रूप लेती है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

       ललक है तो सफलता है कर्म है तो कामयाबी है।यह सच है कि यदि मनुष्य कर्मशील है और उसके कर्म  सही मार्ग पर चल रहे हैं तो कामयाबी निश्चित है। मनुष्य की सफलता उसकी इच्छा शक्ति पर निर्भर है।उसने जितने ही  लगन के साथ प्रयास किया होगा, सफलता भी उतने ही समीप आएगी। कर्म में मन का साथ होना अर्थात पूरी जतन से कर्म करना उसे कामयाबी की राह दिखाती है और तन का हर क्षण ही अपने लक्ष्य को अंजाम देने की चेष्टा उसकी उत्सुकता को दर्शाता है,जहाँ मनुष्य चाहे लेता है।राह तो मिल ही जाती है।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " ललक से लेकर कामयाबी तक का सफ़र सिर्फ कर्म पर आधारित है। कर्म जीवन में रीढ़ की हड्डी के समान है। जो कर्म के प्रति ईमानदारी को बरतने की आवश्यकता होती है। यही जीवन में कर्म का महत्व स्पष्ट करता है। फिर भी इंसान कर्म से भाग खड़े होते हैं। ऐसे इंसान आत्महत्या करते हैं।

                - बीजेन्द्र जैमिनी 

           (संचालन व संपादन)

Comments

  1. *“ललक
    लगन है तो कामयाबी है,
    कर्म है तो सफलता है”*
    बिल्कुल सही
    ललक से लक (भाग्य)बनता है

    ललक में लक निहित है।
    किसी काम करने की चाहत हो ,मन में लगन हो तो कार्य होता है । वह कार्य ही हमारा कर्म है और कर्म से ही हमारा भाग्य बनता है जिसे कि हम लक कहते हैं
    लक और ललक है ना एक दूसरे के पूरक
    लक = लगन? हाँ भाई, आजकल तो लक भी लगन से आता है!
    लक = लगन है तो कामयाबी है
    *लक = लगन* — ये बात बहुत सच है!
    जो लोग लगन से काम करते हैं, वो अपने लिए _लक_ खुद बना लेते हैं।

    लगन = लगातार प्रयास, धैर्य, विश्वास, समय देना।
    क्योंकि जब आप एक चीज़ पर फोकस करते हैं, तो आपके लिए अवसर खुद आते हैं।
    “लगन हमें लक देती है… कर्म हमें सफलता देता है।
    लगन हमें रास्ता दिखाती है… कर्म हमें उस रास्ते पर चलाता है।”*
    ललक = शुरुआत का इंजन
    कर्म = अंत तक पहुंचाने वाली गाड़ी
    *लगन + कर्म =
    कामयाबी + सफलता*
    अंत में एक छोटा सा दोहा:
    ललक जगाओ
    > लगन लगाओ,
    कर्म कमाओ।
    लक खुद आएगा तुझे ढूंढ।
    कामयाबी तेरी होगी,
    सफलता तेरी होगी
    मंजिल तेरी होगी
    तू ही तो है उसका मुंड!_

    रंजना हरित बिजनौर

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

हिन्दी के प्रमुख लघुकथाकार ( ई - लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी

लघुकथा - 2025

दुनियां के सामने जन्मदिन