चक्रवर्ती राजगोपालाचारी स्मृति सम्मान -2025
देखा जाए मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं आंकी जाती बल्कि उसके कर्मों से ही उसकी पहचान होती है क्योंकि अच्छे कर्म ही व्यक्ति को समाज में सम्मान,आत्मसम्मान और आंतरिक शान्ति दिलाते हैं तथा कर्म ही उत्तम समय बनाते हैं और उत्तम कर्मों से ही उत्तम इंसान बनता है तो आज की चर्चा इसी बात पर करते हैं की उत्तम कर्म से ही उत्तम समय बनता हैऔर उत्तम कर्म ही उत्तम इंसान होता है,यह अटूट सत्य है की अच्छे कर्म ही समाज में अच्छी छवि बनाते हैं जिससे समाज में प्रतिष्ठता बढती है, अच्छे कर्म ही वर्तमान व भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं ,मानसिक शांति और संतोष उत्तम कर्मों की ही देन होती है तथा हमें सफलता और श्रेष्ठता की और उत्तम कर्म ही दर्शाते हैं यही नहीं अच्छे कर्म सुरक्षा के समय ढाल की तरह कार्य करते हैं तथा हमारे वर्तमान और भविष्य का निर्माण भी अच्छे कर्मों की देन है, कहने का भाव अगर हमें उत्तम इंसान बनना है तो हमारे कर्म भी उत्तम होने चाहिए हमें हर कार्य को सोच समझ कर हाथ में लेना चाहिए ताकि हम उसे अच्छे ढंग से प्रस्तुत कर सकें जिससे हर किसी का भला होना संभव हो तथा ऐसा लगे की ऐसे कार्य कोई उत्तम इंसान ही कर सकता है।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
उत्तम कर्म से उत्तम समय बनता है ! उत्तम कर्म हमे उत्तम इंसान बन अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करता है। सराहना दिल से करनी चाहिए ! हस्तक्षेप दिमाग़ समीक्षा विवेक से करने में ही समझदारी है !अन्यथा मौन ही उत्तम है ।जिसकी परिणाम सुखद अवसर पर दिखाई देते है !रिश्ते दिल से निभाए जाते है वरना दुनिया में खुदगर्ज सेहतमंद होते !उत्तम कर्म का महत्व सकारात्मक सोच हमारा जीवन सुखमय बनता है।जिससे हमे आंतरिक शांति मिलती है !और हमारा मन संतुष्ट रहता है।समाज में सम्मान मिलता है हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है उत्तम इंसान बनने के लिए नैतिक मूल्यों का पालन करना आवश्यक है।दूसरों की मदद करना जरूरी है! दूसरों की मदद करना और समाज सेवा करना उत्तम इंसान बनने के लिए आवश्यक है।सत्य और न्याय का पालन करना उत्तम इंसान बनने के लिए आवश्यक है।जनमानस में जन्मा प्रेम हैं प्रकृति की अद्भुत मिशाल हैं पुरूषो में उत्तम , पुरुषोत्तम कहलायें !रामकथा बेमिसाल हैं मानवता का पाठ सिखाते !अपनी पहचान समय बनाए कर्मों से जीवन्त बनाते है उत्तम कर्म से उत्तम समय बनता हैं सच्चे शिष्य को नम्रता प्रदान करने का स्थान गुरुचरणों में होता है ।और अहंकार सत्ता सौंदर्य का धर्म भक्ति शक्ति धन का बड़े से बड़े विश्वविजयता को नष्ट कर देता है !रावण को विद्या विशारद महापंडित कुल वंश का ज्ञान था ! रावण उच्चशिक्षित राम सुशिक्षित सत्रु सफ़ल सरल सक्षम होते है !ऐसे सत्रु बहिष्कार तिरस्कार सम्मान के अधिकारी होते है उन्हें अहंकार का ज्ञान था ।उत्तम कर्म से उत्तम इंसान होता है रावण उच्चशिक्षित राम सुशिक्षित अहंकार का ज्ञान राम को था !
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
जीवन जन्म और मरण का खेलबस नहीं है। जीवन का उद्देश्य सार्थक कर्म से है। सामाजिक जीवन में स्वयं की विशेष पहचान बनाना, जनहित के निष्ठा और निष्पक्षता से न्यायोचित कार्य कर मान-सम्मान पाना ही उत्तम जीवन गुजारना होता है। जीवन तो पशु-पक्षी भी जी लेते हैं। परंतु यह मनुष्य जीवन है। जो ईश्वर का अनुपम उपहार है। इसमें ईश्वर की मंशा निहित है। कहते हैं अनेक योनियों में जन्म लेने के बाद यह मनुष्य तन मिलता है और कर्म अच्छे रहे दोबारा ... तिबारा भी मिलता है। इसलिए कर्म को प्रधान माना गया है। कर्म से जीवन शैली का, सामाजिक स्तर का निर्धारण होता है। उत्तम कर्म होंगे तो भाग्य भी साथ देता है, जिससे उत्तम समय बनता है।अलाय-बलाय टलती है। प्रतिष्ठा बनने के साथ-साथ वह बढ़ती भी है। समाज में, परिजनों और परिवार में वह उत्तम इंसान होता है। जीवन का सार भी यही है। अत: आशय यही कि उत्तम कार्य ही वास्तव में उत्तम जीवन है। सार्थक जीवन है। सही उद्देश्य है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
सच है अच्छे कार्य करने से हमारे सब काम बन जाते हैं अच्छा समय आ जाता है। हम अपने-आप को समाज का निर्माण कर रहे अच्छे लोगों में शुमार कर सकते हैं, इसलिये सदैव स्वस्थ एवं उत्तम मानसिकता बनाये रखें। उत्तम कर्म करने वाला ही उत्कृष्ट इंसान कहलाने का हक रखता है। हम सामाजिक प्राणी अच्छे नाम के लिये ही ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना बनाने का प्रयास करते रहते है। यदि हर इंसान अपने अच्छे कार्यों का लेखा-जोखा रखे तो ईश्वर की दिखावटी भक्ति की आवश्यकता नहीं होगी, इंसान स्वयं ही ईश्वर के प्रति अपने भाव विभाव अनुभाव से परिपूरित हो जाता है। बस अच्छी राहों पर चलें अच्छै कार्य करें और समाज देश विश्व के सहयोगी इंसान बने।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
उत्तम कर्म से तो हर चीज़ उत्तम बनता है लेकिन कभी-कभी उत्तम कर्म करने से भी परिणाम उत्तम नहीं होता है. लेकिन ऐसा कभी-कभी ही होता है. समय भले उत्तम हो या न हो पर उत्तम कर्म करने से हर चीज़ ही उत्तम होता है. उत्तम कर्म से ही इंसान उत्तम होता है.इसलिए कर्म हमेशा उत्तम ही करना चाहिए. कहा गया है अच्छे काम करने मे कुछ नुकसान भी हो तो करते रहना चाहिए. नेकी कर दरिया में डाल. नेकी कर होवे हान, तब न छोड़े नेकी का बान. यानी उत्तम कार्य करने से कुछ परेशानी भी तो भी उसे करते रहना चाहिए. उससे बनता है.वर्तमान तो अच्छा होता ही है.अच्छा कर्म करने वाला ही समाज मे पूजनीय होता है, श्रद्धेय होता है. इसलिए उत्तम कर्म करते रहना चाहिए यदि सबकुछ उत्तम बनाना है.
- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
अच्छे कार्य करने से ही हमारा भविष्य और वर्तमान अच्छा बनता है, क्योंकि अच्छे कर्म ही सुख, संतोष और सफलता लाते हैं, जबकि बुरे कर्म दुःख और पछतावा देते हैं, और समय केवल चलता नहीं, बल्कि हमारे कर्मों से ही उसे बेहतर बनाना पड़ता है, जो बोते हैं वही काटते हैं, यही कर्म का अटल नियम है. अच्छा समय अपने आप नहीं आता; हमें उसे हर पल का सही उपयोग करके अपने कर्मों, सोच और व्यवहार से बनाना पड़ता है. अच्छे कर्मों का फल तुरंत या देर से, पर मिलता ज़रूर है. जैसे मेहनत का फल तुरंत मिल सकता है और बुरे कर्मों का दंड भी समय आने पर मिलता है. इसलिए यह ही अटल सत्य है कि उत्तम कर्म से ही उत्तम इंसान बनता है.
- लीला तिवानी
सम्प्रति -ऑस्ट्रेलिया
उत्तम कर्म वह परमशक्ति है जो मनुष्य के जीवन के हर अंधकार को मिटाकर उसे उजले, गर्वीले और समर्थ समय की ओर ले जाती है। मनुष्य के चरित्र की दृढ़ता, उसकी पहचान की महत्ता, और उसके भविष्य की चमक—तीनों का आधार केवल और केवल उसके कर्मों की शुचिता पर टिका होता है। भाग्य की रेखाएँ चाहे धुंधली हो जाएँ, परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठोर क्यों न हों, उत्तम कर्म की अग्नि किसी भी धुंध को चीरकर अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त कर देती है। क्योंकि जो मनुष्य अपने कर्मों को ईमानदारी, निष्ठा, परिश्रम और अदम्य साहस के साथ गढ़ता है, वह न मात्र अपनी नियति बदलता है, बल्कि समाज के लिए भी मार्गदर्शक ज्योति बन जाता है। उल्लेखनीय है कि उत्तम कर्म करने वाला मनुष्य समय पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि समय स्वयं उसकी गति का अनुकरण करता है। जैसे जब कर्म सत्य का साथ दें, जब कर्म न्याय की आवाज़ बनें, जब कर्म मानवता और राष्ट्रहित के लिए समर्पित हों, तब ऐसे कर्म करने वाला व्यक्ति केवल उत्तम नहीं रहता बल्कि वह अद्वितीय, विशिष्ट और युगनिर्माता बन जाता है। ऐसे ही लोग समाज की दिशा बदलने का साहस रखते हैं, व्यवस्था को आईना दिखाने का सामर्थ्य रखते हैं, और राष्ट्र की चेतना को जगाकर जीवित रखते हैं। उनकी शक्ति कोई हथियार नहीं होती बल्कि उनकी शक्ति होती है सत्य की दृढ़ता, साहस का तेज, और उत्तम कर्म में अटूट आस्था और यह शक्ति इतनी प्रबल होती है कि किसी भी अंधकार को परास्त कर सकती है। अतः कर्म उजले हों तो जीवन दीपावली बन जाता है, और कर्म पवित्र हों तो मनुष्य स्वयं राष्ट्र का उजाला बन जाता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
उत्तम कर्म से तात्पर्य केवल अच्छे या नैतिक कर्म से नहीं है, बल्कि ऐसे कर्म से है जो सही समय पर, सही उद्देश्य के लिए और पूरी निष्ठा के साथ किया गया हो। इसमें न केवल व्यक्तिगत लाभ का ध्यान होता है, बल्कि समाज और दूसरों के भले की भी चिंता शामिल होती है उदाहरण-एक विद्यार्थी समय पर पढ़ाई करता है, कड़ी मेहनत करता है और दूसरों की मदद करता है। यही उत्तम कर्म है।एक किसान अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी से खेत में काम करता है। उसका उत्तम कर्म केवल उसका ही नहीं, समाज के लिए भी लाभकारी होता है।कर्म और समय में गहरा संबंध है। यदि कर्म उत्तम है, तो उसका फल उचित समय पर मिलता है। जीवन में कठिनाइयाँ और अवसर दोनों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कर्म सही और ईमानदार है, तो समय भी अनुकूल बनता है।उदाहरण- कोई चिकित्सक रात-रात भर अपने मरीज की सेवा करता है। उसका कर्म उत्तम है और समय आने पर उसे सम्मान और सफलता भी मिलती है।एक किशोर जो अपने जीवन में छोटे-छोटे अपराध करता है, उसके लिए समय हमेशा चुनौतीपूर्ण और समस्याओं से भरा होता है।कर्म से केवल समय नहीं बदलता, व्यक्ति का व्यक्तित्व और चरित्र भी बनता है। अच्छे कर्म इंसान को ईमानदार, दयालु, संयमी और जिम्मेदार बनाते हैं। वही व्यक्ति समाज में आदर्श बनता है।उदाहरण-एक शिक्षक जो छात्रों के लिए अतिरिक्त समय देता है, उनका मार्गदर्शन करता है, समाज में आदर्श बनता है।एक नौजवान जो अपनी छोटी-छोटी गलतियों को छोड़कर सीखने और सुधारने का प्रयास करता है, वह धीरे-धीरे उत्तम इंसान बनता है।अंततः, जीवन में सफलता और सम्मान केवल भाग्य या समय पर निर्भर नहीं करता। उत्तम कर्म ही वह आधार है जो उत्तम समय और उत्तम व्यक्तित्व दोनों का निर्माण करता है। जब हम अपने कर्मों को सही, ईमानदार और परोपकारी बनाते हैं, तो समय अपने आप हमारे अनुकूल होता है, और हम समाज में आदर्श बनते हैं। “उत्तम कर्म से जीवन के कठिन समय भी आसान बनते हैं, और कर्म ही इंसान को उत्कृष्ट बनाता है।”
- डाॅ.छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
कर्मवीर बनने के लिए उत्तम समय का इंतजार नहीं करना पड़ता, स्वयं समय का सदुपयोग करके अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना पड़ता है। उत्तम कर्म से उत्तम समय बनता है, उत्तम कर्म से उत्तम इंसान होता है। यही सत्य की खोज और अपनी पहचान बनाता है। हम उत्तम इंसान बनने के लिए हर समय इधर से उधर भागते रहते है, हम समय पास करते है, अपने शरीर को थकाते है, जिनके साथ हम अपना समय व्यतीत करते है, वे हमारा उपहास बनाते है, आनंद लेते है। एक तो हमारा धन और समय व्यय होता है। लेकिन हम इसे उत्तम कर्म नहीं कह सकते है। हमें प्रतिदिन उत्तम कर्म करना चाहिए, तभी हम उत्तम समय और उत्तम इंसान बन कर दिखा सकते है.....
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
" मेरी दृष्टि में " जीवन में कर्म ही सब कुछ है। परन्तु उत्तम कर्म अपने आप में बहुत कुछ होता है। जो जीवन की परिभाषा बदल देता है। कभी कर्म सर्वश्रेष्ठ जीवन बना देता है। कर्म से ही असम्भव से भी सम्भव कार्य होते हैं। यही कर्म की रूपरेखा तैयार होती है
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