होमी व्यारावाला स्मृति सम्मान - 2025

           जागरूकता जीवन में बहुत ही आवश्यक माना जाता है। जो जागरूक होते हैं। वह जीवन की हर समस्या का समाधान करने में सक्षम होते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
      आज की स्थिति को देखते हुए इस हकीकत को मानकर चलना ही बुद्धिमानी है...प्रथम तो हमें अपने आप से भी , अपनी आदतों के परिणाम से भी जागरूक रहना चाहिए। यदि नशे के आदी हैं तो उसके परिणाम की जानकारी, सावधानी रखना चाहिए। अपने अधिकारों की, आसपास क्या चल रहा है उसकी जानकारी रखनी चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों, सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं इसकी जानकारी होनी चाहिए। पानी की समस्या जो है और आगे अधिक होने वाली है उसके लिए जागरूक तो रहें साथ ही जागरूकता लाएं। आज का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदुषण...इससे बचने के लिए हम क्या कर सकते हैं उसपर जागरूक होना चाहिए। जीवन में ऐसी कई समस्याएं हैं जिनके लिए जागरूक रहना और जागरूकता लाने की आवश्यकता है। प्रथम तो हमारे जीवन में रोज मर्रे की जो छोटी छोटी समस्याएं है उस पर ध्यान दें, जागरूक रहें तो  जीवन जिना संभव है  वर्ना बिना जागरूकता के जीवन असंभव है।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

     वर्तमान समय में यह वाक्य केवल एक उपदेश नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का मूल मंत्र है। क्योंकि जिस समाज के नागरिक हर क्षण जागरूक रहते हैं, वहाँ न केवल समस्याएँ कम होती हैं, बल्कि न्याय, विकास और सुरक्षा अपने-आप सुनिश्चित हो जाते हैं। स्पष्ट रूप से कहें तो जागरूकता ही वह शक्ति है जो भ्रष्टाचार को चुनौती देती है, अन्याय पर प्रश्न उठाती है, प्रशासन और व्यवस्था को जिम्मेदार बनाती है और नागरिक को स्वयं अपने अधिकारों व कर्तव्यों का प्रहरी बना देती है। यही नहीं बल्कि मानवीय जागरूकता अधिवक्ताओं एवं न्यायाधीशों को भी जागरूकता का पाठ पढ़ा देती है कि मात्र एलएलबी, एलएलएम अथवा विधि में विशेषज्ञता की परीक्षा उत्तीर्ण कर बार एसोसिएशन अथवा काउंसिल से पंजिकरण प्राप्त कर लेने से ही "विद्वान" नहीं बन जाते हैं। कहने का अभिप्राय यह है कि जागरूकता स्वयं सिद्ध करती है कि कौन विद्वान हैं और कौन विद्वता का ढोंग कर रहे हैं? उल्लेखनीय है आज भारत को ऐसे ही जागृत नागरिकों की आवश्यकता है जो सजग भी हों और साहसी भी, जो राष्ट्रहित के लिए प्रतिदिन एक जिम्मेदार कदम उठाएँ। जागरूक व्यक्ति कभी दिशाहीन नहीं होता, क्योंकि उसकी आँखें खुली रहती हैं, विचार स्पष्ट रहते हैं और निष्ठा अटूट। अतः, जागरूकता मात्र एक गुण नहीं बल्कि राष्ट्र का कवच है। अन्ततः कहना अनिवार्य है कि यदि प्रत्येक भारतीय प्रतिदिन जागरूक होकर एक पग आगे बढ़े, तो यह देश अदम्य शक्ति के साथ नई ऊँचाइयों को छू सकता है। 

 - डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर

          यह बात शत प्रतिशत सही है कि मानव जीवन की हर अवस्था में हर कदम पर जागरूकता बहुत जरूरी है अन्यथा सचेत हुए बिना लापरवाही करते रहे तो पल-पल जीवन जीना दूभर हो जाएगा। अतः प्रथमत: व्यक्तिगत रूप से दैनिक जीवन के सभी कार्यक्षेत्रों घर या बाहर सभी में हर चीज, स्थिति, तथ्यों, क्रियाकलापों के बारे में जानकारी रखने या सचेत रहना अति आवश्यक है नहीं तो हर कदम बिना बिचारे कष्टप्रद ऊहापोह से भरा होगा जहाॅ सुखद सफलतम जीवन जीना असम्भव होगा ।ऐसे ही सामाजिक, राजनीतिक जीवन में भी सभी घटनाओं की जानकारी के प्रति सतर्क तथा सूचना देने में भी जागरूक रहना जरूरी हैं ( जैसे इन दिनों S.i.R की सही सूचनाएं देना ) । हम सामाजिक प्राणी हैं इसलिए दूसरों के विचारों दृष्टिकोण और उनके प्रति हमारा समयोचित आदर, स्नेह,सहानुभूति के व्यवहारों के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है जिससे आपस में विषम स्थितियों में सहायक हो सकें। वर्तमान समय वैसे भी चुनौतियों से भरा हुआ है ।अतः जीवन की हर घटना, आसपास, दूरस्थ या रोजमर्रा की जिंदगी में वातावरण के प्रति और घटनाओं के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है । वैसे भी कहा गया है "जो जागे सो पावे । जो सोवे सो खोवे "।

- डाॅ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

       हाँ! जीवन में हर कदम पर जागरुकता जरूरी है.चाहे आप राह चलते हुए हों या फिर घर में बैठे हों. यदि जागरूक नहीं रहेंगे तो कहीं भी कभी भी कोई घटना घट सकती है. राह चलते कोई धक्का मार सकता है  या आपका कोई बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है. आजकल जो जागरूक नहीं रहता सुनने में आता है उसका सबकुछ गायब हो जाता है. घर,परिवार, पास-पड़ोस, समाज, देश हर जगह जागरूकता जरूरी है. जागरूक नहीं रहने से पड़ोसी ही आपका सबकुछ ले लेगा. अगर सैनिक जागरूक हो कर सीमा पर ध्यान न दें तो दुश्मन सीमा में घुस जाएगा या कुछ हिस्सा दखल कर लेगा. इसलिए जागरूकता हर जगह जरूरी है. जागरूकता के बिना जीवन जीना असंभव हो जाएगा. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

        जागरूकता जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है. जागरूकता ही हर कदम पर हमारा साथ देती है. हारना कोई भी नहीं चाहता लेकिन जहाँ जरा-सी नजर चूकी कि हम जीवन की बाजी हार बैठते हैं. सतर्कता और समझ के बिना जीवन अधूरा और मुश्किल है, क्योंकि जागरूकता हमें सही-गलत पहचानने, खुद को और परिस्थितियों को समझने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करती है; यह न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि सामाजिक उत्थान और सकारात्मक बदलाव के लिए भी आवश्यक है. व्यक्तिगत विकास क लिए, सही-गलत के बोध के लिए, चुनौतियों का सामना करने के लिए, सामाजिक प्रगति के लिए जागरूकता जरूरी है. जागरूकता के बिना जीवन वास्तव में असंभव हो जाता है, क्योंकि हम बिना समझे-बूझे भटकते रहेंगे और कोई प्रगति नहीं कर पाएंगे.जागरूक न रहना अज्ञानता और भटकाव की ओर ले जाता है, जहाँ व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों और आसपास की दुनिया से अनजान रह जाता है.जागरूकता जीवन का वह प्रकाश है जो हमें हर मोड़ पर सही दिशा दिखाता है और हमें एक पूर्ण, सार्थक जीवन जीने में सक्षम बनाता है. सच तो यह है कि जागरूकता के बिना जीवन ही असंभव है इसलिए जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है. 

 - लीला तिवानी

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

     जीवन को प्रभावशाली बनाने के परिप्रेक्ष्य में हर कदम पर जागरूकता होना जरूरी रहता है, तभी प्रभावित करने के लिए श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है। हर कदम पर जागरूकता जरूरी है, जागरूकता के बिना जीवन असम्भव है। यह कटु सत्य और अनुभव वैचारिकता को बल मिलता है। अगर हम अपने कार्यों के प्रति जागरूक नहीं है, तो असफलता निश्चित ही हमारे द्वार खड़ी रहेगी और हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता रहेगा। जरूरी नहीं है, हमारी आने वाली पीढ़ियाँ हमारे वंश को स्थायित्व प्रदान करने में योगदान दें। अपार धन सम्पदा भी किसी काम की नहीं रहती। इसलिए जागरूक के बिना हम असहाय औपचारिक तौर पर पंगु है.....?

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

          बालाघाट - मध्यप्रदेश

        हर कदम पर जागरूकता जरूरी हैं !भारतीय संविधान की सटीकता और युवाओं के लिए संविधान के प्रति जागरूकता की आवश्यकता का देश के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण है । विकसित भारत की जड़ को सभ्यता संस्कृति को संस्कार की ज़मीन के साथ आधुनिकता से जोड़ कर आगे बढ़ने प्रेरित करना है! जागरूकता के बिना जीना संभव है श्रम को नियोजित कर साधन संपन्न करना  ही व्यवस्था  को साधन संपन्न समृद्धि बनाता है परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था हर कदम पर जागरूकता जरूरी है जिसके बिना जीवन असंभव है !, क्योंकि जागरूकता ही हमें अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने में मदद करती है।महत्व  को समझ सही निर्णय लेने में मदद करती है और हमें गलत निर्णयों से बचाती है।और हमें अपने अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम बनाता है।जागरूकता परिवर्तन को बढ़ावा देती है और हमें अपने जीवन में सुधार लाने में मदद करती है।जागरूकता के बिना जीनाअज्ञानता की ओर ले जाता है, जिससे जीवन में गलत निर्णय असफलता की ओर ले जाता है, जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाते जिससे जीवन में दुख और असंतुष्टि का अनुभव करते हैं मन में विश्वास जागरूकता की राह जगाना है  धुँधली होती तस्वीर में उजाले की रोशनी भर जाना हैं पानी की पड़ती बुँदो में इन्द्रधनुषी रंगों से नये दिन रातों को जीवन्त बनाना है । 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

       सावधानी हटी दुर्घटना घटी यह बात जीवन में हर पल हर कदम पर लागू होती है इसीलिए कहा गया है कि जागरुकता के बिना जीवन असंभव है। अब यह जागरूक होना जरूरी क्यों है इस पर विचार करें। वर्तमान समय में जब सांस लेने को शुद्ध वायु नहीं, पीने को शुद्ध पानी नहीं। खाने पीने की वस्तुओं में घोर मिलावट हो रही है। मिलावट का इतना बड़ा असर है कि दवाइयों में  भी मिलावट हो रही है। कीटनाशकों में कीड़े पड़ने की बात होती है तो हर कदम पर सावधान रहना जरूरी है। मोबाइल युग में किसी भी एक्टिविटी से कब कितना नुक़सान हो जाएं कह नहीं सकते।एक कॉल ही जीवनभर की कमाई को ले जाती है। एक ओटीपी देना या एक फाइल अपलोड करना ही कितना आत्मघाती हो सकता है सब जानते हैं तो हर कदम पर जागरुकता जरूरी है। जागरूकता जरूरी है बीमार न पड़े, बीमार पड़े तो सही इलाज मिल जाए।फंस न जाएं माफियाओं के जाल में।जो जरा सी दिक्कत में हार्ट सर्जरी कर देते हैं जबकि समस्या कुछ और ही होती है। जागरूकता जरूरी है बच्चे का एडमिशन कराने में,कि संस्थान कहीं फर्जी या गैरमान्यता प्राप्त तो नहीं। जागरूकता जरूरी है संबंधों में, रिश्ते जोड़ने में, विवाह शादी में। जागरूकता जरूरी है खरीदारी में और कुछ बेचने में भी।तो इस मिलावटी, बनावटी और दिखावटी युग में जागरूकता और सावधानी बहुत जरूरी है।

- डॉ. अनिल शर्मा ' अनिल '

   धामपुर - उत्तर प्रदेश 

        प्रतिवर्ष 31 अक्तूबर से सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जाता है और अपेक्षित होता है कि वह पूरा सप्ताह अपने साथ सतर्कता और जागरूकता अभियान ले कर चले। आज इस बढ़िया विषय पर विवेचन करने का अपना ही आनंद है। सिर्फ़ देश समाज या घर तक ही सीमित नहीं है यह संदेश। इंसान को अपने आप में इस संदेश को भीतर तक बसा लेना चाहिए तभी "जियो और जीने दो" का सिद्धांत भी सही तरह से लागू होगा। हम जागरूक  होंगे तो परिवार ही नहीं - - हमारे आसपास के हर जाने - अनजाने लोग लाभान्वित होंगे। अपने आस-पास घटनेवाली घटनाएं हमें नई दृष्टि देती हैं। सोचने को मजबूर करती हैं और हम अपना समाज ऋण चुकाते हैं। यदि सतर्क न रहें तो कई धोखे हमारा इंतजार करते रहते हैं। आप राशन की दुकान से लेकर रहनेवाले मकान तक धोखे का शिकार हो सकते हैं। सीधा-सीधा मन इतनी गहराई से सोच नहीं पाता जितनी शिद्दत से आज के जमाने में लोग कैंची लिए बैठे रहते हैं आपको काटने के लिये। इसलिये शहर समाज और देश के स्तर तक जागरूक रहना है।

- हेमलता मिश्र मानवी 

 नागपुर - महाराष्ट्र 

       जीवन को सफलता की ओर ले जाने के लिए सजगता सबसे पहला कदम माना गया है, जीवन तभी सफल होता है जब हम निरंतर प्रयास करते हुए आगे बढ़े और हर कदम हमारा पूर्ण जागरूकता के साथ- सजगता के साथ रखें। वर्तमान परिस्थितिया पूर्ण रूप से विपरीत है वर्तमान में किसी पर भरोसा करना कभी भी दुखदायक हो सकता है।भूतकाल में जो विश्वास किया जा सकता था उसके ठीक विपरीत परिस्थितियों वर्तमान में है और इन हालातो में हर कदम  फुक- फुक कर रखने की है।

- रविंद्र जैन रूपम 

 धार - मध्य प्रदेश

       बिलकुल सही बात है। हमें सदैव जाग्रत और सचेत रहना चाहिए। हर कदम और  हर समय व्यक्ति को अपनी आंखें और कान खुली रखनी  चाहिए यानी सचेत । आजकल तो पता नहीं कब कौन धोखा किस रूप में दे दे। अतः जागरूकता हमारे  जीवन में बहुत अहम् भूमिका निभाती है। जागरूक और सचेत रहना अति आवश्यक है। इसके बिना जीवन में आगे बढ़ने के लिए।

- डॉ पूनम देवा 

पटना - बिहार 

        समय ने करवट ली है। वर्तमान में इतनी ऊहापोह है, इतनी खींचतान है, इतनी मारामारी है कि संघर्ष जैसे चरम पर है।  सुबह आँख खुलने से लेकर रात में आँख लगने तक हम अपने दैनिक जीवन में इतने उतार-चढ़ाव देखते हैं, हमें इतने टकराव का सामना करना पड़ता है, इतना सजग रहना पड़ता है कि मानो जैसे 'नजरें हटीं और दुर्घटना घटी। ' हमारे बीच के पुरानी पीढ़ी यानी बुजुर्गों का ऐसा मानना है कि पहले को लोग जुबान के पक्के होते थे। नैतिकता को मानते थे। जिम्मेदारी समझते थे। अब ऐसे लोग कम होते जा रहे हैं। कौन, कब, कहाँ धोखा दे जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में हर समय सावधान और जागरूक रहने की जरूरत है। आज के समय  यह बहुत जरूरी है, वरना हमारे लुट-पिट जाने में देर नहीं लगेगी। किसकी मीठी बोली में, कड़वाहट मिली है, किसके भरोसे में छल निहित है।यह घटना होने के बाद ही पता लगता है। अत: कोई भी कार्य हो, लेन-देन हो, सोच - समझकर करना निहायत जरूरी है वह भी ठोक-बजाकर। ऐसा नहीं है कि सभी लोग बुरे हैं, अविश्वासी हैं।अच्छे लोग भी यहां हैं। परंतु कहावत है न, ' गेंहूं के साथ घुन भी पिसता है।' अब यह उल्टा हो गया है,अब घुन के साथ गेंहूं पिस रहा है।' धोखेबाज इतने हो गए हैं कि ईमानदार भी शक के घेरे में आ गए हैं।  यानी " दूध का जला, छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। " आज की स्थिति भी वैसी ही हो गई है। अत: आशय का सार यही कि ऐसा कहना कोई गलत नहीं होगा कि " जागरूक रहना बहुत जरूरी है। जागरूकता के बिना जीवन असम्भव है। "

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

    यह पंक्तियाँ जीवन के मूल सत्य को बड़े सरल और प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त करती हैं। जागरूकता केवल किसी जानकारी का होना नहीं है, बल्कि अपने विचारों, भावनाओं, कर्मों और परिवेश के प्रति सजग रहने की कला है। जागरूकता जीवन को दिशा देती है। जब हम सजग होते हैं, तब हम सोच-समझकर निर्णय लेते हैं। जल्दबाज़ी, भ्रम या दूसरों के प्रभाव में बहने की संभावना घट जाती है।सुरक्षा के लिए— सड़क पर चलने से लेकर ऑनलाइन गतिविधियों तक, सावधानी जीवन बचाती है।रिश्तों में— जागरूकता से हम दूसरों की भावनाएँ समझते हैं और संबंध मजबूत होते हैं।काम में— ध्यान और सजगता से गुणवत्ता बढ़ती है और गलतियाँ कम होती हैं।स्वास्थ्य में— आहार, नींद और मानसिक स्थिति पर ध्यान देना जीवनशैली सुधरता है।जागरूकता का अभाव जीवन को अस्त-व्यस्त कर देता है बिना जागरूकता के हम आदतों के गुलाम बन जाते हैं,बाहरी परिस्थितियाँ हमारा जीवन नियंत्रित करने लगती हैं, गलत निर्णयों का जोखिम बढ़ जाता है।इसलिए ही कहा गया है कि जागरूकता के बिना जीवन असंभव है, क्योंकि बिना सजगता के जीवन का संतुलन टूट जाता है।अतः धीमे चलें और सोचें, जल्दबाज़ी में जागरूकता खो जाती है। मन को वर्तमान में रखें— वर्तमान क्षण ही सजगता का आधार है।आत्मपरीक्षण करें— दिन में 5 मिनट अपने विचारों और कर्मों पर नजर डालें।कृतज्ञता का अभ्यास— यह मन को शांत और केंद्रित करता है।जागरूकता केवल एक गुण नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जो व्यक्ति हर कदम पर सजग रहता है, वह न सिर्फ गलतियों से बचता है बल्कि पूर्ण, संतुलित और सार्थक जीवन जीता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

    देखा‌ जाए  कोई भी कार्य  हाथ  लेने  से पहले उसका ज्ञान होना जरूरी है  ताकि कार्य पूर्ण तरीके से पूरी तरह सफल  हो सके तथा  हम अपने लक्ष्य  को गहन से‌ हासिल कर सकें यह  तभी संभव है जब हमें उस  विषय में पूरी जागरूकता होगी जिस विषय को हमने हाथ में लिया होगा,तो आईये आज इसी‌ विषय पर ‌चर्चा करते हैं की हर कदम पर जागरूकता जरूरी है और जागरूकता के बिना जीवन संभव नहीं, मेरा मत है कि जागरूकता ही हमें अपने विचारों, भावनाओं ,कार्यों और आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है जिससे हम ज़िंदगी के हर खित्ते में कामयाबी हासिल कर सकते हैं, यही  हमें चुनौतियों का सामना  करने लगातार सीखने के लिये प्रेरित करती है, देखा जाए सचेत और आत्म जागरूक होकर जीना जरूरी है इसके बिना  हम अपने लक्ष्यों,भावनाओं और कार्यों को  ठीक से समझ नहीं पाते क्योंकि जागरूकता ही हमें अपनी खुशियों ,कमियों,आदतों और विचारों के पीछे के कारणों  को समझने में मदद करती है इससे हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं तथा दुसरों के प्रति सहानुभूति और बेहतर संबंध बनाते हैं जिससे मजबूत रिश्ते बनते हैं जिससे सकारात्मक बदलाव आते हैं अन्त में यही कहुंगा की  हर कदम पर जागरूकता जरूरी है क्योंकि जागरूकता के बगैर कोई भी कार्य  पूर्ण रूप  से संभव नहीं है  इसलिए कोई भी कार्य हाथ  लेने से पहले हमें उसके लिए जागरूकता की जरूरत होती है।

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर 

        जीवन के हर क़दम,  हर क्षेत्र में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। हम क्या कर रहे हैं, क्या करना चाहते हैं भविष्य को लेकर हमारी क्या योजनाएं हैं,  यहाँ तक की खाना खाते हुए, रास्ता चलते, उसे पहचानते हुए प्रत्येक साँस के साथ जागरूक रहना महत्वपूर्ण है। दोस्तों का चयन, काम, दफ़्तर का चयन,  हर समय, हर काम  में जागरूक रहना आवश्यक है। हमें अपनी सोच,  अपने कर्म , अपने शब्दों के चयन के प्रति भी जागरूक रहना आवश्यक है । क्यों की इन सब का हमारे जीवन, हमारे भविष्य को बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है। राह चलते भी अगर हम जागरूक रहे तो ग़लत व्यक्तियों, ग़लत संगत व अन्य दुर्घटनाओं से बच सकते हैं । बिना जागरूकता के जीवन असंभव नहीं तो कठिन अवश्य है।

 - रेनू चौहान 

  नई दिल्ली

" मेरी दृष्टि में " जागरूकता बहुत अच्छी स्थिति को कहा जाता है। जिससे बहुत कुछ पाया जा सकता है। जिससे सकारात्मक सोच की स्थिति उत्पन्न होती है। जो  आध्यात्मिक की ओर लें जाता है। वह जीवन में बहुत आगे तक जाता है। 

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)

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