बाबा रामसिंह कूका स्मृति सम्मान - 2026
उद्देश्य के बिना जीवन, निरर्थक और व्यर्थ ही जानिए। निरुद्देश्य व्यक्ति, प्राणी स्वयं के साथ साथ समाज और राष्ट्र के लिए भी घातक सिद्ध होता है। नकारात्मकता उसके विचारों में ही नहीं व्यवहार में भी भर जाती है। इसके चलते उदासीनता इतनी प्रभावी हो जाती है कि वह उसे जिंदा लाश भी कह सकते हैं। निरुद्देश्य इंसान दिशाहीन भटकाव पूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को खो देता है। अन्य लोग उसे अपने उद्देश्यों की पूर्ति का माध्यम भी बना लेते हैं। निरुद्देश्य व्यक्ति को जानवर कहना,आप जानवर का भी अपमान मानिए। जानवर कोई भी उद्देश्यहीन नहीं होता। पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखना उनका उद्देश्य होता है, अपनी प्रजाति का विकास,खाद्य श्रृंखला को बनाए रखना आदि उनका उद्देश्य होता है। जीवन में कुछ तो उद्देश्य होना ही चाहिए।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
उद्देश्य मनुष्य के जीवन में अति आवश्यक है। जब हम इस संसार में आये हैं वह भी चौरासी लाख योनियों में से सबसे महत्वपूर्ण योनी में मनुष्य का जन्म लेकर। तो फिर प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्यों आये हैं इस संसार में? अगर आये हैं तो क्या हासिल करना चाहते हैं, यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए ।अतः ऐसा संकल्प करना जिससे हमारा व्यक्तिगत जीवन सार्थक हो। साथ ही इसमें हम समय सीमा का निर्धारण करें तब और भी अधिक अच्छा है। क्योंकि शास्त्रों में मनुष्य के जीवन की अवस्थाएं बताई जाती हैं। तो इसलिए हमें अपने जीवन का लक्ष्य अवस्थाओं के अनुरूप निश्चित कर लेना चाहिए। तब हमको उसमें कार्य की दिशा और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए निस्वार्थ कर्तव्य पालन करना उपयोगी होगा। हम जो भी लक्ष्य निर्धारित करेंगे उसमें अवश्य सफल सार्थक होंगे। जो व्यक्ति बिना उद्देश्य के जीवन जीता है, सपने तो बहुत ऊंचे होते हैं पर उनके अनुरूप कार्य करने की दिशा निर्धारित नहीं कर पाता , इसलिए उसके जीवन में भटकाव की स्थिति बनी रहती है। सामाजिक ,धार्मिक, राजनीतिक, व्यक्तिगत जीवन बिना उद्देश्यों के जीना एक जानवर के जीवन जैसा ही है।क्योंकि मात्र खाना और निरर्थक भटकना और तो इन्सानी जीवन नहीं ,पशुवत ही है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा भी है--" कुछ तो उपयुक्त करो तन को, यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो । समझो जिससे यह व्यर्थ न हो , नर हो न निराश करो मन को ।।" अतः सोद्देश्य क्रियमाण जीवन ही सफल सार्थक मानव जीवन है ।
- डाॅ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
“उद्देश्य होना आवश्यक होता है, बिना उद्देश्य इंसान जानवर होता है”—उक्त कथन मात्र एक तीखा वाक्य नहीं, बल्कि मानव जीवन के सार को उद्घाटित करने वाला दर्शन है। मनुष्य और अन्य प्राणियों में मूल अन्तर बुद्धि या देह का नहीं, बल्कि उद्देश्यबोध का है। जहाँ पशु प्रवृत्ति से जीता है, वहीं मनुष्य संकल्प से। उद्देश्य मनुष्य को दिशा देता है, उसे उत्तरदायित्व से जोड़ता है और उसे समाज, राष्ट्र तथा मानवता के प्रति जागरूक बनाता है। उद्देश्यविहीन जीवन एक भटकाव है। ऐसा जीवन केवल क्षणिक सुख, सुविधा और स्वार्थ की परिधि में सिमट जाता है। उद्देश्य के अभाव में विचार बिखरते हैं, कर्म दिशाहीन हो जाते हैं और अंततः व्यक्ति अपने ही अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा बैठता है। इसके विपरीत, उद्देश्य मनुष्य के भीतर आत्मबल जगाता है, वह कठिनाइयों में भी आशा खोज लेता है, असफलताओं में भी सीख ढूँढ लेता है। इतिहास साक्षी है कि जिन व्यक्तियों ने स्पष्ट उद्देश्य के साथ जीवन जिया, वही युग-निर्माता बने। उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं; यह सामाजिक उत्तरदायित्व का भी स्रोत है। जब व्यक्ति अपने उद्देश्य को समाज से जोड़ता है, तब उसका जीवन लोक-कल्याण का माध्यम बनता है। शिक्षक का उद्देश्य ज्ञानदान, चिकित्सक का उद्देश्य जीवन-रक्षा, सैनिक का उद्देश्य राष्ट्र-सुरक्षा है। क्योंकि इन उद्देश्यों के बिना ये भूमिकाएँ साधना नहीं केवल व्यवसाय रह जाती हैं। उद्देश्य ही कर्म को नैतिकता देता है, श्रम को गरिमा देता है और संघर्ष को अर्थ देता है। वर्तमान समय में उद्देश्य की आवश्यकता और भी प्रखर है। वह इसलिए कि उपभोक्तावाद, दिखावे और तात्कालिक लाभ की संस्कृति ने जीवन को सतही बना दिया है। परिणामस्वरूप, मानसिक तनाव, निराशा और मूल्य-क्षरण बढ़ा है। ऐसे में उद्देश्य मनुष्य के लिए आंतरिक कम्पास का काम करता है, जो उसे उचित और अनुचित के बीच भेद करना सिखाता है। उद्देश्य व्यक्ति को अनुशासन सिखाता है, आत्मसंयम देता है और उसे अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है। उद्देश्य का चयन भी विवेकपूर्ण होना चाहिए। यह नकारात्मक नहीं, रचनात्मक हो, यह विभाजनकारी नहीं, समावेशी हो, यह केवल “मैं” तक सीमित न रहे, बल्कि “हम” तक विस्तृत हो। उद्देश्य यदि न्याय, करुणा, सत्य और समानता से जुड़ा हो, तो व्यक्ति का जीवन स्वतः ही प्रेरणा बन जाता है। ऐसा उद्देश्य मनुष्य को केवल जीवित नहीं रखता, बल्कि उसे मानव बनाता है। अन्ततः, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि उद्देश्य मनुष्य की आत्मा की आवाज़ है। बिना उद्देश्य मनुष्य अपनी संभावनाओं का अपमान और अपने मौलिक कर्तव्यों अथवा मूल उत्तरदायित्वों से पलायन करता है। उद्देश्य के साथ जिया गया जीवन चाहे साधारण क्यों न हो परन्तु असाधारण प्रभाव छोड़ता है। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने जीवन का उद्देश्य पहचाने, उसे कर्म में ढाले और उसे समाज व राष्ट्र के हित से जोड़े। यही मानवता का पथ है, यही जीवन की सार्थकता है और यही राष्ट्रनिर्माण का आधार है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
खाना , पीना , सोना , समय बिताना एक आम व्यक्ति के दैनिक कार्य हैं , जो वह अपने जीवन में निभाता है जब तक वह जिंदा है !! इस आम समय सारणी से कहीं ऊपर बितानी चाहिए हमें जिंदगी !! सबके जीवन का उद्देश होना चाहिए , जिसको प्राप्त करने के लिए वह जिए , संघर्ष करे, और सफलता प्राप्त करे!! बिना उद्देश्य के जीवन अर्थहीन है , बेकार है , नीरस है ! बड़ी मुश्किल से मानव जीवन मिलता है , व इसे उद्देश्यहीन व निरर्थक नहीं बनाना चाहिए , अपितु अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर , उसे हासिल करने का प्रयत्न करना चाहिए!! जानवर और मनुष्य में कोई अंतर होना भी आवश्यक है क्योंकि जानवर उद्देश्यहीन होती है !! इस कीमती जिंदगी के मोल को पहचान , अपना उद्देश निर्धारित करके , उसे प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
जीवन में किसी भी कार्यों को सम्पादित करने के लिए उदेश्य होना अति आवश्यक प्रतीत होता है, नहीं तो अपने लक्ष्य से भटक जाता है। उदेश्य होना आवश्यक होता है, बिना उदेश्य इंसान जानवर होता है। सत्यता की झलक दिखाई देती है। इससे अच्छा तो जानवर ही होता है, जो उसकी दिनचर्या रहती है, उसी के साथ-साथ चलता रहता है। एक है, कभी-कभी आम बोलचाल में इंसान को गघा भी बोला जाता है, क्योंकि गघे जैसी हरकत करने लग जाता। प्रातःकाल से ही अपने कार्य क्षेत्र में उदेश्य होना चाहिए.....।
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
जीवन में किसी एक उदेश्य का होना अति आवश्यक है अन्यथा भकटन पीछा नहीं छोड़ती। उदेश्य की अवधारणा हमारे अस्तित्व और कार्यों का एक मूलभूत आधार बन जाती है। विशेष उदेश्य दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति के बल पर सही दिशा में सफलता पूर्वक अग्रसर होकर अपने सपनों को साकार करते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उसमें ज्ञान और विवेक है। अच्छा बुरा सोचने समझने की क्षमता है। इसके विपरीत जानवरों में यह गुण नहीं है वह केवल पेट भरने तक सीमित है। अतः मानव जीवन की सार्थकता भी यही है कि जीवन सोदेश्यपूर्ण अपनाते हुए अपने ज्ञान, विवेक, मेहनत और लगन से समाज में ऐसे कार्यों से पहचान बनाएं जो औरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनें। मानव जीवन अर्थपूर्ण है क्योंकि उदेश्य के अनुरूप पूर्णता प्राप्त करता है। जानवरों का जीवन अर्थहीन है क्योंकि उदेश्य की न तो उनको समझ है और न ही भविष्य की चिंता।इस विषय पर यह कहना भी न्यायोचित होगा कि जो व्यक्ति जीवन की सार्थकता नहीं समझते और उदेश्य हीन,लक्ष्यहीन, अर्थहीन जीवन जीते हैं वह भी जानवर की ही भान्ति है। मानव योनि पाकर जीवन की उपयोगिता,महत्त्व को समझना बहुत आवश्यक है। ईश्वर की अपार कृपा से प्राप्त यह जीवन इस प्रकार जियो कि आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायी बनें।
- शीला सिंह
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
मानव जीवन का एक उद्देश्य होना एक दम ही आवश्यक है. बिना उद्देश्य के तो मानव जीवन भर भटकता ही रहेगा. जैसे जानवर भटकते रहते हैं. उनका कोई उद्देश्य नहीं होता है. जब हमें मानव जीवन में जन्म मिला है तो इसे उद्देश्य पूर्ण जीवन में बदलना हमारा कर्तव्य बनता है. हमें अपने सामर्थ्य और क्षमता के अनुरूप अपने लिए उद्देश्य बनाना चाहिए. जिस उद्देश्य को हम पूरा कर सकें. इस दुनिया में जितने भी प्राणी है सभी तो खाते पीते हैं यहाँ तक की जानवर भी खाते पीते हैं लेकिन उनके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं होता. उनका उद्देश्य बस खाना पीना. लेकिन मानव का उद्देश्य तो आवश्यक है.नहीं तो उसकी भी गिनती जानवर में होने लगेगी.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
उद्देश्य होना जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उद्देश्य ही मनुष्य को सोचने, समझने और सही–गलत में अंतर करने की शक्ति देता है। बिना उद्देश्य के इंसान केवल अपनी इच्छाओं के पीछे चलता है, जहाँ न दिशा होती है न मर्यादा। उद्देश्य जीवन को अर्थ देता है, कर्म को मूल्य देता है और मनुष्य को पशु प्रवृत्ति से ऊपर उठाकर सृजनशील और जिम्मेदार बनाता है।
- सुनीता गुप्ता
कानपुर - उत्तर प्रदेश
देखा जाए उदेश्य पूर्ण जीवन जीने से मानसिक संतुष्टि मिलती है और उद्देश्य ही जीवन को अर्थ प्रदान करता है इसके अतिरिक्त सच्चा उदेश्य राष्ट्र सेवा, समाज सुधार तथा आत्म विकास के लिए भी हो सकता है न कि धन दौलत के लिए ही इसलिए मनुष्य को अपनी क्षमता के अनुसार एक हितकारी लक्ष्य जरूर चुनना चाहिए, तो आईये आज इसी पर चर्चा के बिषय को आगे बढाते हैं कि उदेश्य होना जरुरी है बिना उदेश्य के इंसान जानवर होता है, मेरे ख्याल में जीवन में एक स्पष्ट उदेश्य जरूरी है क्योंकि यह सफलता के मार्ग को प्राप्त करने में सहायक होता है तथा हमें प्रतिदिन प्रेरित रखता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के साथ तनाव को कम करता है इसके बिना जीवन जानवरों की तरह भटकता नजर आता है, सही मायने में उदेश्य ही मनुष्यता की पहचान है क्योंकि उदेश्य में परोपकार, सत्य , करूणा और दान, दया इत्यादि भी आते हैं जो मनुष्य की भलाई के लिए अति उत्तम हैं इसलिए केवल स्वार्थ से उठकर दुसरों के लिए जीना और अच्छे संस्कारों को अपनाना ही मनुष्य की सही पहचान है अन्त में यही कहुँगा कि जीवन का उदेश्य निस्वार्थ सेवा, अच्छी भावनाएं और मानव जीवन की साथर्कत के लिए होता है इसलिए मनुष्य को हर कार्य हमेशा लक्ष्य रख कर करना चाहिए जिसमें दुसरों का भी कल्याण हो सके, अगर सिर्फ अपने लिए ही जीवन जिया तो क्या जिया वो पशू के समान ही जीवन हो गया और ऐसे मनुष्य को पूंछ बिना पशु कहा जा सकता है इसलिए उदेश्य होना बहुत जरूरी है बिना उदेश्य के व्यक्ति जानवर ही समझा जायेगा।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
सृष्टि में जब मानव जन्म लेता है। सामाजिक परिवेश में रहकर सामाजिक प्राणी होने के नाते मानव अपना जीवन उद्देश्य लेकर ही चलता है।हर क्षेत्र में उद्देश्य परिलक्षित होता है।चाहे वो परिवार हो,समाज हो, विद्यालय हो,या कर्मक्षेत्र हो।उसकी भूमिका उद्देश्य के साथ दृष्टिगोचर होती है।पैदा होता है बच्चा माता-पिता चाहते हैं सामान्य प्रसव हो, नवजात शिशु हष्ट-पुष्ट हो,निरोगी हो,जल्दी बोलना सीखें,चलना सीखते,स्कूल जाये, होनहार विद्यार्थी हो,अच्छे नंबर लाये । मान-सम्मान मिले। परिवार का नाम रोशन करें ये उद्देश्य होता है।जो कि नितांत आवश्यक है।बिना उद्देश्य के इंसान जानवर होता है। कहने का आशय यह है कि मूक जानवर उद्देश्य विहिन होता है।बिना उद्देश्य के जीवन निरर्थक है। उद्देश्य लेकर इंसान चले तो जीवन आनंदमय व्यतीत होता है। कर्म मानव करता जाता है।उसी के अनुरूप उसे फल की प्राप्ति होती है। उद्देश्य से भटकना नहीं चाहिए।लक्ष्य बनाकर चलें गंतव्य पर की ओर कदम बढ़ाते जायें।पूरे मनोयोग से कार्य करें उद्देश्य अवश्य ही पूरे होंगे। कामयाबी हासिल होगी।
- डॉ. माधुरी त्रिपाठी
रायगढ़ - छत्तीसगढ़
जीवन में अगर एक उद्देश्य लेकर चलते हैं तो ही वह कार्य पूरा होता है वरना नहीं । उद्देश्य विहीन जीवन, जीवन न होकर सिर्फ भार होता है जिसे ढोना पड़ता है । ऐसा जीवन किसीको किसी भी मंजिल तक नहीं पहुंचा सकता । जब हम कोई उद्देश्य लेकर चलेंगे तो उसकी पूर्ति हेतु प्रयास भी करेंगे, परिश्रम भी करेंगे वरना सूखे पत्तों की तरह इधर उधर डोलकर अपनी इहलीला समाप्त कर देंगे ।यह हमें समय के सही उपयोग की ओर ले जाता है और हम अनावश्यक कार्यों में समय बर्बाद करने से बच जाते हैं । इससे हम व्यस्त रहते हैं जिसके कारण व्यर्थ के विचारों से बचे रहते हैं । शरीर और मन स्वस्थ रहते हैं । सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है । बिना उद्देश्य के जीवन, बिना पता लिखे लिफाफे के समान है जो कभी कहीं नहीं पहुंच सकता ।
- बसन्ती पंवार
जोधपुर - राजस्थान
यदि जीवन में कोई उद्देश्य ना हो तो मनुष्य और पशुओं में कोई अंतर ही ना रह जाए। बिना उद्देश्य के मनुष्य पशु समान ही हो जाता है। उद्देश्य हो तो जीवन उत्साह से भरा रहता है व नीरस नहीं हो पाता। प्रत्येक मनुष्य कोई ना कोई उद्देश्य लेकर ही पैदा होता है परंतु बहुत से लोग अपने जीवन का उद्देश्य न तो समझ पातें है और न पहचान ही पाते हैं । ऐसे मनुष्य खाना-पीना, सोना और बहुत हुआ तो पैसा कमा लेने को ही जीवने का उद्देश्य समझते हैं। ऐसे व्यक्ति अमूमन शारीरिक व मानसिक रूप से अस्वस्थ हो कर जीवन जीते नहीं अपितु घसीटते हैं। जबकि उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने वाले उत्साह, प्रसन्नता, ऊर्जा व कर्मठता से भरा एक परिपूर्ण जीवन जीते हैं। उनका जीवन सार्थक होता है। उनके लिए चुनौती पूर्ण कार्य उत्साहित करने वाले होते हैं। असंभव शब्द उनकी शब्दावली में नहीं होता। यदि जीवन में उद्देश्य हो तो कठिन से कठिन कार्य भी चुटकियों में किया जा सकता है। अतः महत्वपूर्ण है कि हम सब उद्देश्यपूर्ण, सार्थक जीवन जियें।
- रेनू चौहान
नई दिल्ली
" मेरी दृष्टि में " बिना उद्देश्य के इंसान सम्भव नहीं है । यही इंसान की वास्तविकता है । जो जन मानस की सोच को प्रभावित करता है। आगे बढ़ने में सहायक होता है। जब - जब जीवन में कठिनाई आती है तो उद्देश्य प्रभावित होता है। संघर्ष से मुकाबला होता है और रास्ता नजर आता है। यही उद्देश्य भटकते - भटकते रास्ता दिखाता है।
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