हर काम में जोखिम होता है। बिना जोखिम के किसी काम में सफलता नहीं मिलती है । काम यानि कर्म से ज्ञान मिलता है। फिर भी कर्म सर्वोच्च होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं : - कहा गया है - “उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ,न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः|” अर्थात उद्यम करने से ही सारे कार्य सफल होते हैं, केवल मनोरथ करने से कार्य नहीं होते, जैसे सोते हुए सिंह के मुख में हिरन स्वयं नहीं प्रवेश करता।जब उद्यम होता है,किसी भी तरह के कार्य में जोखिम तो होता ही है। यह जोखिम आर्थिक हो सकता है, मानसिक हो सकता है, शारीरिक हो सकता है। यह जोखिम कार्य की प्रकृति पर आधारित होता है। सफलता तभी मिलेगी जब कार्य होगा और कार्य तब होगा जब जोखिम उठाया जाये। यह भी सत्य है कि ज्ञान अनुभव से अर्जित होता है और अनुभव बिना कर्म तो होगा नहीं। इसलिए कर्म के बिना ज्ञान नहीं होगा।अब यह अलग बात है कि कर्म की प्रकृति कैसी है? अब कर्म करने में जोखिम होगा ही होगा तो जोखिम,...