ज्ञानंजन नियोगी स्मृति सम्मान - 2026

     प्राकृतिक से सब कुछ मिलता है। पेड़ - पौधे, धरती, जल, प्रकाश आदि सब कुछ संसार में है। इन सबसे संसार चलता है। ये एक - दूसरे के पूरक है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
      सही बात है पेड़ पौधे हैं तो यह धरती है । पेड़ पौधे स्वयं सजीव हैं फलते हैं, फूलते हैं ,पुष्पित होकर पल्लवित तो होते ही हैं ।साथ ही ऑक्सीजन देखकर पर्यावरण को शुद्ध और मनमोहक बनाते हैं । इनकी उपस्थिति भोजन, ईंधन आवासीय सुविधा के साथ-साथ बहुत सी जड़ी बूटियां दवाई के रूप में देकर धरतीवासियो के जीवन की रक्षा करते हैं ।जाड़ा, गर्मी ,बरसात के सुहावने मौसम का संतुलन बनाए रखने में पेड़ पौधे महत्वपूर्ण भूमिका भी  निभाते हैं । पशु- पक्षियों के जीवन को बचाने में घोंसला बनवाकर उनकी रक्षा करते हैं। जहां छायादार वृक्ष तेज गर्मी से मनुष्य को राहत देते हैं, वहीं बसंत में फूली सरसों की पौध से पूरी धरती पीली चूनर ओढ़कर सुंदर हरी-भरी होकर  सबके मन को प्रफुल्लित कर देती है। पेड़ पौधे धरती के जीवन का आधार हैं । साथ ही साथ हमारे साथ सभी कीट- पतंगे,  प्राणियों को रहने योग्य बनाते हैं। देखा जाए तो पेड़ पौधे धरती को स्वर्ग बनाते हैं । इनके कारण हमें बारिश के रूप में इकट्ठा जल नदियों, तालाबों और समुद्र से प्राप्त होता है ।धरती पर प्रकाश संश्लेषण भी इससे ही है। यह ना हो तो पृथ्वी का तापमान खतरनाक स्थिति में पहुंच जाएगा। जहां ना जल होगा, ना प्रकाश ,ना भोजन, ना आवास । यहां तक की सांस लेना भी दूभर हो जाएगा । संसार के साथ मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। 

  - डाॅ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

     पेड़-पौधों का अस्तित्व केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि धरती के जीवन का मूल आधार है। जहाँ वृक्ष हैं, वहीं मिट्टी जीवन्त है, जल सुरक्षित है और वायु शुद्ध है। पेड़ धरती की ढाल हैं, जीवन के रक्षक हैं और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार हैं। इन्हें बचाना केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि एक मौलिक कर्तव्य है, जिसका निष्ठापूर्वक पालन किए बिना किसी भी प्रकार के मौलिक अधिकारों की सार्थकता अधूरी रहती है। जब तक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होंगे, तब तक अधिकार केवल मांग बनकर रह जाएंगे, जीवन मूल्य नहीं बन पाएंगे। उल्लेखनीय है कि जल और प्रकाश केवल प्राकृतिक तत्व नहीं, बल्कि समस्त सॅंसार की चेतना और अस्तित्व की धुरी हैं। जल जीवन का प्रवाह है, संवेदनशीलता का प्रतीक है और प्रकृति के साथ हमारे सामंजस्य की पहचान है। प्रकाश केवल सूर्य का उजाला नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और नैतिक बोध का आलोक है। नागरिक का प्रथम दायित्व है कि वह जल का सॅंरक्षण करे और प्रकाश अर्थात ज्ञान व विवेक को अपने आचरण में उतारे। यही मौलिक कर्तव्यों की आत्मा है, क्योंकि कर्तव्य-पालन से ही अधिकार सुरक्षित होते हैं और समाज में संतुलन स्थापित होता है। यह कथन हमें स्पष्ट रूप से सिखाता है कि अधिकारों की अपेक्षा करने से पहले कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन अनिवार्य है। प्रकृति की रक्षा, पर्यावरण का सॅंरक्षण, जीवन के संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व है, ये सब मौलिक कर्तव्य हैं, जिनके पालन से ही सशक्त राष्ट्र, संवेदनशील समाज और न्यायपूर्ण व्यवस्था का निर्माण होता है। जो समाज पहले कर्तव्य निभाता है, वही अधिकारों का वास्तविक अधिकारी बनता है। अतः मौलिक कर्तव्यों के प्रति निष्ठा ही सच्ची देशभक्ति, जीवन्त लोकतन्त्र और स्थायी विकास की आधारशिला है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) — जम्मू और कश्मीर

     मेरी राय में यह पंक्तियाँ जीवन का गहरा सत्य कहती हैं।पेड़-पौधे धरती की साँस हैं उनसे ही हरियाली, संतुलन और जीवन संभव है। जल और प्रकाश के बिना संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती, क्योंकि इन्हीं से सृष्टि चलती है। यह संदेश हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है क्योंकि प्रकृति है, तभी भविष्य है।

 - सुनीता गुप्ता

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

        तन और मन दोनों के लिए ही स्वच्छ वातावरण की बहुत आवश्यकता होती है। जितना स्वच्छ और सुखद वातावरण होगा, हमारा तन-मन उतना ही न केवल सकारात्मक और ऊर्जावान रहेगा बल्कि स्वस्थ भी रहेगा। इसके लिए प्रकृति ने पेड़-पौधों की अनुपम सौगात भी दी है। ये मनमोहक तो होते ही हैं। हमारे लिए स्वच्छ वायु,शीतल छाया, फल-फूल,औषधि एवं अन्य उपयोगी और महत्वपूर्ण साधन और माध्यम देकर हमारे जीवन को सरस और सुखद बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। देखा जावे तो यह धरती  प्रथम  पेड़-पौधों की है। प्राणी का नंबर तो दूसरा है। आज जहां हम बसे हैं, इतिहास खंगाला जावे तो पहले यहाँ निश्चित ही पेड़-पौधे ही होंगे।अब बात करते हैं जीवन के अन्य नैसर्गिक आवश्यकताओं की बात की जावे तो इसमें जल और प्रकाश भी मुख्य हैं और ये दो तो इतने महत्वपूर्ण हैं कि इनके बिना तो  पेड़-पौधे भी जीवित नहीं रह सकते। यानी कि प्राणी हों या वनस्पति सभी के जीवन के लिए ये दोनों नितांत आवश्यक हैं।  सार यह कि इन संदर्भ में यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि " पेड़-पौधे हैं तो धरती है। जल,प्रकाश है तो संसार है।" हमें इनके महत्वपूर्ण को समझना भी चाहिए।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      पेड़-पौधों के बिना धरती की और जीवन की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है. पेड़-पौधे धरती को हरा-भरा और जीवन योग्य बनाते हैं. यदि पेड़ पौधे न हों तो हम सब सांस नहीं ले सकते हैं, फिर न हम रहेंगे न धरती. इसी तरह जल व प्रकाश (सूर्य) के बिना संसार का अस्तित्व संभव नहीं है, क्योंकि पेड़-पौधे ऑक्सीजन देते हैं, बारिश लाते हैं और जल-प्रकाश जीवन के आधार हैं, जो एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं. जल जीवन का स्रोत है और प्रकाश ऊर्जा का, जो पेड़-पौधों के प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के लिए भी ज़रूरी है और इन सबका मेल ही संसार को चलाता है. संक्षेप में, यह एक सुंदर संदेश है कि हमें प्रकृति के इन तत्वों पेड़-पौधों, जल और प्रकाश का सम्मान करना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि वे ही हमारे जीवन और इस संसार के आधार हैं.

- लीला तिवानी 

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

        धरती और पेड़ पौधों को एक दूसरे का पूरक कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं क्योंकि धरती पर बिना पेड़ पौधों के जीवन संबंध नहीं और बिना जीवन के धरती वीरान होगी। पेड़-पौधों के लिए जीवन के लिए जल और प्रकाश होना भी अत्यावश्यक है।अब ये सब एक दूसरे के पूरक हुए ‌। इस तरह संसार और धरती की जल,प्रकाश पेड़ पौधों में के बिना कल्पना व्यर्थ है। धरती पर जहां जहां इन सबका संतुलन है वह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। धरती का सिंगार वृक्ष हैं, वृक्षों हित जल,प्रकाश जरुरी। गतिमान संसार है इनसे, धरती घूमें अपनी धुरी। पेड़ पौधों से विहीन धरती पर मनुष्य तो क्या पशु पक्षी तक नहीं रह पाते। इसलिए पेड़ पौधों को लगाकर धरती के अस्तित्व को बचाए रखने में अपना योगदान करते रहना चाहिए।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

     पेड़ पौधे हैं तौ जीवन की आस है... पेड़ पौधे हैं तौ जीवन की सांस है .. पेड़ पौधों के आधार पर ही धरती टिकी है , व इसपर जीव जंतु रहते हैं , पेड़ पौधों से ही धरी का अस्तित्व है ! जल ही जीवन है , व जल से ही धरती पर संसार है ! प्रकाश भी धरती पर रहनेवाले जीव जंतुओं , व पेड़ पौधों को जीने के लिए आवश्यक गर्मी व प्रकाश प्रदान करता है !!जल व प्रकाश , दोनों जीव जंतुओं व पेड़ पौधों के जीवन के लिए आवश्यक हैं , व इनके आधार पर ही धरती पर जीवन है !! ये सब चीजें , आपस में एक दूसरे पर निर्भर हैं , व एक का अस्तित्व , दूसरे पर आधारित होता है ! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

       आज के सुन्दर विषय को देखकर मुझे एक पुरानी कहावत याद आ रही है :-

जग सुधरेगा तीन सुधारें,

भूमि जल और वायु हमारे।

वास्तव में यदि पेड़ पौधे हैं और चारों ओर हरियाली है तो यह धरती का श्रंगार है। इससे ही हमें जीवनदायिनी प्राणवायु स्वच्छ प्राप्त होती है। किंतु यह शर्मनाक है कि आज जितने भी पेड़ लगाए जा रहे हैं वे ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं और उनमें से भी अधिकांश पेड़ देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं। वृक्षारोपण मात्र फोटो खिंचवाने तक सीमित हो गया है। वहीं दूसरी ओर स्वच्छ जल और प्रकाश के बिना जीवन की कल्पना करना भी बेमानी है। दिनों-दिन बढ़ता जल प्रदूषण नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है जो कि चिंता का विषय है। यद्यपि प्रशासनिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जाता है लेकिन कुछ ही योजनाएं यथार्थ के धरातल तक पहुंच पाती हैं। पेड़ पौधे धरती जल और प्रकाश, ये सभी किसी ना किसी रूप में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ये सभी हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं।

-  संजीव "दीपक" 

 धामपुर  - उत्तर प्रदेश     

       धरती पेड़ पौधे प्रकृति की हरियाली में जन, जीवन ,जल प्रकाश मय संसार बसा है ! जिसे संरक्षित कर समय के अनुसार उपयोग करना ,हमें प्रकृति के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करते हैं आधार हमें जीवन प्रदान करते है ।संसार प्रकृति की सुंदरता हमें आनंद और शांति प्रदान करती है। प्रकृति में संतुलन बनाना, हमारे जीवन रक्षा के लिए आवश्यक है ! पेड़ पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। उनके पोषण से हमारा पोषण होता है !जल संसाधनों का संरक्षण करना और उनका सही उपयोग करना आवश्यक है। प्रदूषण रोकना, पर्यावरण को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। प्रकृति में पर्यावरण , प्राणवायु को बचाने का महत्व जनमानस समझ पाये । जलसंरक्षण , मिट्टी पर्यावरण की पहचान बताना है ।  यथार्थ के धरातल पर रह अपने आप को "आप दीपों भव" की जलते हुए दीये में की भाँति जल कर अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा   भी आकाश धरती के बीच विचरण करते ,परिंदों से मिलती है ! नित नए घोंसले बनाना ,उड़ना गिरना,चढ़ना , तिनका तिनका जोड़ मितव्यता से खुशहाल जीवन व्यतीत करना सब कुछ हमें सिखते है ! 

माँ विशाल काय पीपल छाँव है 

माँ निरसता भरी जीवन की प्राणवायु है 

माँ ब्रह्मास्त्र वर्चस्व जीवन आधार है  

माँ धरा वायुमंडल की प्यास है 

माँ तेरी सूरत सीरत कोई मिशाल नही है

माँ आँचल पीपल की छाँव से कम नही है 

माँ कलेजे से आती आवाज़ मुझे काटो नही 

माँ तेरी छाँव में ही जीवन अमृत रस पान है 

माँ प्रकृति विश्वास की अमूल्य धरोहर है  !

माँ वृक्षों फूलों फलों सा सुन्दर जीवन है 

माँ पीपल की छाँव झुलता बचपन है 

दिव्य देव्य शक्ति की पहचान है  

जो धरती आकाश संबंध  को बनाते !!

- अनिता शरद झा 

रायपुर -छत्तीसगढ़ 

       अगर प्रकृति के अनमोल उपहार की बात करें तो पेड़ पौधे  धरती का श्रृंगार  ही नहीं हैं बल्कि जीवन का आधार भी हैं इनके बिना पृथ्वी   का अस्तित्व संभव नहीं है, तो आज इसी चर्चा को आगे बढाते हैं कि पेड पौधे हैं तो धरती है ,जल  प्रकाश है तो संसार, मेरा मानना है कि,पेड़, पौधों के बिना जीना संभव ही नहीं है क्योंकि इनके बगैर पर्यावरण संतुलन नहीं हो सकता,चाहे शुद्ध हवा की बात हो, आक्सीजन के स्रोत की बात है या जड़ी बूटियों का बिषय हो पेड पौधे हमारे  लिए हर तरह की सुविधाएं प्रदान करते हैं,मौसम को अनुकूल बनाने में इनके ही योगदान रहता है  इनके बिना तो जीवन संभव ही नहीं अगर मानसिक शांति की बात की जाए,इनकी हरियाली आंखों को सुकून,तथा सेहत के लिए फायेदेमंद होने के  साथ  धरती को कटाव से  बचाने ,हरियाली कायम रखने व खाने , पीने यहां तक की औषधियों का कार्य सभी इन्हीं के कारण है,धरती पर कोई भी कार्य इनके बिना संभव नहीं इसलिए पेड ,पौधों के बिना सब सुनसान है,कहने का भाव पेड़ पौधे धरती के लिए जीवनदायिनी हैं, रही बात  जल और प्रकाश की तो जिस तरह प्रकाश के बिना कुछ नहीं दिखता  जल के बिना जीवन और पूरा‌ संसार संभव नहीं क्योंकि जल है तो कल है    क्योंकि जल के बगैर भविष्य ‌की कल्पना करना संभव नहीं, इसके बिना दुनिया बंजर ही नहीं अपितु सूनी हो जायेगी, कहने का‌ मतलब जल,प्रकाश और पेड पौधे मिलकर हमारे संसार को जीवन देते हैं, अन्त में यही कहुंगा कि जल,प्रकाश, पेड ,पौधे एक दुसरे पर निर्भर होकर ही पृथ्वी पर जीवन का आधार बनाते हैं और पर्यावरण को स्वस्थ रखते हैं और इनके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव हो ही नहीं सकता इसलिए पेड,पौथे हैं तो धरती है,जल ,प्रकाश है तो संसार है।

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर 

      पेड़ पौधों, जल, प्रकाश के बिना जीवन नहीं है। पर्यावरण ही जीवन का आधार है।पेड़ पौधे हैं तो धरती है, पेड़-पौधे सिर्फ हरियाली नहीं…वो *धरती की आत्मा* हैं। पेड़ मिट्टी को बांधते हैं → बाढ़ रोकते हैं।पेड़- ऑक्सीजन देते हैंतो हमें प्राण वायु मिलती है जिससे सांस लेकर हम जीवित हैं। पेड़-छाया देते हैं,,गर्मी से बचाते हैं, वाष्पोत्सर्जन के कारण वर्षा होती है वर्षा के कारण खेतों में हरियाली फल फूल और अनाज पैदा होते हैं- फल, लकड़ी, औषधि देते हैं तभी तो जीवन  अनवरत चलता है पेड़ नहीं = धरती नहीं = जीवन नही जल और प्रकाश — ये दो चीजें। जीवन के आधारभूत तत्व*है- बिना पानी के कोई जीव नहीं जी सकता- पानी = जीवन की शुरुआत (माँ के गर्भ से लेकर नदी तक)- पानी = संस्कृति, धर्म, जीवन का हिस्सा- सूर्य का प्रकाश , ऊर्जा का स्रोत- प्रकाश से फसलें उगती हैं- प्रकाश से दिन-रात का चक्र → जीवन की गति निर्धारित होती है। प्रकृति बिना स्वार्थ के हमें जीवन देती है परंतु प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके मनुष्य ने बहुत कुछ खोया है।  
“जीवन बचाने के लिए पेड़ लगाओ, पानी बचाओ, प्रकाश को प्रदूषण से बचाओ

प्रकाश है तो संसार है 

 पेड़ लगाना = जीवन लगाना

 पानी बचाना = भविष्य बचाना

 प्रकाश को सम्मान देना = धरती को सम्मान देना के समान है। 

- रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

      यह पंक्ति केवल एक कथन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का सार है। इसमें प्रकृति के चार मूल तत्व—धरती, पेड़-पौधे, जल और प्रकाश—के परस्पर संबंध को अत्यंत सरल, किंतु गहन भाव में अभिव्यक्त किया गया है। पेड़-पौधे धरती के प्राण हैं। वे केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवनदायिनी ऑक्सीजन, वर्षा का संतुलन, मिट्टी का संरक्षण और जैव विविधता का आधार हैं। यदि पेड़ नहीं होंगे, तो धरती धीरे-धीरे बंजर होती जाएगी और जीवन का चक्र टूट जाएगा। इसलिए यह कहना पूर्णतः सत्य है कि पेड़-पौधे हैं, तभी धरती जीवित है। जल जीवन का मूल स्रोत है। बिना जल के कोई भी जीव, कोई भी सभ्यता, कोई भी संस्कृति संभव नहीं। आज जब जल संकट वैश्विक चुनौती बन चुका है, तब यह पंक्ति हमें चेतावनी देती है कि जल संरक्षण केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व है। प्रकाश ज्ञान, ऊर्जा और आशा का प्रतीक है। सूर्य का प्रकाश ही जीवन को गति देता है—फसलें उसी से पकती हैं, ऊर्जा उसी से उत्पन्न होती है और जीवन उसी से प्रकाशित होता है। प्रकाश के बिना संसार केवल अंधकार नहीं, बल्कि जड़ता में बदल जाता है। इस कथन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक रूप में प्रस्तुत करता है, न कि केवल वैज्ञानिक या वैधानिक भाषा में। यह मनुष्य को याद दिलाता है कि वह प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका संरक्षक है।आज आवश्यकता है कि हम इस भाव को व्यवहार में उतारें—

पेड़ लगाएँ,

जल बचाएँ,

ऊर्जा का संयमित उपयोग करें,और भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, हरित और प्रकाशमय संसार छोड़ें।

निष्कर्षतः,

“पेड़-पौधे हैं तो धरती है, जल-प्रकाश है तो संसार है”—

यह वाक्य मानव को प्रकृति के साथ संतुलन, संवेदनशीलता और सहअस्तित्व का संदेश देता है। यदि हम इसे समझ लें और अपना लें, तो धरती भी बचेगी और हमारा भविष्य भी।

- डाॅ.छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

      प्रकृति और पर्यावरण के लिए हरियाली, यानी पेड़ पौधे अतिआवश्यक हैं। ये तो हम सभी जानते हैं। पेड़- पौधे हैं तो हम सांस ले पा रहे। जो हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः हमें  सदैव पेड़ -पौधे लगाकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। जल , हवा, पानी, हरियाली,प्रकाश में सब मिलकर प्रकृति के पर्यावरण के संतुलन को बखूबी बनाए रखते हैं। हम सब को प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस अनमोल  ख़ज़ाने को बहुत सम्हाल कर रखना चाहिए और इन सब के प्रति हमें ऊपरवाले का शुक्रगुजार होना चाहिए। ईश्वर द्वारा प्रदत्त सारी प्राकृतिक सम्पदा की अहमियत हमेशा समझने की जरूरत है। ये सब हैं तो हम हैं।

- डॉ पूनम देवा 

पटना - बिहार

    पेड़-पौधे हैं तो धरती है,जल-प्रकाश है तो संसार है।पेड़-पौधों से ही जीवन है।अगर यह नहीं होंगे तो न ही वायु-मंडल  होगा,न ही वर्षा होगी और न फिर यह धरती ही रह पाएगी।सब कुछ पेड़-पौधों पर ही आश्रित है। आज इसका सीधा उदाहरण हमें  पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।आए दिन वहाँ नयी योजना का प्रवेश हो रहा है, जिसके चलते पेड़-पौधें काटे जा रहे हैं और परिणाम यह हो रहा है कि भूस्खलन अपनी पराकाष्ठा पर है।धरती भी अब विकराल रूप धारण  कर रही है। भूकंप ने तो अब यहाँ से जैसे मित्रता ही कर ली है। चारों तरफ बस विनाश की ही स्थिति है। प्रकृति ने अपना रौद्र रूप अब दिखाना प्रारंभ कर दिया है। प्रदूषण ने सब कुछ दूषित कर दिया है। न ही जल शुद्ध है और न ही हमारा वायु मंडल ही स्वच्छ है।कल- कारखानों के धुओं से पृथ्वी बहुत प्रभावित हो चुकी है।अब तो वर्षा भी एसिड रेन में बदल चुकी है। पृथ्वी मंडल की परतें भी अब दूषण के कारण हानिकारक किरणों में बदल रही हैं। कहीं न कहीं जरूरत से ज्यादा तकनीक और विज्ञान हमारा ही नुकसान कर रहे हैं।अगर यही स्थिति बनी रही तो न ही यहाँ शुद्ध जल होगा और न ही स्वास्थ्यवर्धक प्रकाश होगा और न ही पेड़-पौधें पनप पाएंगे।जो हवा को शुद्ध करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।जब ये सब नहीं तो जीवन और यह संसार भी नहीं रहेगा।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " धरती पर पेड़-पौधे, जल , पहाड़, नदी , तालाब आदि सब कुछ आवश्यक अंग है। फिर भी धरती पर संतुलन बिगड़ रहा है । पेड़ - पौधे काट - काट कर के बड़ी-बड़ी फैक्टरी, बिल्डिंग आदि बन रही है। जिससे वातावरण बिगड़ता जा रहा है। यह सब कुछ धरती के लिए खतरा बनता जा रहा है। 

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)

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