आज की हिंदी पत्रकारिता सोशल मीडिया के कारण तीव्र, सुलभ और अधिक लोकतांत्रिक हुई है। पहले समाचार का प्रवाह एकतरफ़ा था, पर अब फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्मों ने सूचना को दो-तरफ़ा संवाद में बदल दिया है। इससे कई बदलाव उत्पन्न हुए हैं। त्वरित सूचना प्रसार बढ़ गया है, घटनाएँ मिनटों में करोड़ों तक पहुँचती हैं। इससे हिंदी पत्रकारिता की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। नागरिक सीधे अपनी राय और अनुभव साझा कर लेते हैं, जिससे पत्रकारों को जन-सरोकार समझने में सरलता होती है। वैकल्पिक मीडिया का उदय हुआ है जिसके कारण अब केवल मुख्यधारा मीडिया ही नहीं, बल्कि यूट्यूब चैनल, ब्लॉग, डिजिटल पोर्टल और नागरिक पत्रकार भी विमर्श का हिस्सा हैं। फिर भी फेक न्यूज़, ट्रोलिंग और अधूरी सूचना जैसी चुनौतियाँ सत्यापन और नैतिकता की आवश्यकता की याद दिलाती हैं। अन्ततः सोशल मीडिया ने हिंदी पत्रकारिता को गतिशील, विवेकशील और बहुपक्षीय बनाया है। आने वाला समय इस सहयोग को और भी सशक्त करेगा।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू ) – जम्मू और कश्मीर
हिंदी अब सिर्फ भारत की नहीं सोशल मीडिया पर हर जगह हिंदी छाई हुई है → आज हिंदी सिर्फ घर की भाषा नहीं… ये ग्लोबल कंटेंट की भाषा बन रही है।विश्व हिंदी दिवस — 10 जनवरी क्यों मनाते है? क्योंकि1975 में नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन हुआ → उसी दिन को याद रखने के लिए 2006 से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। ये सिर्फ उत्सव नहीं ये एक _मिशन_ है हिंदी को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयास रत है। मार्केटिंग, एजुकेशन में हिंदी की डिमांड बढ़ रही- विदेशों में भी हिंदी सीखने वाले बढ़ रहे है- हिंदी को “छोटी भाषा” समझने वाले अभी भी हैं मुझे हिंदी भाषी होने का गर्व है “मैं हिंदी में लिखूँगी — ब्लॉग, कमेंट, पोस्ट — ताकि हिंदी डिजिटल स्पेस हिन्दी जीवित रहे!”_“मैं अपने बच्चे को हिंदी में पढ़ने, लिखने और सोचने के लिए प्रेरित करती रहूँगी,हिंदी हमारी शान है,संस्कृति की पहचान है। यही देश का अभिमान है । "जय हिंद- जय हिंदी- जय हिंदुस्तान"
- रंजना हरित
बिजनौर - उत्तर प्रदेश
नारदजी को पत्रकारिता का जनक कहा जाता है क्योंकि ये भूतल की खबरों को स्वर्ग में और स्वर्ग की खबरों को भूतल में सम्प्रेषित करते थे। स्वर्ग से भूतल पर कभी कभी किसी व्यक्ति विशेष के लिए संदेश भी आते थे जिसे लोग आकाशवाणी कहते थे। अतः हम सूचनाओं के आदान प्रदान को पत्रकारिता कह सकते हैं। प्राचीन काल में सूचनाओं का आदान प्रदान हरकारों और पत्रों के माध्यम से होता था। धीरे सूचनाओं का आदान प्रदान अखवारों, रेडियो, टेलीविजन आदि के माध्यम से होता हुआ अब इंटरनेट के माध्यम से कम्प्यूटर, मोबाइल, इंस्टाग्राम, वाट्सएप, फेसबुक, ब्लाग आदि के माध्यम से होने लगा। मोबाइल के इन सभी घटकों को सोशलमीडिया कहा जाने लगा। अनेक स्रोतों से प्राप्त समाचारों को लोग वाट्सएप, फेसबुक आदि के द्वारा आपस में लोग साझा करने लगे। सोशलमीडिया के कारण लोग अपने टेलेंट को विश्व के कोने कोने में फैलाने लगे। आज गूगल के माध्यम से लोग अपनी अपनी भाषाओं में विभिन्न जानकारियां और समाचार प्राप्त कर रहे हैं। सोशल मीडिया ज्ञान का भंडार हो गया है। हर विषय की जानकारी इस पर उपलब्ध है। लेकिन सोशलमीडिया पर कुछ हानिकारक सामग्री भी होती है जो समाज और राष्ट्र के लिए घातक भी है। इसलिए हमें सावधानी पूर्वक ऐसी सामग्री का ही आदान - प्रदान करना चाहिए जो हमारे लिए उपयोगी हो। अर्थात सार सार को गहि रहे, थोथा देय उड़ाय। साथ ही इसकी लत लग जाने से हमारा कीमती समय भी बर्बाद होता है। अतः इसका प्रयोग सीमित ही करना चाहिए और प्रामाणिक सूचनाओं का ग्रहण करना चाहिए।
- डॉ अवधेश कुमार चंसौलिया
ग्वालियर - मध्यप्रदेश
आज विकासशील दौर में समकालीन हिंदी पत्रकारिता सोशल मीडिया के माध्यम से विश्व स्तर पर विभिन्न साहित्यिक सामाजिक चिंतन को जोड़ रही है। जहां ई पत्रिकाएं, ब्लॉग, यूट्यूब के द्वारा सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दे रही है। दलित आदिवासी नारी वर्ग को संबल मिल रहा है। पत्रकारिता के माध्यम से राजनीतिक गलियारों की सूचनाओं का प्रेषण तथा पूंजीवाद के दौर में बाजारवाद की स्थितियों में संतुलन बनाकर सूचनाओं की विश्वसनीयता को बढ़ाकर विश्व स्तर पर भी व्यापार जगत में क्रांति हो रही है ।नवीनतम साहित्यिक विधाओं का जन्म हो रहा है। कविता में इक नयी फायकू विधा ,कहानी, यात्रा के वृतांत ,समीक्षाएं ,आलेख, सृजन हेतु प्रतियोगिताएं कराकर हिंदी के प्रति रुचि तथा प्रेम का संवर्धन हो रहा है। देखा जाए तो समकालीन हिंदी पत्रकारिता ने साहित्य, समाज ,संस्कृति तथा राजनीति से देश को विदेशों से जोड़ने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- डॉ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
समकालीन हिंदी पत्रकारिता में सोशल मीडिया ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इन दिनों बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण (उत्तराखंड) राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया की विशेष भूमिका रही है। ऐसा यह एक नहीं अनेक कांड हैं। क्षेत्रीय समस्याओं और उपलब्धियों को सोशल मीडिया ने मुख्य मीडिया तक पहुंचाया है।सोशल मीडिया ने प्रतिभाओं को मंच दिया और उसकी चर्चा फिर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई।आज सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति के भीतर बैठे पत्रकार को जगा दिया है, जागरूकता पैदा की है अपने अधिकारों के प्रति इस सबने समकालीन हिन्दी पत्रकारिता को काफी प्रभावित किया है। अखबारों में सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों से सीधे सामग्री लेकर प्रकाशित होती है। संपादक सीधे प्रभावित व्यक्ति से खबरें ले रहे हैं।सोशल मीडिया को संज्ञान में लेकर विभिन्न चैनल नित परिचर्चा आयोजित कर रहे हैं। कितने ही स्वतंत्र पत्रकार ई अखबार,ई पत्रिकाओं और अपने अपने यूं ट्यूब चैनल्स के माध्यम से जनसरोकार की पत्रकारिता कर रहे हैं।सोशल मीडिया समकालीन पत्रकारिता का एक ऐसा आयाम बनकर उभरा है जिसने परंपरागत पत्रकारिता का चेहरा बदल दिया है।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल '
धामपुर - उत्तर प्रदेश
सोशल मीडिया पत्रकारिता से तात्पर्य समाचार और सूचना एकत्र करने, रिपोर्ट करने और प्रसारित करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की प्रथा से है। इसने पत्रकारों के अपने पाठकों के साथ संवाद करने के तरीके को बदल दिया है, जिससे वास्तविक समय में अपडेट, सहभागिता और व्यापक दर्शकों तक शीघ्रता से पहुंचने की क्षमता संभव हो गई है।सोशल मीडिया पत्रकारिता पत्रकारों और उनके दर्शकों के बीच तत्काल प्रतिक्रिया और बातचीत की अनुमति देती है, जिससे एक अधिक सक्रिय समुदाय को बढ़ावा मिलता है। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पत्रकारों के लिए न केवल समाचार साझा करने बल्कि अपने अनुयायियों से कहानियां प्राप्त करने के लिए भी आवश्यक उपकरण हैं।इस प्रकार की पत्रकारिता को गलत सूचना, फर्जी खबरों और रिपोर्टिंग से पहले स्रोतों के सत्यापन की आवश्यकता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सोशल मीडिया ने समाचार जगत का लोकतंत्रीकरण कर दिया है, जिससे हाशिए पर रहने वाले समुदायों की आवाज़ें सीधे वैश्विक दर्शकों के साथ अपनी कहानियाँ साझा कर सकती हैं। समाचार संगठन दर्शकों के बदलते व्यवहार के अनुरूप ढलने के लिए अपनी रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं में सोशल मीडिया रणनीतियों को तेजी से एकीकृत कर रहे हैं।
- लीला तिवानी
सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया
समकालीन हिंदी पत्रकारिता में सोशल मीडिया का योगदान दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया को यदि "मेरुदंड" कहा जाये तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी।एक समय था कि प्रिंट मीडिया ही एकमात्र विकल्प था, किंतु वर्तमान में लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों एवं टीवी चैनलों के अपने अपने मोबाइल ऐप, फेसबुक पेज और व्हाट्स एप चैनल हैं जो कि सोशल मीडिया पर छाये रहते हैं। अब समाज का एक बड़ा हिस्सा समाचारों और अन्य जानकारी के लिए समाचार पत्रों अथवा टीवी पर निर्भर नहीं करता है। किसी भी घटना को वायरल होने में नाममात्र का समय लगता है।
- संजीव "दीपक"
धामपुर - उत्तर प्रदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ने समाचार को वास्तविक समय में साझा करने की सुविधा दी। इससे पत्रकारिता में तेजी और व्यापक पहुँच आई है। जनता की भागीदारी। सोशल मीडिया के माध्यम से पाठक और दर्शक न केवल सूचना ग्रहण करते हैं, बल्कि समाचार पर अपनी राय और अनुभव साझा करके पत्रकारिता में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।विविध स्रोतों से सत्यापन। जबकि परंपरागत मीडिया में समाचार जुटाना समय-साध्य था, सोशल मीडिया ने पत्रकारों को अनेक स्रोतों से सीधे समाचार और घटनाओं का सत्यापन करने की सुविधा दी। सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता :-
सोशल मीडिया ने लोकप्रिय विषयों, सामाजिक अन्याय, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर पत्रकारिता को तेज़ और असरदार बनाया। कई बार छोटे सोशल मीडिया अभियान बड़े समाचार बन जाते हैं। हिंदी पत्रकारिता का विस्तार राकेश मित्तल का मानना था कि हिंदी पत्रकारिता केवल समाचार पत्रों तक सीमित नहीं रह सकती। सोशल मीडिया ने इसे ऑनलाइन पोर्टल, ब्लॉग और वीडियो चैनल के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचाया।
समकालीन पत्रकारिता पर असर
सकारात्मक: समाचार त्वरित, बहुस्तरीय और जन-सहभागी बन गया।
चुनौतीपूर्ण: झूठी खबरें और अफवाहें फैलाने की समस्या भी बढ़ी।
उत्तरदायित्व: पत्रकारों के लिए सोशल मीडिया पर सत्यापन और नैतिकता बनाए रखना अनिवार्य हो गया।
निष्कर्ष :-
अंततः, राकेश मित्तल का सपना था कि हिंदी पत्रकारिता समाज के लिए ज्ञान और सच का दीपक बने। सोशल मीडिया ने उस दीपक को नई दिशा और गति दी है।
-डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
अगर पत्रकारिता में सोशल मिडिया की भूमिका की बात की जाए तो लेखन के निरंतर बदलते क्षेत्र में सोशल मिडिया एक प्रमुख शक्ति बन गया है जिसने समाचारों के प्रसारण के पठन और संवाद के तरीकों को बदल के रख दिया है सोशल नेटवर्क के जुड़ने से न केवल सूचना का प्रवाह तेज हुआ है बल्कि कहानियाँ कहने और लोगों को जोड़ने के नए तरीके भी सामने आए हैं यही नहीं पत्र,पत्रिकाओं में लेख लिख कर इस युग के लेखकों ने जनता तक आधूनिक युग में जन संस्कृति का प्रचार बढाने का प्रयास किया है कहने का भाव समकालीन हिन्दी पत्रकारिता में सोशल मिडिया का योगदान अत्यंत लाभकारी रहा है यही आज की चर्चा का विषय है,अन्त में यही कहुंगा कि नये नये रचनाकारों के लिए सोशल मिडिया एक अच्छा प्लेटफार्म साबित रहा है यही नहीं रचनाकार अपनी मौलिक रचनाओं को फेसबुक के माध्यम से भी जन सामन्य तक पहुंचा रहे हैं।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
देश की राजभाषा राष्ट्रभाषा संपर्क भाषा हिन्दी में हिंदी पत्रकारिता में सोशल मीडिया का योगदान अतुल्य है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। देश की 80 प्रतिशत जनता हिन्दी बोलती समझती है - - हाँ देवनागरी लिपि में लिख पढ़ नहीं पाती। इसलिये सोशल मीडिया का योगदान हिन्दी पत्रकारिता में कुछ कम हो सकता है लेकिन उसका विशेष असर नहीं पड़ता है। हिन्दी न्यूज पेपर धडल्ले से बिकते हैं पढे जाते हैं। हिन्दी समाचार पत्र लोगों के दिलों में बसते हैं। किसी विशेष समाचारपत्र का नाम नहीं लेना चाहिए लेकिन कहना बेमानी नहीं होगा कि वरदायिनी देवभाषा संस्कृत की लिपि देवनागरी में उद्घृत हिन्दी पत्रकारिता में सोशल मीडिया का योगदान सराहनीय और सर्वमान्य है - - था और रहेगा।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
" मेरी दृष्टि में " सोशल मीडिया के अनेक प्लेटफार्म हैं जैसे:- फेसबुक, एक्स आदि अनेक एप हैं। जो सोशल मीडिया की भूमिका में योगदान कर रही हैं। छोटी से छोटी सूचना भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच जाती है। यही सोशल मीडिया की भूमिका है। आज दुनियां के अधिकतर नागरिक के हाथ में मोबाइल है। जो सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है। परन्तु संसार को एक सूत्र में बंधने का सशक्त माध्यम साबित हो रहा है।
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